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Mahaprabhuji Ki Badhai
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Kaanvardvav bharaken chhaak | NityaPad-202 | कांवरद्वव भरकें छाक
प्रठाई नंदरानी आपमोहि मिले मारगमें मधुबनके कूल ॥॥ सुबल तोक तरुण
वेष आवत कछु भोजन लिये चंचलगति चलत दोऊ दरसन के फूल ॥१॥
कनकथार पीरे जगमगात बेलनकी भातकांति भरेहें नंदगनी आपदोऊ समतूल ॥
पचरंग पाटकी डोरी चोसर चहूं ओर खचित पवन गवन बिकस जात रेसमके
झूल ॥२॥ छोटी छोटी द्वय गांठ त्तामें पठवन सब ब्रजजन की आसपास लटकरहे
फोंदा मखतूल ॥ सकल पाक परमानंद आरोगत परमानंद परमानंद जानत सब
बातनको मूल ॥।३॥ | Saarang |
Maaee lainn dehu joe merey laalahi bhaav | dadhi makhan chauguno | Part1-158 | माई लैंन देहु जो मेरे लालहि भाव | दधि माखन चौगुनो
देहुँगी सुतके लेखें जाकौ जितनी आवबे ॥१॥ पालनें झूलै कुलदेव अराधे जतन
जतन करे घुटुरुवन धावै । सरबस ताहि दैहुँगी जो मेरे न्हेनरे गोपालें चलन
सिखावै ॥२॥ यह अभिप्राय होत दिन दिन प्रति कब मेरौ मोहन थेंनु चरावै।
चतुर्भुजदास गिरिधर पिय यह रस निरखि निरखि उर नैन सिरावै ॥३॥ | Dhanashri |
Kunj suhavano bhawan banathan baithe sriradha raman .. baran varan drumveli prafullit shashiki kiran jagamagaat taisoi | NityaPad-314 | कुंज सुहावनो भवन बनठन बैठे श्रीराधा रमन ॥ बरण वरण द्रुमवेली प्रफुल्लित शशीकी किरण जगमगात तैसोई
सुगंध बहत पवन ॥१॥ आलिंगत पिक मंगलगावत नृत्यत अति आनंद
मगनमन ।। हरिनारायण स्यामदास के प्रभु देखें रतिपति लागे नमन ॥२॥ | Adano |
Aajahari manikhambhanikatahave jahaan goraskigori ... | NityaPad-185 | आजहरि मणिखंभनिकटहवे जहां गोरसकीगोरी ॥।
निजप्रतिबिंब सिखावत योशिशु प्रकटकरो जिनचोरी ॥ १॥ अर्धविभागआजते
हमतुम भलीबनीहै जोरी । माखनख्ाओ कितहींडारतहो छांडहेहोमत भोरी ॥। २॥।
हिस्सासबै लिये चाहतहो यह बात है थोरी॥ मीठो परमअधिक रु चिलागे देहूं
काढकमोरी ॥। ३॥। प्रेमठमग धीरज नरह्योतब प्रकटहँसी मुखमोरी ॥ सूरदासप्रभु
सकुंचनिरख भजगए कुंजकीखोरी ॥।४॥। | Bilawal |
Doll jhoolat hain lalana .. nirakh nirakh phoolat | Part3-365 | डोल झूलत हैं ललना ॥ निरख निरख फूलत
ललितादिक संग सहचरी बलना ॥१॥ सप्त स्वरन मिल गावत सब मिल
झील को किल कलना ॥ हरीदास के स्वामी स्यामा कुंजविहारी रीझ भये
मगना ॥२॥ डोल झुतहें गिरिधरन नवल नंदलाला ॥ ब्रजपुर वनिता निरख
बारतहें कंचन की मणिमाला ॥३॥ सकल श्रृंगार अनूप विराजत कूजत
वेणु रसाला ॥ माधोदास निरख गोपीजन प्रमुदित श्रीगोपाल ॥४॥
| Kalyan |
Sunder atee nandjuko chhagan maganiyan. | NityaPad-255 | सुन्दर अति नंदजुको छगन मगनीयां।
कटिपर आडबंद अतिनीको भीतर झलकत तनियां॥ १ ॥
लाल गोपाल लाडले मेरे सोहत चरन पैजनियां |
परमानंद दास के प्रभु यह छबि कहेत न बनियां।२॥ | Saarang |
Nandke aangan bajat badhaai .. naachati gaavati gopika | Part1-021 | नंदके आंगन बजत बधाई ॥ नाचति गावति गोपिका
