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Mahaprabhuji Ki Badhai

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Khelat gend raay-aangan mein hari-haldhar douu bhaiya .
Part2-239
खेलत गेंद राय-आंगन में हरि-हलधर दोऊ भैया । किलकत हँसत करत कोलाहल सो छबि निरखि जसोधथा मैया ॥१ ॥ सुबल श्रीदामा सखा संग ले और सकल ब्रज के लरकैया। 'कृष्णदास' प्रभु की छबि निरखत तन मन वारत लेत बलैया ॥२॥
Bihaag
Yaduvanshi jijman tihaaro thaadhi aayo hoe . kunwari janm sunike
Part1-207
यदुवंशी जिजमान तिहारो ठाढ़ी आयो हो । कुँवरि जन्म सुनिके हों आयी राखि हमारो मान ॥१॥ एकबार हों पहलें आयौ देन बधाई ताकी। नंदीसुर व्रजराज घरनि घर कूँखि सिरानी जाकी ॥२॥ अबतो मेरे मनको भायौ दोऊ नेग चुकावौ । नँदरानी कीरतिदे रानी ढाढ़िनकों पहिरावी ॥३॥ बोहोत आँति ढाढ़िन पहराई गोपराय बड़ दानीं। किशोरीदासको निरभय करिकें व्रज राख्यौ व्रजरानी. ॥४॥
Maru
Jey atitap dekh kripa harikino ..|
NityaPad-037
जे अतितप देख कृपा हरिकीनो ॥| तनकी जरनदूरभई सबकीमिल तरुणीसुख दीनो ॥१॥ नवलकिशोरध्यानयुवती मनमीडत पीठजनायो ।। विवश भईकछु सुधिनसंभारत भयोसबन मन भायो ॥|२॥ मनमनकहत भयोतप पूरण आनंद उर न समाई ॥ सूरदासप्रभु लाज न आवत युवतिनमांझकन्हाई ॥॥३॥
Ramkali
Rahiri gwali joban madmati ! merey chhayan magan seey lalahin
Part1-161
रहीरी ग्वालि जोबन मदमाती ! मेरे छयन मगन से लालहिं कित लै उछंग लगावति छाती ॥१॥ खीजततें अबही राखे हैं शोभित नहानी न्हानी दूधकी दाँती | खेलनदै जाहु घर पर अपुने काहेकों एतौ इतराती ॥२॥ उठि चली ग्वालि लाल लागे रौंवन तब जसुमति फेरी बहु भाँती । परमानंद प्रीति अंतर गति फिरि आई नैनन मुसिकाती ॥३॥
Saarang
Hari koo shungar harr dekh key moe munn arr .. hardo bago
NityaPad-067
हरि को शुंगार हर देख के मो मन अर ।। हरद्ओो बागो सिर टिपारों पाग कटि सुंथन विराजे है ॥१॥| ओढे हैं कबाय हरचो पटुका हरद्यो है आली ॥ भूषण जड़ाय पहरे अति छबि छाजे है ॥।२॥ मरगजी कंठ दुलरी हरि जे हरि विछीया अनुवर पगनुपूर विराजे है।। हरें वाजुबन्द चोकी मुद्रिका हरि है आली यमुना के कूल शोभा अधिक विराजे है ॥३॥ हरि मुरली मनमोहन ले अधर धरी सुनत ही ब्रज वधू छांड़े सब काजे है।। कहे भगवान हित रामराय प्रभु प्यारो राधा गल बांहिदे निकुंज में विराजे है।।४॥
Aasawari
Jasoda nahibarje apano kaanh .. apano kaann‍hh
Part3-027
जसोदा नहीबरजे अपनो कान्ह ॥ अपनो कान्‍्ह सुंदर सुजान ॥१॥ नीर भरन गई यमुना घाट ॥ नही जानदेत धर रोके बाट॥२॥ कबेंझगर कहेलावोदान ॥ झपटचीर करे खेंचतान ॥ ३॥ पयपीवत घुटरूवन चलत लाल ॥ यह यमुनातट गयो कोनेचाल ॥४॥ तेरीबात सुनत मोहिहॉँसीआत ॥ यह पलना झूलत कछु नही खात ॥५॥ गौचारत निरखे तरून स्याम || सबेछलतफिरत करे ऐसे काम ॥६॥ सकुचाय ग्वालरही मुख विहार ॥ सूरस्यामकी लीला अपार ॥७॥
Basant
Munrey tuu srivallabh kahire joe karat kaamana jiyamen sou tatakshan tuu lahire .. ..
