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Mahaprabhuji Ki Badhai

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Kirtan Title
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Kirtan
Raag
Aaj naindanand govind girivardharan tarani tanaya nikat adhar murali dharee |
Pustak1-325
आज नैंदनंद गोविंद गिरिवरधरन तरणि तनया निकट अधर मुरली धरी | सुनत स्वर श्रवण त्यज भवन सुरसुंदी आन आकाश तैं सुमन बरखा करी ॥१॥ थेंनु अरु बच्छ खग मृग नि सुन सबै रहे धर ध्यान नहीं चरत तृण मुख परी ॥ भूल प्रतिकूल जल अनिल थक्यो ता समैं शिला ड्रुम द्रवत रजनीश : गति मति हरी ॥२॥ सकल द्रुमबेलि प्रफुलित मुदित भ्रमखर गुंज मत्तपान मधु करत शुभ ता घरी ॥ नाथ वारिजबदन मदनमोहद और मोहे कोटिक मदन हरत अधघवूंदरी ॥३॥
Khat
Attar gulab neer parada
NityaPad-247
अत्तर गुलाब नीर परदा लपटे उसीर त्रिविध समीर की झकोर लहदवो करें ॥ छूटत फुहारे होद भरे अति भारे सारे नानाविध चादर की धार बहवो करे ॥१॥ रंग जमे रागिन रहत सारंग की ग्रीष्म निवास गुनी गान कहवो करे ॥ एसे निज मंदिर में बिराजें दोउ बालकृष्ण प्रभु ब्रजाधीश आठो प्रहर दरस लहबवो करे ॥२॥
Saarang
Aaj vrindavipin kunj adbhut naee ..
NityaPad-212
आज वृन्दाविपिन कुंज अद्भुत नई ॥ परम सितल सुख श्यमसो भीत तहां माधुरी मधुर ओर पीत फुलन छई ॥१॥ बिविध कदली खंभ झुमका झुक रहे: मधुप गुजांरसुन कोकीला धुन ठई ॥ तहाँ राजत वृषभान की लाडइली मनो घनस्यथामढीग ऊलही सोभाजई ॥२॥ तरन तनया तीरधीर समीर जहां सुनत ब्रजब्रधु अतहीं हीये हरखत भई ॥| नंददासनिनाथ ओर छबि को कहे निरख सोभा नैनपंगुगत व्हे गई ॥३॥
Saarang
Abto merey lalana shree vrindavishin suhavano aur bansivat
Part1-237
अबट्ो मेरे ललना श्री वृन्दाविषिन सुहावनो और बंसीवट की छाँय हो हिलमिल सब दथि लूटिये ॥१॥ प्रात उठे नंदलाल हो लीने सखा * बुलाय हो हिलमिल. ॥२॥ सुबल सुबाहु अर श्री दामा भेख विचित्र बनाय हो हिलमिल. ॥३॥ मोरमुकुट कटि काछनी अरु पीताम्बर वनमाल हो हिलमिल, ॥४॥ करमें लकुटी विराजही घेर लिये व्रजनार हो हिलमिल्र. ॥५॥ सखी मध्य उत राधिका अरु सखन मध्य नंदलाल हो हिलमिल. ॥६॥| दोऊ दल अति प्रबलही इत गोपी उत्त ग्वाल हो हिलमिल. ॥७॥ रोकी सब ब्रजनागरी अरु घेर घेर लियो दान हो हिलमिल्र. ॥८॥ ग्वालिन रोकी ना रहे हो तुम सुनो नंदजूके कहान हो हिलमिल. ॥९॥ ऐक भुजा कंकन गद्मो भुजा सोहे हार हो हिलमिल. ॥१०॥ चितवन में न हर लियो अरु हॉती वृषभान कुमारी हो हिलमिल. ॥११॥ मिसहिं मिस झगरो भयो वृन्दाविषिन मंझार हो हिलमिल. ॥१२॥ मदुकी में लकुटी दई दई सब दि गिराई हो हिलमिल. ॥१३॥ दधि चाख्यों नंदलाड़िलौ और मुदित भई व्रजनार हो हिलमिल, ॥१४॥ पिय प्यारी रस विलसही विड्डल बलि बलिहारी हो हिलमिल. ॥१५॥
Bilawal
Yeh tunn kamal nain parr vaaron samliya bhohi bhavairi .
