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Mahaprabhuji Ki Badhai

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Kahey jotsi madhumangal tum suno joo baat . binn prabhu
Part2-330
कहे जोतसी मधुमंगल तुम सुनो जु बात । बिन प्रभु दिन सब कोन काज जग विख्यात ॥१ ॥ जा दिन प्रभुको मिलन कत आछो जान। दुलहे व्है आयो ब्याहन पूरण पुरुष प्रमाण ॥२॥ है बराती जो संग सबे उनके हैं अंग (हित महेस ब्रह्मादिक सबन आये हैं संग ॥३॥ करनी धरी लगन दीन पांडे दियो पठाय। बाजन बाजत बहो विधि शोभा कही न जाय ॥४॥
Gouri
Aaj chhathi vrishbhan kunwariki keerat karat badhaai hoe .
Part1-211
आज छठी वृषभान कुंवरीकी कीरत करत बधाई हो । प्रात समे उठि करि जू उबटनों ताते नीर न्हवाई हो ॥१॥ विविध वसन पट जदित आभूषण अमोलक पहिराये हो । गर्ग पराशर सनक देव गुरु विप्रन सब बुलाये हो ॥२॥ द्वार द्वार प्रति धरत साथिये चंदन भवन लिपाये हो । गजमोतिनके चौक पुराये तोरन द्वार बंधाई हो ॥३॥ विप्र वेद धुनि हरख पढत हैं विधि सों छठी पूजाई हो । भाल कर्यौ कुमकुमकों टीको कुंवरी गोद बिठाई हो ॥४॥ आरती करत देत नौछावरि मंगल गीत गवाई हो । अगनित गाय सिंगारी अलंकृत दान देत मन भायो हो ॥५॥ बहो विधि पाट्टंबर पहिराये दिये भंडार लुटाई हो । मागध सुत विदित गुनि गंधर्व मंगल सुजस सुनाई हो ॥६॥ देत असीस लली चिरजीयो जहं तक यमुना बहाई हो । श्यामा श्याम देखी यह जोरी “दास! बल बल जाई हो ॥७॥
Aasawari
Saanware bhaleho ratinagar .. avake duraay kyondurtahe preetiju bhaee
NityaPad-146
सांवरे भलेहो रतिनागर ॥ अवके दुराय क्योंदुरतहे प्रीतिजु भई उजागर।॥।१॥| अधर काजर नयन रगमगे रची कपोलन पीक ।। उरनख रेख प्रकट देखियतहैं परी मदनकी लीक ॥|२॥ पलटपरे पट तिलक गयो मिट जहांतहां कंकण गाढे ॥ परमानंदस्वामी मधुकर गति भली आपनी चाढे ॥।३॥
Bibhaas
Merrie bharee matukia lai gayau ree .. aapun khaat khwal hii
Part1-222
मेरी भरी मटुकिया लै गयौ री ॥ आपुन खात ख्वाल ही खदावत रीती कर मोहि दे गयौ री ॥१॥ वृन्दावनकी सघन कुंजमें ऊँची नीची मोसों कहि गयौ री ॥ परमानंद व्रजवासी सावरो अँगुछठ दिखाय रस ले गयौ री॥२॥
Malkos
Preetam pyaari adhar russ ghuntat ..
NityaPad-057
प्रीतम प्यारी अधर रस घुंटत ॥ रति धन संचित करी कमाई मदन फोज गढ लुंटत ॥ १॥ आलिंगन परिरंभन चुंबन नेन सेन गोला तहां छूटत ॥ चतुर बिहारी गिरधारी स्थाम नाम के बचन भेद सब खूटत ॥ २।।
Malkos
Pyaarehon baat kahat bilag jinn maanon tummoson durr jaay
NityaPad-054
प्यारेहों बात कहत बिलग जिन मानों तुममोसों दुर जाय अनत रति मानी ॥ तुमह तोमेरें आये भलोजु मनावन सो तोही हम जानी ॥।१॥ नखक्षत चिन्ह देखियतहें यहबात मेरेमनहूं न मानी ।॥ तानसेनके प्रभु न्यारेव्हे रहे क्यों याहीते सोतिनजानी ॥२॥
Malkos
Dhota kaunako manmohan ..
