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Mahaprabhuji Ki Badhai
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Pooja karat deva godhanki raaja nand lalgiridhari .. | Part2-059 | पूजा करत देव गोधनकी राजा नंद लालगिरिधारी ॥
पहेलें मानत अति आनंदसों बडो पर्व त्योहार दिवारी ॥१ ॥
बडीबडी गोपवधू नंदरानी हटरी भरत सिहाय सिहाई॥
तिनपर बनी पांत सोनेकी दीये धरत बनाय बनाई ॥२ ॥
हँसत हँसत दोऊ संग बावाके कुंवर लाडिले बैठे आई॥
देखनकों ब्रजराज हुलस मन अपने बंधु सब लिये बुलाई ॥३॥
गृहगृहतें आई ं व्रजसुंदरि सोदालेन देन इन साथ ॥
हँसहँस कहत लाल हम जाने करन न पाओगे कछुघात ॥४ ॥
देहों नहीं तोलतें घटती कहत छबीलीसों मुसकात॥
श्रीविन््ठलगिरिधरनलाल तुम हम पर बहुत रूटहूं खात ॥५॥ | Kanharo |
Pratham vasantapanchami poojan kankalash kamini oorfoole .. | Part3-012 | प्रथम वसंतपंचमी पूजन कनकलश कामिनी ऊरफूले ॥
आयो मदन महिप सैनले अंबडार पे कोयल झूले ॥|
ठोरठोर द्रमवेलीफूली कालिंदी के कूले ॥
चन्नभुज प्रभु गिरीधर संग बिहरत स्यामाश्याम समतूले ॥२॥ | Basant |
Khor gopur ajar bugger nava kunjapati lalit gully galinmein kaanti deepawali .. | Part2-057 | खोर गोपुर अजर बगर नव कुंजपति ललित गली गलिनमें कान्ति दीपावली ॥
साज भूषण बनी भांत सब नव अलि परम शोभित रसिक चतुर चन्ध्रावली॥१॥
चंद गोविंद अरविंद राधा बदन राजत सकत युवति कुमुदावली ॥
पांति दीपक बनी मानो हो मनिक फनी रचित गिरिधरन हित तरुणी रूपावली॥२॥
झांझ बीना मुरज महुवरी किन्नरी बजत जलजत्र उचरत शब्दावली॥
ततथेई थरुंगनी नटत उघटत परन चलत नुपुर चरम रूरत हारावली ॥३ ॥
दीपमाला चहुं ओर अदभुत रुचिर मध्य कनिक नगराज फूली चंपावली॥
देख सुर सहित सुरनारी मन ब्रज हरखि के करत सब मिलि वृष्टि कनक पुष्पावली ॥४ ॥
होत उद्योत दीपमाला सुभग भानु शशि कोटि मणि लज्जित तारावली ॥
निरख छबि नंद सुत रसिक “ब्रजपतिदास' शरण नंदलाल तिहुं लोक भूषावली ॥५ ॥ | Kanharo |
Vrishbhanandini | NityaPad-259 | वृषभाननंदिनी
मिल गिरिधरनलाल संग कुंज के मेहेलमें केलि ठानी ॥ परमशीतल सुखद
तरणि तनया निकट सघन समसर वहेत स्वच्छपानी ॥१॥ कुंद केतकी जाई
कुसुम परिमल मलय परम रमणीक तहां सघनबानी ॥ हंस सारस मोर और
खग कीर रोर मंद मारुत चलत मधुप गानी ॥२॥ कोक कोटिककला प्रकट
विलसत बाला वार तनमनहित प्राण पति रानी ॥ कहत गोर्विंदप्रभु रीझ रसबश
भई मदनमोहन नवल युवती सुखदानी ॥३॥ | Saarang |
Ladile lalan chalo begg bhojan curran thaade niz bhawan dekhat baat vrajraj. | Part2-237 | लाडीले ललन चलो बेग भोजन करन ठाड़े निज भवन देखत बाट ब्रजराज।
बोलत तुतरात दोऊ भ्रात बूझत बात चुम मुख तात कह्ो बैठो भोगी आज ॥१॥
खीर चीला अपूप फीके मीठे बहुत चुपर कर नवनीत जेंवो धरे तुम काज।
औरहु पकवान मन भाये घराये लाय कृष्णदासनि नाथ थार भर भर साज ॥२ ॥ | Todi |
