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Mahaprabhuji Ki Badhai
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Abb kahaa curry haye suni merrie sajani laalan khel anokho paayo.. | NityaPad-044 | अब कहा करि हे सुनि मेरी सजनी लालन खेल अनोखो पायो॥
रूप भर्यो ईत रात चपल अति अंग अंग मनमधथ निरस्त्रि लजायो ।॥। १॥।
दीजे वसन प्रान पति सबके अवतो प्रात हों न आयो ॥
श्री विट्ठलगिरिधरननिरखि त्रिय तन मन मेघन तुम हाथ विकायो ॥। २॥।
| Ramkali |
Kaana jagaay gopal mudit munn huttery baithe govarddhadhari .. | Part2-063 | कान जगाय गोपाल मुदित मन हटरी बैठे गोवर्द्धधधारी ॥
हलधर संग सुबल श्रीदामा गोप ग्वाल सब गाय शृंगारी ॥१ ॥
देखनकों मोहे सुरनर मुनि रावर मांझ भीर भई भारी॥
जयजयकार होत चहुंदिशवें सुरपती रपति करत कुसुम बरखारी ॥२ ॥
कंचन रत्न जटित हीरा नग विश्वकर्मा रचि सुविधि संवारी ॥
परम विचित्र बनी अति सुंदर जगमगात कुहुँ तिमिर विदारी ॥३ ॥
नंदभवन भर धरे विविध पकवान अगणित मेवा गिरीछुहारी ॥
टेरटेर तब देत सबनकों शिवब्रह्मादिक गोद पसारी ॥४ ॥
आरती करत मात यशोदा मंगल गाबत सब व्रजनारी॥
सूर रसिक गिरिधर सुख विलसत वरषवरष प्रति परव दिवारी ॥५ ॥ | Kanharo |
Gwalini krishnadarsason ataki .. | NityaPad-270 | ग्वालिनि कृष्णदरससों अटकी ॥
बारबार पनघट परआवत सिर यमुनाजल मटकी ॥१॥
मनमोहन को रूप सुधानिधि पीवत
प्रेमस गटकी ॥ कृष्णदास धन्यधन्य राधिका लोकलाज सब पटकी ॥२॥ | Aasawari |
Raniju jaayau poot sulachhan .. vipran daan diye manee kanchan | Part1-005 | रानीजू जायौ पूत सुलच्छन ॥ विप्रन दान दिये मनि कंचन
वधूबनकों पट दच्छन ॥१॥ जन्मत गयौ घोषको नसिकें सब संताप ततच्छन॥
सूरदास प्रभु प्रगट भयेहें निज दासनके रच्छन ॥२॥ | Devgandhar |
Kunwar douu raajat naval kishore atee anand | Part3-242 | कुंवर दोऊ राजत नवल किशोर अति आनंद
भरे ॥ अहो ब्रज युवतिन के चितचोर परम विचित्र खरे ॥ध्रु०॥ इत श्रीमदन
गोपाल सखा भुज अंसन दीने ॥ उत राधिका प्रवीन मेल अपने संग लीने ॥
कुंबरि कुंवर सोनेहहे बढ्यो अधिक अनुराग ॥ निकसि गामके गोंयडें हरि
खेलन लागे फाग ॥१॥ वाजत डफ बांसुरी ताल मिल मधुर मृदंगे ॥ गावत
सारंग राग अधिक सुख उपजत अंगे ॥ नरनारिनके नेहहें लाज रही नहीं
गात ॥ कछु वे कहत कछू ये कहें सबे स्याम रंग रात ॥२॥ तब उन ग्वालन
उम्रगण लई हाथन पिचकारी ॥ गोपिन के मुख भरत देत होरी की गारी ॥
घात किये चितवत फिरें उत्तेछेनल के बाग || सावधान सब गोपिका देतन
लागन लाग ॥३॥ तब ही ग्वालिनी धाय गल्यो एक संग मिल पीकों ॥
आंख आज सुख मांड दियो सेंदुर को टीको || कान ओंचि गुलच्यो सबे
और दीनों मुकराय | चलत आपने मेल कों खिसल परत नहीं पाय ॥४७॥
तब ही नंद के लाल समझ कछु बात बिचारी ॥ धरयो त्रियाको रूप जाय
भेटे ब्रजनारी ॥ पाछे ते सकुची सवे जब जान्यो यह भाव ॥ तारी देहसकें
चले हम लियो हे सखा को दाव ॥५॥ तब ही सहचरी एक भेष हलधर
को कीनो ॥ गोकुल तन व्है आय पहरनील पटझीनों ॥ ताहि मिलन केशव
चले कर अग्रज की कान ॥ इत चितबतत दुचिते भये उत गहे ग्वालिनी
आन ॥६॥ एक अली भुजगहे एक पटका झकझोरे ॥ एक धरे हरिहसे
एक मुखसों मुख जोरें || एक कहेरी छांडिये कहिये गरभदुभाय ॥ एकन
वात न लाय लालकी मुरली लई छिनाय ॥॥|७॥ छूटन पाओ तबे देयो फगुवा
मन मान्यो ॥ रंग रंग बसन मंगाय दियो जाहि जेसोही बान्यो || एक नयन
की सेनदे एकनतन मुसिक्याय ॥ एक आंकों भरले चले हरि सबको भलो
