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Mahaprabhuji Ki Badhai
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Bhorahi aaye merey paachhjhe jogiya alakh kahee kahee jaage.. | NityaPad-052 | भोरही आये मेरे पाछझे जोगिया अलख कही कही जागे॥
मोहनी मूरत एनमेनसे नेन भरे अनुरागे ॥ १॥॥
अंग भभूत भरे गरे सेली दरसतहीबेरागे ॥
तनमन वारोगी धोंधी के प्रभुको राखोंगी एक सुहागे ॥२॥। | Lalit |
Khelat giridharanlal paramamudit gwal baal utabani | Part3-269 | खेलत गिरिधरनलाल परममुदित ग्वाल बाल उतबनी
ब्रजजन वलनारि होरी बोलना ॥ गाबत नटनारायण राम युकक्तीजन खेलें
फाग गारीदेत गोपकुंवर कर कलोलना ॥|१॥ वीना बेणु तान तरंग बाजत
मधुरे मृदंग भेरी महुवर डफ झांझ ढोलना ॥ वीना बेणु तान तरंग पिचकाई
भरत रंग ब्रजजुबतिन छिरकत मिल वंदन डोलना ॥२॥ मोहनकों पकर लेहु
फंगुवामिसफेंट गहें मांडत मुख रोरी घोर कर कपोलना ॥ चतुर्भुज प्रभु
फगणुवादीयों राधाजूको भायो कीयो पीतांबर खेंचलियो कर झंझोलना ॥ ३॥ | Nat |
Kahee tau makhan laauun gharate . jaake kaaj lakutia leaney | Part1-143 | कही तौ माखन लाऊँ घरते । जाके काज लकुटिया लीनी
डारत नॉहिन करते ॥१॥ देखि यशोदा बदन कमल की शोभा बाढ़ी डरते ।
ज्यों जलसुत शशि समै सँकुच निश प्रफुलित नौहिन सरते ॥२॥ कोमल गात
उलूखल उकसित निकसत गिरा नगरते। सूरदास धीरज धरि गोविंद उठउ न धरनी
परते. ॥३॥ | Bilawal |
Nandlal sanga naachat navalkishori !. kharaj rikhabh gandhar | Part1-340 | नंदलाल संग नाचत नवलकिशोरी !। खरज रिखभ गंधार
सप्तस्वर मध्य तार लेत ग्रग्गम ततततहोरी ॥१॥ जहांरसिक गिरिधर शब्द उघटत
ग्रग्न धुंग थुंगन होरी ॥ गोविंदप्रभु बनी नवनागरी गिरिधर रस जोरी ॥२॥ | Kalyan |
Murali humm parr rose bharee .. uns hamarau puni puni anchavat | Part1-289 | मुरली हम पर रोस भरी ॥ अंस हमारौ पुनि पुनि अँचवत
नेंकहु नहि न टरी ॥१॥ बारबार अधरनिसौं परसत देखत सबै खरी ।। ऐसी
ढीठ टरी नहीं यहाँते ज्याँ हस रिसनि जरी ॥२॥ यह तौ किधौं अकाज
हमारौ अब हमें जान परी ॥ सूरदास प्रभु निठुर कराये ऐसी करनी करी ॥।३।॥। | Saarang |
Aaj bunn kouu vaha jinn jaay .. sub gaayan bachhran | Part1-002 | आज बन कोऊ वह जिन जाय ॥ सब गायन बछरन
समेत घर लावौ चित्र बनाय ॥१॥ ढोटा हो ब्रज भयी रायजूकें कहत सुनाय
सुनाय ॥ चहुँ दिश घोष यही कोलाहल उर आनंद न समाय ॥२॥ कितही
विलंब करत बिन काजैं वेगि चलो उठि धाय ॥ अपने अपने मनके चीते नैनन
देखो आय ॥३॥ एक फिरत दधि दूब देत है एक रहत गहि पाय ॥ एक
वसन पट देत बधाई एक उठत हँसि गाय ॥४॥ बाल विरध नर नारिनके मन
भये चौगुने चाय ॥ सूरदास प्रमुदित ब्रजवासी गिनत न राजा राय ॥५॥ | Devgandhar |
Hoe hoe hoe hoe hoe hoe horry .. sunder shyam radhika | Part3-287 | हो हो हो हो हो हो होरी ॥ सुंदर श्याम राधिका
गोरी ॥१॥ राजत परम मनोहर जोरी ॥ नंदनंदन वृषभान किशोरी ॥२॥॥
