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Makar Sankranti Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Khambhaki ojhal thaadho subal praveen | NityaPad-086 | खंभकी ओझल ठाढो सुबल प्रवीण
सखा करमें जटितडबा वीरासों भरथो जेमतहेंरी मोहन ।।
परदापरे तिवारी तीन्यो तामध्य झलकत अंग अंग रंग सोहन ॥ १॥
जाहीको देखत रानी ताहीको उठतझुक कोऊ नहीं पावत समयो जोहन ॥
नंददासप्रभु भोजनकर बैठे तब में दईरी सेन पान खाये आंवन कहयोरी गोहन ॥२॥। | Todi |
Dekhari dekh yugalkishore .. karatkam | NityaPad-337 | देखरी देख युगलकिशोर ॥ करतकाम
कलोलकुंजन स्यामसेत शशि जोर ॥ १॥ सेज नभ ग्रह सूचत चहूं दिश परत कह
कहूं थोर॥ मानों बादर वसन पसरे विविध पचरंग छोर ॥२॥| कंठपर करधार
कबहूं करत आनन और ॥ मानों सोमसरोज छायो वैरी बंधु निहारे ।।३॥ रच्यो
ब्रजपरिचार झरन प्रेमसुधारसरोर ॥ घटत बढत न॑वरस घोडस प्रकट रजनी
भोर ॥४॥ गयो त्रिभुवन तिमिर उपज्यों इंदु सामलगोर ।। तृपति नेक नहोत सूरज
पीबत नथन चकोर।॥।५॥ | Bihagaro |
Maangat dadhi makhan uthh praat. houn dadhi mathan karanakon baithi tahaan | NityaPad-030 | मांगत दधि माखन उठ प्रात। हों दधि मथन करनकों बैठी तहां
आय अरबरात ॥।१॥ कद्यो जशोदा देहो रोहनी हँस हँस बैठे खात। श्रीज्रजपति
पिय मांग लेत हैं कहि कहि त ोतरी बात ॥२॥। | Bibhaas |
Aaj dashahara shubh dinn neekau .. | Pustak1-315 | आज दशहरा शुभ दिन नीकौ ॥
गिरिधरलाल जवारे बॉँधत बन्यौ है भाल कुंकुमकौ टीकौ ॥१॥
आरती करत देत नौछावर चिरजीयौ लाल भामतोौ जीकौ ॥
आसकरन प्रभु मोहन नागर त्रिभुवनकौ सुख लागत फीकौ ॥२॥ | Saarang |
Piya teree chitbanahin meey tona .. tanmandhan bisaryou jabaheete | NityaPad-113 | पिय तेरी चितबनहीं मे टोना ॥ तनमनधन बिसर्यो जबहीते
देख्यो स्थामसलोना ।।१॥ ढिंगरहवेकू हो विकलमन भावत नाहिं नभोना ॥।
लोग चवाव करत घरघर प्रतिधर रहिये जियमोंना ॥२॥ छूटगई लोकलाज
सुतपतिकी ओर कहा अब होना ॥ रसिक प्रीतमकी बांनिक निरखत भूलगई
गृहगोना ॥ ३॥ | Adano |
Douu alsaane raajat praat .. srivrikhbhan nandani nand suta | NityaPad-139 | दोऊ अलसाने राजत प्रात ॥ श्रीवृखभान नंदनी नंद सुत
रसिक सलौने गात॥।९॥ नील पीत अम्बर लपटानो छिन छिन अधिक सुहात |।
मानहु घन दामिन अपनी छबि होई एक बिकसात ॥। २॥ बिन मकरंद अरबिंद
वृुन्द मिल अंग अंग बिकसात ॥ सुखसागर गिरिधरन छबीलो निरख अनंग
लजात ॥ ३॥ | Bibhaas |
Kahau vraj gopi gope badhaai .. gavahu nandrani suta jaayau | Part1-045 | कहौ ब्रज गोपी गोप बधाई ॥ गावहु नंदरानी सुत जायौ
बालकृष्ण निधि पाई ॥१॥ थेंनु रची द्विज कंचन दीये जाचक जन नेंदराई ॥
ब्रजाधीश प्रभु सुनि व्रजनारी कुसुम झरी बरखाई ॥२॥ | Sarang |
Piyakon nachban sikhwat pyaari .. | Pustak1-357 | पियकों नचबन सिखवत प्यारी ॥
बुंदावन में रास रच्यो है शरदरैन' उजियारी ॥१॥
तालमृदंग उपंग बजाबत अति प्रबीन ललिता री ॥
रूपभरी गुण हाथ छरी लियें डरपत लालबिहारी ॥२॥
बीणा बेणु नूपुर ध्वनि बाजत खग मृग बुद्धि बिसारी ॥
ब्यास स्वामिनी की छबि निरखत रीझ देत करतारी ॥३॥ | Bihaagro |
Samein chhaandi dadhi bachan aaee koo haye sundari kaunein vidhi thhaati .. | Part1-257 | समें छाँडि दधि बचन आई को है सुंदरि कौनें विधि ठाटी ॥
अहो नागरी गोवर्द्धन की बिन दीयें क्यों उतरे घाटी ॥१॥ रसिकराय चाख्यों
चाहत हैं तेरी मटुकिया मीठी कै खाटी ॥ मारत दान जात निशबासर कृष्णदास
प्रभु यों कहि डाटी ॥२॥ | Kanharo |
Baanke aasan baanke singhasana baanke takiyanaki | NityaPad-069 | बांके आसन बांके सिंघासन बांके तकियनकी
छबि न्यारी ॥ बांके रासविलास बने अरु बांकी बनी राधा जू प्यारी ॥ १॥ बांके
मंदिर कंचनके अरु बांकी बनी ब्रजकी ब्रजनारी | गोविन्द देखत नेन ताकि रही
झुकि झरोखन बांके बिहारी ॥२॥ | Todi |
Dekhat darpan kahat gopal . arrie maiya yeh kaun doosaron | Part1-148 | देखत दरपन कहत गोपाल । अरी मैया यह कौन दूसरों
मोहीसौ तेरी लाल ॥१॥ याहि गोद लै बैठि जिमावै हों न जेंऊँगो आज | हों
बाबाकी गोद बैठिहों लै अपनों सब साज ॥२॥ जाय बसूँगो गोपिनके घर
खेलूँगो ब्रज माँही | चोखूँगो गैया अपनीकों छूवों न तेरी छाँही ॥३॥ जो तू
मेरी कही न मानें दरपन हदें लगाय । मेरें ओर कौन दूसरी तूही पुत हों माय॥४॥
बालचरित्र रस महामुग्ध सो बरनन करि मन मूढ़ | रसिक प्रीतम सुमिरत निशिवासर
अंतर भावनिगूढ़ ॥५॥ | Bilawal |
Aaj attari parr useer mahal rachidampati vyaaru karat... | NityaPad-303 | आज अटारी पर उसीर महल रचिदंपति व्यारु करत।॥
खोबा मलाई और बासोंधी पय हँसि हँसि घूंट भरत | १॥।
चहूं ओर खसखाने छूटत फुहारे फुंही बींजना ब्यार सीयरी मनकों हरत ॥
नंददासप्रभु प्रिया प्रीतम परस्पर हँसि हँसि कोरलेत सहचरी कनक डबा बीरासों भरत ॥२॥ | Iman |
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