मनाय ॥|८॥ नाना भोग बिलास रास वृंदावन कीनों ।॥| हरखि बल्लबी नारि
परम सुखत्र सब को दीनों ॥ मदन लजानों देख कें कमल नयन की केलि ॥
मिरिधर पिय आये घरें सब सुख सागर झेलि ॥॥ | Sarang |
Mukh musakini manbasi nabalbar chitwan chita harilino .. kunjan keli rahasi russ barkhati or argaja meeno ..1.. | Part3-050 | मुख मुसकिनि मनबसी नबलबर चितवन चित हरिलीनो ॥ कुंजन केलि रहसि रस बरखति ओर अरगजा मीनो ॥१॥
अबीर अगरसतबरन बिराजति राग बसंते कीनो ॥ हरिदास के स्वामी स्यामा कुंज बिहारी देखो मैनमन हीनो ॥२॥ | Basant |
Aii gwal mandali mein | NityaPad-210 | ऐ ग्वाल मंडली में
भोजन करत गुपाल ॥ पठई छाक जसोधामैया बिजन बोहत रसाल ॥१॥ मधुमेवा
पकवान मिठाई लाई सुन्दर बाल ॥ खात खवावत हसत परसपर तारी दे
नंदलाल॥२॥ रूच ऊपजत तब बतियां मीठी करत सबे बिध ख्याल ॥ रसिक
'सिरोमणी मिरि की छैयां राजत ऊरबनमाल ॥३॥ | Saarang |
Maiya nipatburo baladaau .. kahat haye vann badotmaso sub larkajur-aaoo ..| 1.. | NityaPad-197 | मैया निपटबुरो बलदाऊ ॥ कहत है वन बडोतमासो सब लरकाजुर-आऊ ॥| १॥
मोहूको चुचकारचलेलै जहां बहुतबनझाऊ ॥
बाँहीतेकहि छाँड चले सब काठिखाउरेहाऊ | २॥
डरकांपकें उठ ठाडो भयो कोऊ न धीर धराऊ ॥
परपर गयो चल्यो नहीं जाई वे भाजेजात अगाऊ ॥३॥
मोसों कहत मोलको लीन्हों आप कहावत साऊ ||
परमानंद बलरामचवाई तैसेईमिले सखाऊ ॥।४॥ | Bilawal |
Sabmili gwalini deit assis . nandrani dhota jeevi koti | Part1-078 | सबमिलि ग्वालिनी देत असीस । नंदरानी ढोटा जीवी कोटि
बरीस ॥१॥ धन्य यह कूँखि भरी सुभ लक््िन जिन सगरो ब्रज छायो । ऐसौ
पूत जायी नंदरानी जिन करि अटल बसायौ ॥२॥ अब यै बेगि बढ़ौ तुमरे ग्रह
ठुम ठुम खेलत डोलै । श्री विद्रलगिरिधर रानी तुमसों मैया कहि कहि बोले ॥३॥
# राग सारंग ऋ यशोमति सबहिन देति बधाई । मेरे लालकी मोहि विधाता
बरसगांठि दिखराई ॥१॥ बैठि चौक गोद ले ढोलन आछी लगन धराई ।
बोहोत दान द्यावत सब विप्रन लालन देखि सिहाई ॥२॥ रुचिकर देहु असीस
ललनकों अप अपने मन भाई श्रीविद्डलगिरिधर गहि कनियाँ खेलत रहो
सदाई ॥३॥ | Saarang |
Chhaak lai jaahu ree merrie maaee jahaan ree milai merau | NityaPad-206 | छाक लै जाहु री मेरी माई जहाँ री मिलै मेरौ
कुंवर कन्हाई इह मोदक पकवान मिठाई खीर संजावलि अधिक बनाई आनिहु
खिचरी बहुत संधाने पापर सेकि धर्यों गुन लाई । पूप सस्कुली पूरी दधि
ओवदन बहुत जु रुचि करे खाई ॥ दूरहि तें देखे बलदाऊ देखि कन्हैया
छाक है आई । 'परमानंद' मन की सब जानी ऐसी मैया की हों लेऊँ बलाई ॥। | Saarang |
Chaliyaiju nenku kautuk dekhan rachyau haye rasmondal raadhe heen aaee | Part1-333 | चलियैजू नेंकु कौतुक देखन रच्यौ है रासमंडल राधे हीं आई
तुम्हें लेन ॥ मृगमद घसि अंग लगाये मुकुट काछनी बनाये मुरली पीतांबर विराजत
यह छबि मोपे कही न परै बैन ॥१॥ सब सखी मिलि नायें गावें ताल मृदंग
मिलि बजावें नृत्य करें मध्य मू रति मैन ॥ सूरदास मदनमोहन हँसत कहा हो जु
पाएँ धारिये जो पै सुख दीयो चाहों नेन ॥२)॥ | Malav |
Sripati duhkhit bhaktaparaathen | | NityaPad-362 | श्रीपति दुःखित भक्तअपराथें |
संतनद्वेष दोहिताकरके आरत सहित जोमोहिआराधें ॥१॥
सुनो सकल बैकुंठनिवासी सांचीकहूं जिनमानों खेदें ॥
तिनपर कृपा करूं कैसी विधपूजन पांव कंठकूं छेदें ॥२॥।
जनसो वैर प्रीतमोसोंकर मेरोनाम निरंतर लैहैं |
सूरदास भगवंत बदत यों मोहि भजें पर यमपुर जैहैं ॥।३॥ | Bihaag |
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