मिलि गोरस कीच मचाई ॥१॥ हरे नंदलाल जो देखत हीयरें रहे लगाई ॥
मनही मन अति होत प्रफुल्लित मानों रंक निधि पाई ॥२॥ वसन विचित्र
आभूषन दीने ग्वालिनी सब पहराई ॥ देत असीस चिरजीयो नंदसुत फूली अंग
न समाई ॥३॥ बाल विरध नरनारिनके मन फूल भई अधिकाई ॥ घर घर
मंगल होत सबनके रघुवीर बारनें जाई ॥४॥॥ | Bilawal |
Bunny bunny khelani chali kamal cully vikas | Part3-070 | बनि बनि खेलनि चलि कमल कली विकास
लस ब्रजनारी ॥ अपने अपने गह सैें निकसी एक ठौर भई सकल फूलि
मनौं बारी फुलवारी ॥१॥ तरू तमाल लाल ढिंग ठाढै राजत चहूँ दिस तें
कनक बेलि गोपी भरति भाजति मनौं पवन डुलाए आगे पाछें होत जोबन
बारि ॥ सूरदास” मदनमोहन अँग संग बसंत सोभित अनंग अद्भुत वारि
सँवारि ॥२॥
| Basant |
Prakatvhe marag reeti dikhaai ... | Part2-323 | प्रकटव्हे मारग रीति दिखाई ।॥
परमानंद स्वरूप कृपा निधी श्रीवल्लभ सुखदाई ॥१ ॥
करश्रृंगार गिरिधरनलालको जब कर वेणुगहाई॥
लेदर्पण सन्मुख ठाडे व्हे निरखनिरख मुसकाई ॥२ ॥
विविध भांत सामग्री हरिकों कर मनुहार लिवाई ॥
जल अचवाय सुगंध सहित मुखबीरी पानखवाई ॥३ ॥
करआरती अनोसर पटदे बैठे निजगृह आई॥
भोजनकर विश्राम छिनक ले निजमंडली बुलाई ॥४ ॥
करत कृपा निज देवी जीवनपर श्रीमुख वचन सुनाई ॥
वेणुगीत पुन युगलगीतकी रस बरखा बरखाई ॥५ ॥
सेवारीति प्रीति त्रजजनकी जन हित जग प्रगठाई ॥
दास शरण हरि वागधीशकी चरणरेणु निधिपाई ॥६ ॥ | Bihaag |
Abb hathh chhaadi dehu ray merey baare kanhaiya | joe maangi sou daihon lalaa | Part1-167 | अब हठ छाडि देहु रे मेरे बारे कन्हैया | जो मांगी सो दैहों लला
र े ! माखन दूध मलैया ॥ चकई भौंरा पाट के लटकन और मैँँगाई दैहों फेर
कन्हैया । सब लरिकिनि के संग मिलि खेली अरू बलदाऊ भैया ॥ दोऊ मैया
निरखि निरखि के फुनि फुनि लेति बलैंया । 'परमानैंद” प्रभु बालरूप धरि क्रीडत
नैंद-अँगनैया ॥ | Iman |
Chalhu radhike sujan tere hita gunanidhaan raas rachyo kunwar | Part1-322 | चलहु राधिके सुजान तेरे हित गुणनिधान रास रच्यो कुँवर
कान्ह तट कलिंदनंदिनी ॥ निर्तत युवती समूह रास रंग अति कौतूहल बाजत
रसमूर मुरलिका आनंदिनी ॥१।| बंसीबट निकट जहाँ परम रम्य भूमि तहाँ
सकल सुखद बहत मलय वायु मंदिनी ॥ जाती ईषद विकास कानन अतिशै
सुवास राकानिशि शरद मास विमल चंदिनी ॥२॥ कुंभनदासप्रभु निहार
लोचनभर घोषनारि नखशिख सौंदर्य सीम दुख निकंदिनी ॥ विलसो भुज ग्रीव
मेल भामिनी सुख सिंधु झेल गोवर्द्धधधरन केलि जगतवंदिनी ॥३॥ | Bilawal |
Sukhad sez podhe srivallabh sanga sukh podhe shree navneet priya ... jyon jasumati suna | NityaPad-343 | सुखद सेज पोढे श्रीवललभ संग सुख पोढ़े श्री नवनीत प्रिया ॥। ज्यों जसुमति सुन
नंदनंदन को त्यों प्रमुदित मनमाहि हिया ॥। १॥। हुलरावत दुलरावत गावत अंगुरिन
अग्र दिखाय दिया ॥ कहत न बने देखत दृग नेनसों दुःख बिसरत सुख होत
जिंया।।२॥ डरप जात बालक संग पोढे हावभाव चित चाव किया ॥
परमानन्ददास गोपीजन सो जस गायो घोख त्रिया ॥ ३॥ | Kedaro |
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