NityaPad-295
ढोटा कौनको मनमोहन ॥ संध्यासमें खिरकमें ठाडे सखी करत गोदोहन ।॥।१॥ ग्वालनी एकपाहुनी आई देख ठगीसी ठाड़ी ॥ चित चल गयो मदन मूरतीपै प्रीति निरंतर बाढ़ी ॥ २॥। चलभ सकत पग एक सुंदर चितचोर्‌यों ब्रजनाथ ॥| परमानंद दास वहजानें जिहिखेल्यो मिल साथ ॥ ३॥
Gori
Aalee kunjabhavan baithe vrajraj suban bolat mukharsik kunwar tuu chala pranpiyari ..
NityaPad-231
आली कुंजभवन बैठे व्रजराज सुबन बोलत मुखरसिक कुंवर तू चल प्राणपियारी ॥ तेरेहित लोभीलाल उठ चल भर अंक माल विरह रसाल छांड प्यारी तोऊपरहों वारी ॥१॥ छांड मान करशुंगार दर्पणले मुखनिहारकोटि काम डारो वार पहिरें नीलसारी ॥ गोविंदप्रभु रसरंगरेल कंठ भुजा अंसमेल वश करी गिरिधारी ॥२॥
Saarang
Krishna shrikrishna sharanmam uchchare ..
NityaPad-358
कृष्ण श्रीकृष्ण शरणंमम उच्चरे ॥ रैनदिन नित्यप्रति सदा पलछिन घड़ी करतविध्वंस जन अखिल अघ परिहरे | १॥ होत हरिरूप ब्रजभूप भावेसदा अगम भवसिंधुकूं विना साधन तरे ॥ रहत निशदिवस आनंद उरमें भरयो पुष्टिलीला सकलसार उरमें धरे ।।॥२॥| रमा अज शेष सनकादि शुक शारदा व्यास नारद रटें पलक मुख ना टरें॥ लालगिरिधरनकी महिमा अतुल जगमगी शरण कृष्णदास निगम नेति नेति करें ॥ ३॥
Gori
Podhe rangarmanirai ..
NityaPad-130
पोढे रंगरमनीराय ॥ रंगमहेल चित्र किये सुंदर जगमगात जुराय ॥।१॥ रत्नजटित की आगे अंगीठी परदा परे सुहाय ॥ बल जाऊं छबिली छबिपर कृष्णदास बलि जाय ॥।२॥
Bihaag
Aaj baney navrang chhabileri .. dagmagaat pug angang
NityaPad-141
आज बने नवरंग छबीलेरी ।। डगमगात पग अंगअंग ढीलेरी ॥१॥ यावक पाग रंगी धों कैसे जैसें करी कहो पियतैसें ॥२॥ बोलत बचन होत अलसाने ॥ पीककपोल अधर लपटाने ॥३॥ कुमकुम हृदय भुजन छबि बंदन ॥ सूर स्थाम नागर मनरंजन ॥।४॥॥
Bibhaas
Hasi musakaat paraspar doll jhoolat hain ..
Part3-376
हसि मुसकात परस्पर डोल झूलत हैं ॥ सुरज्ञ गुलाल लई मुठि भरि कटि तट में राखि छिपाई धरि चाहत भर्यों दूृगंचर ॥१॥ देखों कहत अनेक कुसुम पर कैसे दोरत हैं हो अलिवर मानों चले पंचसर के सर ॥ तब जियकी जानी मुख ऊपर तब ही दई तारी सुंदर कर बिथके सब नारी ॥२॥ इहि विधि झूलत हैं री गिरिधर परसत पानि कपोल मनोहर रीझि देत कबड्टू उरसों उर ॥ 'मदनमोहन” पिय परम रसिकवर कहा कहों यह सुख को सागर बलिहारी बानिक पर ॥३॥
Devgandhar
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