Part1-149
यह तन कमल नैन पर वारों सामलिया भोहि भावैरी । चरन कमलकी रेंनु यशोदा ले ले शीश चढ़ावैरी ॥१॥ लै उछंग मुख निरखन लागी राई लौन उतारे | कौन निरासी दृष्टि लगाई लै लै अंचल झारे ॥२॥ तू मेरो बालक यदुनंदन तोहि विश्वंभर राखै | परमानंददास चिरजीवो बारबार यों भाख ॥३॥
Bilawal
Khelati basant aae mohan apane rung .. kartal
Part3-062
खेलति बसंत आए मोहन अपने रंग ॥ करतल ताल कुनित बल अबलि जुबति मंडलि संग ॥ १॥ मुरज, मंजरी, चंग, मह॒वरि, बैन, विषान, म्रदंग ॥ झालरी, जंत्र, उपंण, यंत्र, धुनि उपजत तान तरंग ॥२॥ उडति अबीर गुलाल कुँमकुमा केसारे छिरके अंग ॥ गलित कुसुम सिर पागु लट पटी नाँचति ललित त्रिभंग ॥३॥ कोउ किन्नरि सरस गति मिलवत कोउचंग ॥ “जन त्रिलोक' प्रभु बिपिन बिहारी चितवत उदित अनंग ॥४॥
Basant
Nainbhar dekhin nand kumar .. jasumati koonkh chandrama pragatyau
Part1-002
नैनभर देखीं नंद कुमार ॥ जसुमति कूँख चंद्रमा प्रगट्यौ या व्रजको उजियार ॥१॥ बन जिन जाऊ आज कोऊ गो सुत गाय गुवार ॥ अपने अपने भेष सबै मिलि लावौ विविध सिंगार ॥२॥ हरद दूब अच्छत दि कुमकुम मंडित करो दुवार || पूरी चौक विविध मुक्ताफल गावी मंगलचार।|३॥ चहुँ वेदधुनि करत महामुनि होत नछत्र बिचार ॥ उदय पुन्यको पुंज साँवरो सकल सिद्धि दातार ॥४॥ गोकुलवधू निरखि आनंदित सुंदरताकी सार ॥ दास चतुर्भुज प्रभु सब सुखनिधि गिरिधर प्रान अधार ॥५॥
Devgandhar
Jagatguru naam sunyo jaba shravanan aiso dekhyo
Part2-315
जगतगुरु नाम सुन्यो जब श्रवणन ऐसो देख्यो रूपनिहार ॥ तिलक विलोक तैलंग देश द्विज श्रीवल्लभगृह बिहार ॥१ | राजसंबंध भेष भुव सुरकुल भजन दुरायो श्रुतिसार ॥ विमुख लोक पाषंड चलेमत धर्महीन धरा क्‍यों सहे भार ॥२॥ जबजब हीनहोत निगमपथ तबतब आप धरत अवतार ॥ कहूं कला कहूं अंश काज बल पुरुषोत्तम द्विजवर श्रृंगार॥३॥ निजकर टहेल दिखाय सिखावत ज्यों गिरिपूजन सोई विचार॥ विष्णुदास दृढकियोजु वेदमत श्रीवल्लभकुल विप्र आधार ॥४ ॥
Kalyan
Madan gopal jhoolat doll ..
Part3-373
मदन गोपाल झूलत डोल ॥ वाम भाग राधिका बिराजत पहरें नील निचोल ॥१॥ गोरी राग अलापत गावत कहत भामते बोल ॥ नंद नंदन को भलो मनावत जासों प्रीति अतोल ॥२॥ नीको वेष बन्यों मन मोहन आज लईं हममोल || बलहारी मनमोहन मुरति जगत देहुं सब ओल ॥ ३॥ अद्भुत रंग परस्पर बाढ्यो आनंद हृदय कलोल ॥ परमानंद दास तिहिं अवसर उडत होलिका झोल ॥४॥
Devgandhar
Yaa khelaun rung fagu ree.. kanak kamori mein
Part3-223
या खेलौं रंग फागु री॥ कनक कमोरी में केसरि घोरी, छिरकौं में पिय की पाग री ॥ १॥ चोवा चंदन औरू अरगजा चोली पै डारुं दाग री ॥ “कृष्ण जीबन लछीराम' के प्रभु प्यारे खुले हमारे भाग री ॥२५॥
Kafi
Srivallabh laal biyaru keeje . poori shaak
Part2-327
श्रीवललभ लाल बियारु कीजे । पूरी शाक संधानों खटरस बिलसारु रुचिकर ही लीजे ।।१।॥। गुंजा मठडी जलेबी घेवर थपडी सेव चनाकी लीजे । वृन्दावन चंद जेंबत रुचिसों जूठन रामदास को दीजे ।। २।।
Kanharo
Jasumati latkat pony dharey . bhalau manehon jhagarin tuu mati
Part1-086
जसुमति लटकत पॉँय धरे । भलौ मनेहों झगरिन तू मति मनहीं डरे ॥१॥ दीनों हार ढार मनि कंचन मोतिन थार भरे | सूरदास स्वामी प्रगटे हैं ओसर पै झगरे ॥२॥
Devgandhar
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