NityaPad-351
मनरे तू श्रीवल्लभ कहिरे जो करत कामना जियमें सो ततक्षण तू लहिरे ॥ ॥ सकलसुकृत को यह फल और कछूनहि रुचि चहिरे॥ रसिकप्रीतम ऐसे प्रभुको चरणशरण नित गहिरे ॥ २।
Bihaag
Aaj dashahara shubh dinn neekau jaware paharat giridharlal ..
Part1-316
आज दशहरा शुभ दिन नीकौ जवारे पहरत गिरिधरलाल ॥ आसपास सब व्रजके बालक मध्य मनोहर बाल ॥१॥ करत आरती मात यशोदा बारत मोतिन माल ॥ आसकरन प्रभु मोहननागर प्रेंम पुंज ब्रजबाल ॥२॥
Saarang
Kamal nayan sasibadan manohar dekhiye vichitra gati ..| syaam
Part1-039
कमल नयन ससिबदन मनोहर देखिये विचित्र गति ॥| स्याम सुभगतन पीत बसन हुते उरबन माल सोहे अति ॥१॥ नखमणि मुकुट प्रभा अति उदित चितें चकित उन मांन न पावत ॥ अति प्रकास निसि बिमल तिमिर छटे कलमलाय पतिहि जगावति ॥२॥ दरसन मुखी सुखी अति सोचति खट सुत सोच सुरति अति आवति ॥ सूरदास प्रभु होऊ पराकृत भुजा चारिको चिह्न दुरावति ॥३॥
Dhanashri
Tareti srigovardhanki rahiye ..
NityaPad-354
तरेटी श्रीगोवर्धनकी रहिये ॥ नित्यप्रति मदनगोपाललालकेचरण कमल चितलैये ॥ १॥ तनपुलकित ब्रजरज में लोटत गोविंदकुं डमें न्हैये | रसिकप्रीतम हितचितकी बातें श्रीगिरिधारी जीसों कहिये॥३॥
Bihaag
Augan khelein nandke nandaa | yadukulkumud sukhad chaaru
Part1-160
ऑगन खेलें नंदके नंदा | यदुकुलकुमुद सुखद चारु चंदा ॥१॥ संग संग बलमोहन सोहे । शशिभूषण सबकौ मनमोहै ॥२॥ तन दुति मोर चंद जिमि झलकै । उमगि उम्रगि अँगर्अंग छबि छलकै ॥३॥ कटि किंकिनि पग पेंजनि बाजें । पंकज पाणि पहुँचिया राजें ॥४॥ कटुला कंठ बघनखानिके । नैन सरोज मैन सरसीके ||५॥ लटकन ललित ललाट लटूरी । दमकत द्वै द्वै दतुलियाँ नूरी ॥६)| मन हरत मंजु मसिबिंदा । ललित बदन बलि बाल गोविंदा ॥७॥ कुलही चित्र विचित्र झगूली | निरख जसोदा रोहिनी फूली ॥८॥| गहि मन खंभ बिंव ढिंग डोले । कलबल बचन तोतरे बोले ॥९॥ निरखत झुकि झाँकत प्रति बिंबहिं | देत परम सुख पितु अरू अंबहिं ॥१०॥ ब्रजजन निरखत हिय हुलसाने | सूरश्याम महिमा को जाने॥
Dhanashri
Murali mohan adhar dharee .. aaraj path bisarachau atur
Part1-295
मुरली मोहन अधर धरी ॥ आरज पथ बिसरच्ौ आतुर है तनहुँकी सुधि न परी ॥१॥ पदरिपुपट अटक्यौ न सम्हारत उलटि न पलटखरी ॥| कबहुँक शिवसुत बाहन भख मिल्यौ मनहु कि बुद्ध हरी ॥२॥ दुरि गये कीर कपोत मधुपष पिक सारँग सुधि न करी ॥ उद्डपति विद्यम बिंब लजानौ दामिनि अधिक डरी ॥३॥ मिलिहौं श्यामहि हंस सुतातट आनँद उमँगभरी ॥ सुर श्यामकौं मिली परस्पर प्रेम प्रवाह भरी ॥४॥
Kedaro
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