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Mahaprabhuji Ki Badhai
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Srivitthalnathjuke charansharan ..| | NityaPad-006 | श्रीविद्डलनाथजूके चरणशरणं ॥|
श्रीवल्लभनंदनं कलिदु:खखंडनं पूरणपुरुषोत्तमं त्रयतापहरणं ॥१॥
सकलदु:खदारणं भवसिंधु- तारणं जनहितलीलादेहधरणं ॥
कान्हरदासप्रभु॒ सबसुखसागरं भूतलदृढभक्तिप्रकटकरणं ॥।२॥ | Bhairav |
Sohat paay penjaniyaan nupur dhuni baajat cutty kinkini bunny atee | Part1-166 | सोहत पाय पेंजनियाँ नूपुर धुनि बाजत कटि किंकिनी बनी अति
सुरंग तनियाँ ॥|१॥ कर पोंहोंची भुज बीच बाजूबंद उर बघनां कंठ कौस्तुभ
मनियाँ । लर लटकन शिर बेंनी गूंथी कर लकुट रसिक प्रीतमकों लेत धाय
कनियाँ ॥२॥ | Iman |
Bhadonki raini andhiyaari | shankh chakr gadaa padm birajat mathura | Part1-064 | भादोंकी रैनि अँधियारी | शंख चक्र गदा पद्म बिराजत मथुरा
जन्म लियौ बनवारी ॥१॥ बोलि लिये वसुदेव देवकी बालक भयो परम
रुचिकारी । तुम लै जाहु बेगि इहि गोकुल अधम कंसको मोहि डर भारी ॥१२॥
सोवत स्वान पहरुवा चहुँदिस खुले कपाट गये छै न््य ारी । पाछें सिंध डहारत दूँकत
आगें है कालिंदी भारी ॥३॥ तब जीय सोच करत ठाढ़े द्वै अविधि कहा विधाता
टानी । कमलनैनकों जानि महातम जमुना भई तरवन तर पानी ॥४॥ पोहोंचे
हैं गृह नंदगोपके जिनकी सकल आपदा टारी । गोविंदप्रभु बड़भाग यशोदा प्रगटे
हैं गोवर्धनधारी ॥५॥ | Kanharo |
Atee sunder mani jatit palno jhoolat laal | Part3-026 | अति सुंदर मणि जटित पालनो झूलत लाल
विहारी ॥ खेलत फाग सखा संगलीनो नाचत दे करतारी ॥ १॥ घर घरतें
आईं बनबनके पहरें नौतनसारी ॥ तनक गुलाल अबीर नलेले छिरकत राधा
प्यारी ॥ २॥ गावत गारी आनंद में प्रमुदित फूलीं अंगसुकुमारी ॥ चोबाचंदन
अगरकुमकुमा देत शीसतें ढारी ॥३॥ लपटरंहे तन वसन रंगमें लागतहे
सुखकारी ॥| देख विवशमये मोहन पीय भरलीनी अंकवारी ।।8४॥ मिसडीमिस
ढिंगआय पालनो झुलवत वृजकीनारी ॥ अबीर गुलाल लगाय कपोलन हंसत
देदे करतारी ॥।५॥ तनमन मिली प्रान पीयासों नौतन शोभा वाढी ॥ शिधिल
वबसन मुकुलित कच कबरी प्रेमसिंधुतें काढी ॥६।॥| यह सुख रितु वसंत
लीलामें बालकेलि सुखकारी ॥ सरबस देत वारप्यारे पै जनगोविंद
बलिहारी ॥७॥ | Basant |
Aiso maaee bahuri vahee dinn aayou .. nandrai chaley nyautanko | Part1-073 | ऐसो माई बहुरि वही दिन आयौ ॥ नंदराय चले न्यौतनको
सब व्रज होत बधायो ॥१॥ तिलक आरती करति यशोमति सबहिनपै तिलक
करावैं ॥ बरसगॉटठिके मंगल आएे प्रेम भरी सब गावें ॥२॥ गोद लाल दोऊ
इत उत सब आगें बाजे बाजैं । गावत नाचत सुधर सुनावत नई नई भाँतिन
साजैं ॥३॥ निकसे रथन जुराय महर सब मन प्रफुलित सुख पायें ।
श्रीविदलनगिरिधरनलालकूँ आगें लेंन सब आवें ॥४॥ | Devgandhar |
Sub bhaanti chhabili kanhaki .. | NityaPad-087 | सब भांति छबीली कान्हकी ॥
नंदनंदनकी आवन छबीली मुख छबि बीरी सुपानकी ॥१॥
अलक छबीली तिलक छबीलो पाग छबीली सुबानकी ||
भ्रोह छबीली दृष्टि छबीली सेन छबीली सुमानकी ।॥।२॥।
