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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Bhor hii vall‍labh kahiye.
भोर ही वल्‍लभ कहिये। आनंद परमानंद कृष्णमुख सुमर सुमर आठों सिद्धि पैये ॥१॥ अरु सुमरो श्रीविद्दल गिरिधर गोविन्द द्विजवरभूप । बालकृष्ण गोकुल-रघु-बदुपति नव घनश्याम स्वरूप ॥२॥ पढो सार बलल्‍लभवचनामृत जपो अष्ठटाक्षर नित धरी नेम | अन्य श्रवणकीर्तन तजि, निसदिन सुनो सुबोधिनी जिय धरि प्रेम ॥३॥| सेवो सदा नंदयशोमतिसुत प्रेम सहित भक्ति जिय जान । अन्याश्रय, असमर्पित लेनो, असद्‌ अलाप, असत्‌ संग, हान ॥४॥ नयनन निरखो श्रीयमुनाजी और सुखद निरखो ब्रजधाम | यह संपत्ति वल्‍लभतें पैये, रसिकनको नहि औरसों काम ॥।५॥।
Ath Shree Mahaprabhuji
NityaPad-001
Bhairav
Praatsamay uthh kariye shrilakshmansut gaan ..
प्रातसमय उठ करिये श्रीलक्ष्मणसुत गान ॥ प्रकट भये श्रीवल्लभप्रभु देत भक्तिदान ॥१॥ श्री विद्लेश महाप्रभु रूपके निधान ।॥ श्रीगिरिधर श्रीगिरिधर उदय भयो भान ॥ २॥ श्री गोविंद आनंदकंद कहा वरणो गुणगान॥ श्रीबालकृष्ण बालकेलि रूप ही सुहान ॥ ३॥ श्रीगोकुलनाथ प्रकट कियो मारग वखान ॥ श्रीरधुनाथलाल देख मन्मथ ही लजान ॥४॥। श्रीयदुनाथ महाप्रभु पूरण भगवान ॥ श्रीधनश्याम पूरणकाम पोधीमें ध्यान ।।५॥ पांडुरंगविट्डलेश करत वेदगान ॥ परमानंद निरख लीला थके सुर विमान ॥।६।।
Ath Shree Mahaprabhuji
NityaPad-001
Bhairav
Shree vall‍labh santat suyash nitya uthh gaaruun...
श्री वल्‍लभ संतत सुयश नित्य उठ गारऊं।॥ मनक्रमवचन क्षण एको न विसराऊं ॥१॥ श्रीपुरुषोत्तम अवतार सुकृतफल जगतबंदन श्रीवि्ठलेश हुलराऊं ॥ परस पदकमलरज निरख सुंदरनिधि प्रेमपपुलकत कलेश कोटिक नशाऊं॥२॥ श्रीगिरिधर देवपतिमानमर्दन करन घोखरक्षक सुखद लीला सुनाऊं॥। श्रीगोविंद ग्वालसंग गाय ले चलत वन विशद अंबुज हाथ शिर परशाऊं।॥।३॥ श्रीबालकृष्णसहज बालकदशा कमललोचन रंग रुचि बढाऊं ।। भक्तिमार्ग प्रकटकरण गुणराशि ब्रजमंडल श्रीगोकुलनाथ लडाऊं ॥।४॥ श्रीरघुनाथ धर्मधीर शोभासिंधु दुख दूर बहाऊं।॥ पतितउद्धारण महाराज श्री यदुनाथ रसनाचातक ज्यूं रटाऊं ॥५॥ श्रीघनश्याम रूप अभिराम रसिकरस निरख नयन सिराऊं ॥ चतुर्भुजदास पर्‌यो द्वारे प्रणपति करें श्रीवललभकुलचरणामृत भोर उठ पाऊं ॥६॥।
Ath Shree Mahaprabhuji
NityaPad-001
Bhairav
Jaya jaya jaya srivallabhnath .. sakal padarath jaake haath .. 1..
जय जय जय श्रीवललभनाथ ।। सकल पदारथ जाके हाथ ।। १॥ भक्तिमार्ग जिन प्रकट कर॒यो | नामविश्वास जगत उद्धरूयो |२॥ सब मत खंड निरूपे वेद ॥ प्रेमभक्तिको जान्यो भेद ॥३॥ कारण करण समरथ भुजदंड ॥॥ मायावाद कियो मत खंड ।।४॥ परमपुरुष पुरुषोत्तम अंशी ॥ भक्तजनन मनकरत प्रशंसी ॥५॥।| जाके नाम गुण रूप अनंत ॥ निर्मल यश गावत श्रुति संत ॥६॥। सुंदरस्थाम कमलदललोचन || कृपाकटाक्ष भक्तभबमोचन ।।७॥ कामनापूरण प्रणकाम ॥ अहर्निश जपूं तिहारो नाम ॥८॥ जाके पटतर ओर न कोय ॥ दास गोपाल भजें सुख होय ॥।९॥
Ath Shree Mahaprabhuji
NityaPad-002
Bhairav
Srivallabh srivallabh dhyaaun ..| naam lait atee munn sachupaaun..1..