डफ ओर ताल मृदंग बजावत || गोरी राग सरस सुरगावत ॥३॥ नवसत
साज सकल ब्रजनारी ॥ प्रमुदित देत भामती गारी ॥9॥ झूंडन जुर चहुंदिसतें
दौरी ॥ मदन गोपाल गह्ेभर कोरी ॥५॥ सोंधो बहुत सीसतें नायो ॥ रंगे
बसन कीयो मनभायो ॥६॥ नवल अबीर सखा संग लीने ॥ फिरत उडावतत
फेंटन दीने ॥७॥ नयन आंज रोरी मुखमांडत ॥ प्रेम आलिंगन देदे छांडत
॥८॥ हरि मृदुभुजा कंठ ले लावत ॥ अंतर को अनुराग जनावत ॥९॥ मगन
भई तब सुधिन संभारत ॥ प्राणनाथ पर सर्वस्व वारत ॥ १ ०॥ चतुभुंज प्रभु
पिय सब सुख सामर ॥ सुरनर मोहे गिरिधर नागर ॥१ १॥ | Gouri |
Khelat nand aangan govind | nirakh nirakh jasumati sukh | Part1-153 | खेलत नंद आँगन गोविंद | निरख निरख जसुमति सुख
पावत बदन मनोहर चंद ॥१॥ कटि किंकिनी चंद्रमनि की आभा मुक्तावलि
बनी माल | परम सुदेश कंठ केहरिनख बिच बिच बज्र प्रवाल ॥२॥ कर
पहुँची पायन पनसूरा तनु रंजित रज सीत । घुटुरुवन चलत अजर में बिहरत मुख
मंडित नवनीत ॥३॥ सूर विचित्र कान्ह की बानिक बानी कहत न आवै |
बालदशा अवलोकि सनक मुनि योग बिरति बिसरावै ॥४॥ | Bilawal |
Srivallabh dekhe mein jaba jaage. ghoomat nenason bolat | Part2-326 | श्रीवल्लभ देखे में जब जागे। घूमत नेनसों बोलत
है जुं प्राणप्रिया रस पागे ॥१ ॥ सिथिल अंग जृंभात कछुकहि बैठ प्रिया
अंग लागे। रामदास वललभजन ठाड़े चरनकमल अनुरागे॥२॥ | Bhairav |
Aaj diwari bado parab ghar.. | Part2-039 | आज दिवारी बडो परब घर॥
कहत जसोदा सुनहु लालतुम लेलकुटी खेलो अपने कर ॥१ ॥
प्रथम न््हाओ आछे सोधे सों गुहि बेनी अंजन देउ नटबर ॥
सूथनलाल तासकी झंगुली धरो चंद्रिका सुभग शिस पर॥२॥
पाछे विविध आभूषण मुरलीले मेरे मुरलीधर।
देऊँ भाल मृगमदको जो कोउ दृष्टी न लगे तेरे पर ॥३ ॥
खेलो तुम मेरे आंगन दोउ शेख अपने आनन पर ॥
पान फूल मेवा मिश्रीसों झोरी भर ग्वालन देऊें सुन्दर॥४॥
सुभगस्वरूप नंदलालको मोहित होत देरित्र सब सुरनर ॥
यह विध कहत नंदजुकी रानी सुन सुन वारत सर्वस्व गिरिधर ॥५ ॥ | Bilawal |
Merrie akhiyanke bhushan giridhari .. balbalzaun chhabili | NityaPad-071 | मेरी अखियनके भूषण गिरिधारी ॥ बलबलजाउं छबीली
छबिपर अतिआनंद सुखकारी ॥१॥ परमउदार चतुरचिंतामणि दरसपरस
दुखहारी।। अतुल प्रताप तनक तुलसीदल मानतसेवा भारी ॥श।
छीतस्वामीगिरिधरन विशद्॒यश गावत गोकुलनारी ॥ कहावरनो गुणगाथ नाथके
श्रीविद्दल हृदयविहारी ॥३॥ | Aasawari |
Param sukh nandrai ghar jasumati dhota jaayo .. vrajki taruni | Part1-072 | परम सुख नंदराय घर जसुमति ढोटा जायो ॥ ब्रजकी तरुनी
नख सिख बनिआई प्रमुदित करत बधायों ॥॥१॥| गोप सकल दथि दूध परस्पर
छिरकत हितचित चायो ॥ विप्रनकों गौदान देतहें जाचक जन मन भायों ॥२॥
व्रजपुर बेंरख बंदन मालें मोतिन चौक पुराये ॥ बाजत पंच शब्द मधुरें सुर देवकुसम
बरखायो ॥ अतिरवनीय रमा क्रीडन लखि व्रजाधीश गुण गायो ॥४॥ | Todi |
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