चरनकमलकी चाल छबीली शोभा अंग सुठानकी ॥
परमानंदप्रभु बेन छबीलो
सुरत छबीली सुगान की ॥३॥ | Dhanshree |
Kunj mahal mein rasbharen khelat piyapyari .. | NityaPad-314 | कुंज महल में रसभरें खेलत पियप्यारी ॥
तैसोई तरनि तनया तीर तैसोई सीतलसुगंध मंद वहत पवन तैसीय सघन फूली जुईनिवारी ।।१॥
प्रफुल्लित वनराजीव तैसोंई अलि गुंज श्रवणनको अतिसुखकारी ॥
गोविंद बलबल जोरी सदाई विराज़ो ग्रावत तान तरंग सुघर भारी ॥२॥ | Kanharo |
Suna dhwani murali bunn baajai hari raas rachyau .. | Pustak1-349 | सुन ध्वनि मुरली बन बाजै हरि रास रच्यौ ॥
कुंजकुंज द्रुमवेलि प्रफुल्लित मंडल कंचन मणिन खच्यौ ॥१॥
नृत्यत युगल किशोर युवतिजन
मन मिल राग केदारो सच्यो ॥
हरिदास के स्वामी स्यामा कुंजबिहारी नीकें आज गोपाल नच्यी ॥२॥ | Kedaro |
Hansat gopal nand key aagein nand swaroop naan jaanen . nirgun brahm | Part1-160 | हँसत गोपाल नंद के आगें नंद स्वरूप न जानें । निर्गुन ब्रह्म
सगुन जे लीला ताहिष्ब सुत करि मानें ॥ एक समे पूजा के औसर नंद समाधि
लगाई । सालिग्राम मेलि मुख महियाँ बैठि रहे अरगाई ॥ जब नैंद ध्यान बिसर्जन
कीनों मूरति आगें नाहीं। कहौ मेरे कान्ह ! देवता कहा भये है विस्मय चितमाही।!
मुख तें काढि लिए जग-जीवन दिये नंद जू के हाथ | 'परमानँद” स्वामी मनमोहन
खेल रच्यो ब्रजनाथ ॥ | Dhanashri |
Areemen rattan jatan curr paayo ... | NityaPad-336 | अरीमें रतन जतन कर पायो ॥।
उघरे भाग्य आज सखि मेरे रसिकशिरोमणि आयो ॥१॥
आवनहीं उठक ें दे आदर अपने ढिंग बैठायो।॥।
मुखचुंबन दें अधरपानकर भेट सकल अंगलायो ॥। २॥
अद्भुतरूप अनूप श्यामको निरखत नयन हियो सिरायो ॥
निसदिनयही अपने ठाकुरको रसिक गूढयश गायो ।। ३।। | Kedaro |
Kunwari radhika tuv sakal saubhagyaki seema vandan parr | NityaPad-136 | कुंवरी राधिका तुव सकल सौभाग्यकी सीमा वंदन पर
कोटिशत चंदवारों ॥ खंजन कुरंग मीम शतकोटि नयननऊपर वारनें करत जियमें
विचारों ॥|१॥ कदली शतकोटि जंघनऊपर वारनें सिंह शतकोटि कटिपर उतारो ॥
मत्तगज कोटिशत चालपर कुंभ शतकोटि इन कुचनपर वारडारों ॥२॥ कीर
शतकोटि नासा ऊपर कुंद शतकोटि दशनन ऊपर कहीनपारों ॥ पक्वकंदूर बंधूक
शतकोटि अधरन ऊपर वार रूचि गर्व टारों ॥३॥ नाग शत कोटि बेनी ऊपर
कपोत शतकोटि ग्रीवा पर दूर सारों ॥ कमल शतकोटि कर युगल पर वारने
नाहिन कोऊ लोक उपमा जु धारों ॥४॥ दासकुमनस्वामिनी सुनखशिख अंग
अद्भुत सुठान कहांलग संभारों | लालगिरिवरधरन कहत मोहि तोहिलों सुख
जोलों वह रूप छिनछिन निहारों ॥५॥। | Ramkali |
Teree gati agaadh niranjan niraakaar narayan .. saptadvip | NityaPad-055 | तेरी गति अगाध निरंजन निराकार नारायन ।। सप्तद्विप
सप्तखंड पर्वत मेरु धा रच्यो नारायन ।।९॥ तुही चंद तुही सूरज तुही उडगन
निसके तारे तुही जल थल पवन तेज तुही धरनि आसमान ॥। तानसेनके प्रभु
घटघटमें करत गान अगमनिगम सकल सिष्ट धरत ध्यान ॥२॥। | Malkos |
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