श्रीवल्लभ श्रीवल्लभ ध्याऊं ॥| नाम लेत अति मन सचुपाऊं॥१॥ श्रीवल्लभ त्यज अनत न ध्याऊं ॥ ओर काज मन में न लाऊं॥२॥ श्रीवललभ त्यज अनत न जाऊं ॥ चरणसरोजमूल घर छाऊं ।। ३॥। श्रीवल्लभ ही के गुण गाऊं॥ रूप निरख नयनन अधघाऊं ॥४॥ श्रीवल्लभकेमन जो भाऊं।॥। आनंद फूल्यो मन समाऊं ।।५॥ श्रीवल्लभ को गाऊं भाऊं॥ यशोमतिसुतकों लाड लडाऊं ॥६॥ श्रीवल्लभके चरण रहाऊं।। भूखें महासुख भोजन विसराऊं ॥७॥ श्रीवल्लभको दास कहाऊं ॥ रसिक सदा यह नेह निभाऊं ॥८।॥।
Ath Shree Mahaprabhuji
NityaPad-002
Bhairav
Jaya jaya jaya shree vall‍labh prabhu vidvalesh saathen | nijajan parr karat kripa dharat haath maathen ..
जय जय जय श्री वल्‍लभ प्रभु विद्वलेश साथें | निजजन पर करत कृपा धरत हाथ माथें ॥ दोष सब दूर करत भक्तिभाव हिये धरत काज सब सरत सदा गावत गुणगाथें ॥१॥| काहेको देह दमत साधन कर मूरख जन विद्यमान आनंद त्यज चलत क्यूं अपाधें। रसिक चरण शरण सदा रहत हे बडभागी जन अपनो कर गोकुलपति भरत ताहि बाधें ॥२॥
Ath Shree Mahaprabhuji
NityaPad-002
Bhairav
Bhor bhaye bhaavson leey srivallabhanam. haye rasna tuu or vritha bakey kyon nikaam ..|
भोर भये भावसों ले श्रीवल्लभनाम। है रसना तू ओर वृथा बके क्यों निकाम ॥| कीजे सेवा रसस्वाद पावें निशदिन गुण गावें ओर सब रसविसराबें यह मन आठो याम ॥१॥ रसिक न कछु ओर करें इन ही में भाव धरें अतिरस अनुपान करें ओर कपट वाम ।। हरिवश छिनही में होत सगरों भक्तिमारगरूप हृदय वसें अरु रससमूहधाम ।।२॥।
Ath Shree Mahaprabhuji
NityaPad-002
Bhairav
Jayati shriradhikaramanparicharadhillavisharasharativilishatharararivishararamamathathararisharathisharishamararamatharamalararashisharararathivararararararisheeeeeeeshararararararararararararathathishishish ..|
जयति श्रीराधिकारमणपरिचरणरतिवल्लभाधीशसुतविद्ठलेशे ॥| दासजनलौकिकालौकिके सर्वदा कैब चिंतोदबति हृदयदेशे ॥॥१॥ स्थापयति मानसं सततकृतलालसं सहजसुषमारुचिररूपवेशे ॥ भालयुततिलकमुद्रादिशो भासहितमस्तकाबद्धसितकृष्णकेशे ॥२॥। सहजहासादियुतवदनपंकज _ सरसवचनरचनापराजितसुधेशे ॥ अखिलसाधनरहितदोषशतसहितमतिदासहरिदासगतिनिजबलेशे ॥३॥
Ath Shree Mahaprabhuji
NityaPad-003
Bhairav
Gaauun srivallabh dhyaaun srivallabh valalbhacharanraj tunn lapataaun..
गाऊं श्रीवल्लभ ध्याऊं श्रीवललभ वललभचरणरज तन लपटाऊं॥ बललभसंतति नित्यप्रति निरखूं वललभदासन दास कहाऊं ।।१॥ कृष्णलीला सेवा नित्य करके जगत सबे तृणतुल्य धराऊं।॥। व्यासदासकी यही प्रतिज्ञा श्रीगोविंदकृपातें पाऊं ॥२॥
Ath Shree Mahaprabhuji
NityaPad-003
Bhairav
Jup tapa teerath name dharam vrat .
जप तप तीरथ नेम धरम व्रत । मेरे श्रीवललभ प्रभुजी को नाम । साधन तज भज आठों जाम ॥१॥ रसना यही रटौं निसवासर । दुरित' कटें सुधरें सब काम ॥२॥| आंगन बसों जसोदासुत पद । लीलासहित सकल सुखधाम | रसिकन ये निरधार कियो है।
Ath Shree Mahaprabhuji
NityaPad-003
Bhairav
Srivallabhanam ratoon rasna nitya raho surat jiya aatho yaam ..
श्रीवल्लभनाम रटूं रसना नित्य रहो सुरत जिय आठो याम ॥ निरख नयन सकल सुंदरता श्रवणन सुन कीरतिगुणग्राम ॥। १॥। पुष्पप्रसाद सुवास नासिका लेहु उगार सदा सुखधाम ॥ सेवा करूँ चरणकर मेरे वारवार हूं करूं प्रणाम ॥२।। दुःख संसार छुडावन सुखनिधि आनंदकंद भक्तविश्राम ।। रसिकशिरोमणि दीन जानके सीस बिराजे पूरणकाम ।। ३।।
Ath Shree Mahaprabhuji
NityaPad-003
Bhairav
Namo balal‍labhadhishpadakamalayugale sadaa vasatu mumm hridayam vividhbhaavarsavalitam ..
नमो बलल्‍लभाधीशपदकमलयुगले सदा वसतु मम ह॒ृदयं विविधभावरसवलितं ।। अन्यमहिमा55भासवासनावासितं मा भवतु जातु निजभावचलितं ॥१॥ भवतु भजनीयमतिशबितरुचिरं चिरं चरणयुगल सकलगुणसुललितं ।| बदति हरिदास इति मा भवतु मुक्तिरषि भवतु मम देहशतजन्मफलितं ॥२॥।
Ath Shree Mahaprabhuji
NityaPad-003
Bhairav

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