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Mahaprabhuji Ki Badhai

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Sapt suran teen graam yekais bhurchhana taana unchaas mille mandal
Part1-330
सप्त सुरन तीन ग्राम येकईस भूर्छना तान उनचास मिले मंडल मधि गावै । चारु करन हस्तक सुर नैन भेद भांति भांति उपजति गति निर्त कर नचावै ॥१॥ धिधि किट थुंग थुंग कुकुझे कुकुझे झिनिकट घिमिकिट धिमिकिट धिमिकिट मृदंग बजावै। “रसिक' प्रीतम छबि निरखत देवजुबति मोहत मन उमगि विविध कुसुम बरखत सुख पावै ॥२॥
Saarang
Dey faguwa vrajwasi thaado raha ..
Part3-384
दे फगुवा ब्रजवासी ठाडो रह ॥ रंग डार कित भाज्योरे लंगरवा करे मेरी हांसी ठाडो रह ॥ १॥| बालपनो खेलनमें खोयो गोकुल में मारी मासी ठाडो रह ॥२॥ पुरुषोत्तम प्रभुकी छबि निरखत जन्म-जन्म तिहारी दासी ठाडो रह ॥३॥
Hori-Kafi
Bunn tey baney aavat maaee vrajnath ..|
NityaPad-167
बन ते बने आवत माई ब्रजनाथ ॥| गावत गोरी राग बलल्‍लभ बालक साथ ॥ १॥ कसुंभी पाग सिर कुलह चंपक भरी सेहरौ कहूँ कहूँ कुसुम सिधिलाथ॥ बजावत पत्र शृंग कोलाहल आवत घोष पथ ॥ २॥। प्रिय सखा भुज अंस लीला धरें रतन खचित मुरली सोहै हथ ॥ गोविंद प्रभु के मुखारबिंद पर वारों कोटिक मनमथ ॥।३॥
Bihaag
Jagaave yashoda maiya jaago merey laalaa.. dathi mishree velabhar
NityaPad-024
जगावे यशोदा मैया जागो मेरे लाला।। दथि मिश्री वेलाभर लाई उठोहो कलेऊ करोहो गोपाल ॥। १॥ गो दोहनकी भईहे बिरिया टेरत सखा संगके ग्वाला ॥ आसकरनप्रभु मोहन नागर मुख देखन आईं वब्रजबाला ।।२॥
Ramkali
Kahat nandrani gopalason taatakon bulaay laavo bado parav uttarayan ..
Part2-234
कहत नंदरानी गोपालसों तातकों बुलाय लावो बडो परव उत्तरायन ।। ट्विजनकों दान देंहो अशीक्ञ वचन पढेहों खेलन ना जावो लाल बेठ रहो आंगन ।। १।। यह सुन मोहन कियो सिंगार सखा संग लेकें चले खिरक गो दोहन आय देखे बिन परत न चेन ।। सूरश्याम बाबा सों कहत हैं जु आज कहा तिहारे मैया कही मोसों बह मोदक ले आवे भवन ।।२।।
Pancham
Piya-sanga jaagi vrishabhaanu-dulari .
NityaPad-151
पिय-सँग जागी वृषभानु-दुलारी । अंग-अंग आलस जुँभात अति कुंज-सदन तें भवन सिधारी॥ मारग जात मिलि सखी औरें तब हीं सकुचि तन-दसा विसारी | ' छीत' स्वामिनी सों कहति भामिनी ! तोहिं मिले निसिगिरिवरधारी ॥
Bilawa
Aarti vaarat radhika nagri..
NityaPad-222
आरती वारत राधिका नागरी।। तन कनकथार भूषणरत्नदीपक कियें कमलमुक्तावली मंगल उजागरी ॥|१॥| रुणित कटिमेखला सुभग घंटावली झालर शंख जेकरत उच्चागरी॥ अनुराग छत्र अंचल चमर नयन चलभाव कुसुमांजली चतुरगुण आगरी ॥ २॥ सखी यूथन लिये विविध भोजन 'किये सुखद गिरिवरधरन रिझबत सुहागरी ॥ विष्णुस्वामीपथ श्रीवल्लभपदपद्य नमत कृष्णदास बड़ भागरी॥३॥
Saarang
Leomerehattechhidai...
NityaPad-193
लियोमेरेहाथततेछिडाई॥। तावनको लावतहीमाखन डार्‌योहै कुंवर-कन्हाई ॥ १॥ बूझनलाग्योमोहीकों कौन है पाहुनीकहातेरोनाम ।। देखियत कहूंभलीमानसरी कहिधोतिरोंगाम ।।२॥| देखतरूप ठगीसीठाडी मनमोहन रूपनिकाई ॥ परमानंद दासकोठाकुर प्रेमठगोरीलाई ॥। ३॥।
Bilawal
Sakhiri kaahekin gaharu lagaavati )! sabakou aisau sukh
Part1-005
सखीरी काहेकीं गहरु लगावति )! सबकोऊ ऐसौ सुख सुनिकँ क्‍यों नाहिन उठि आवति ॥१॥ आज सो बात विधाता कीनी जो जाके मन भावति ॥ सुतको जन्म यशोदाके भ्रृह तहाँ लगि तोहि बुलावत ॥२॥ दि रोचन भरि वेगि चलो मिलि कनक थार कर लावति ॥ सौंचेहु सुत भयौ नंदकें तोहि नहीं बौरावति ॥३॥ अंचल उड़त शिथिल अलकावलि सुमन सुधा बरषावत ॥ सूरदास शोभित ते अवसर जहाँ तहाँतें उठि धावत ॥४॥
Devgandhar
Briloki nidhi nirmit vidhana rachi pachi keaney pyaari |
Part1-201
ब्रिलोककी निधि निर्मित विधना रचि पचि कीनी प्यारी | मुख ससी षोडसकला संपूरन देखत छीन होत तुव वचनामृत सुन कोकिला कुहुकत भई कारी ॥१॥ दारयों हु दरकी दसन ज्योति देखत पेखत धसि पाताल व्याल बेनीको जंघ खंभ देख कदली कही होत नारी । केहरी कंचन कपोत खंजन मृग मीन हीन “विचित्र” बखाने सोई श्री वृषभानदुलारी ॥२॥
Kalayan
Gaay khilaban chaley gopal..
Part2-049
गाय खिलाबन चले गोपाल॥ वागोश्रेत तासको पहेरें गोकर्णाकृति छोगालाल ॥१॥ फरहरात पीतांबर करमें दुरिमुरि देखत सब त्रजबाल॥ धोरी धुमरि काजर पीरी गाय बुलाई टेरत ग्वाल ॥२ ॥ जाको बछरा ताहि दिखावत अरबराय दोरी तिही काल ॥ हँसत परस्पर द्वारकेश प्रभु अति आनंदित गोप गुवाल ॥३ ॥
Sarang
Bethiata maanon kaam chhataasi soch karat baat
Part2-356
बेठीअटा मानों काम छटासी सोच करत बात बोरे॥ जाय कहोकोउ मेरे भैयासों। एते भुपति तेंने काहेकुं जोरे ॥१॥ नंदनंदन ब्रजचंद विराजे ते देखे तेतेकारे अरु गोरे॥ नंददास सब सजल कहावत हारके कांमन आवत ओरे ॥२ ॥
Todi
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