Haye aaj cone bunn charaai gaiya kanhaa lagaai aitee bair .. | NityaPad-287 | हे आज कोन बन चराई गैया कंहा लगाई ऐती बेर ॥
बेठेकहा बेग सुध लेहो नेनन कर ओसेर ॥१॥
ऐकबन ढूंढ सकल बन ढूंढे कहुंबनपाई गायन कि नेर ॥
तानसेन के प्रभु तुम बहो नायक देहो कदम चढ टेर ॥२॥ | Hameer |
Aaj badhaai baajat rawal . shrivrishbhanrai ghar pragati shyama | Part1-185 | आज बधाई बाजत रावल । श्रीवृषभानराय घर प्रगटी श्यामा
श्याम सुखावल ॥१॥ ग्रहगृहतें गोपी बनि आईं आनंदित नंदावलि । मानों
कनिक कंज मकरंदहिं पीवत जीवत मधुपावलि ॥२॥ नाचत गावत बेंनु बजावत
हेरी देत गोपावलि । दधिकादों भादों झर लायौ प्रेम मुदित ब्यासावलि ॥३॥ | Saarang |
Chandan argaja lepan aaee baal lalke anga lagavan . | NityaPad-241 | चंदन अरगजा लेपन आइ बाल लालके अंग लगावन ।
सीतल गुलाब जल ता मधि कपूर डारि अंजुली भरी
भरी लेपत गात लागत पवन जु डार बन ॥१॥
नाना विधके कुसुमनसों सेज मनभावन ।
मुरारिदासके प्रभु ग्रीष्पक्रतु दाह तपत तेसी लागी सारंगी गावन ॥|१९॥ | Saarang |
Aaj atee sohat nandkishore.. sir kulahi tiparo raajat bunny | NityaPad-171 | आज अति सोहत नंदकिशोर॥ सिर कुलही टिपारो राजत बनी
चंद्रिका मोर ॥१॥ मललकाछ कटि बांध पीत पर अंग अंग छबि बोर ॥ सुंदर मैन
बंक अबलोकित रसिक प्रान चितचोर ।॥।२॥ | Saarang |
Atee udaar mohan merey nirakh nayan phoole ... | NityaPad-238 | अति उदार मोहन मेरे निरख नयन फूले ॥।
बीचबीच बरुहा चंद फूलनको सेहरोरी माई कुंडल किरन ऊपर निगम अगम
भूले ॥१॥ चंदनके चित्रकीयें बनी कुंदमाल हीयें पीतांबर कटि बांध अंग
अनुकूले ॥ छीतस्वामी गिरिवरधर गायनकों नाम धूमर टेरत आय ठाडीं भई
कदबतरु के मूले ॥ २॥॥ | Saarang |
Jaari hari deit diwawat .. vrajmein firat gopican | Part3-102 | जारी हरि देत दिवावत ॥ ब्रजमें फिरत गोपिकन
भावत ॥ १॥ दूधदडी कोमातो डोले ॥ काहेन होहो होरी बोले ॥२॥ बगलन
में पिचकाई बागे ॥ बांधत फेंट संभारत पागें ॥|३॥ रुक गये बगरनर हे
पेंडे ॥ नव केसरके माट उलेंडे ॥४॥ छाजनतें छूटें पिचकारी ॥ रंगगये
बाखर भवन अटारी ॥५॥ चोवा चंदन कीच मचाई ॥ मानों द्रजमें वर्षा
ऋतु आई ॥६॥ मोहन घेर भरीं व्रजनारी ॥ अबीर गुलाल रंगी रंग सारी
॥७॥ गोपी ज्वाल खबें रंग राचें ॥ वे सब सिंघ पोरिपेंनाचें ॥८॥ न्हान
चले यमुनाके तीरा ॥ कृष्ण ओर हलधर दोऊ बीरा ॥५॥ प्रभु मुकुंद माधो
सुख दायक ॥ युगल किशोर देखबे लायक ॥१०॥ | Nat |
Bey dekho kessy neeki chitrasari taamein podhe piya pyaari deep malika ruchir banaai .. | Part2-066 | बे देखो केसी नीकी चित्रसारी तामें पोढे पिय प्यारी दीप मालिका रुचिर बनाई ॥
चहुं ओर झलमलत दीप मोतिन की माल मानो जाल गुहाई ॥१ ॥
पासासार चोपर खेलनहार जीत होत दोउन की रूठ रूठाई॥
रसिक प्रीतमसों खेल राधा प्यारी ललिता न्याव चुकाई ॥२ ॥ | Bihag |
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