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SPIRITUAL BENEFACTOR
VAISHNAVACHARYA HDH PUJYA GOSWAMI 108 SHRI VRAJRAJKUMARAJI MAHODAYASHRI
Mahaprabhuji Ki Badhai
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Atee udaar mohan merey nirasitri nainn phule ree .. | NityaPad-245 | अति उदार मोहन मेरे निरसित्रि नैंन फुले री ॥
बिच बिच बरुहाचंद: फूलनको सेहरों बन्यों कमक कुंडल सो सोभादेत निगम नेत मुलेरी॥१॥
चंदन को लेपकीये गुलाब की बन मालही । ये: पीतांबर कट बाधें अंगन पट दकुलें ॥
छीत-स्वामी गिरिवर धर गायम को नाम धोरी टेरत सब ठाड़ी भई तरु कदंम मुलें ॥२॥ | Saarang |
Sudin sumangal jaani jasoda laal koun pahiraavati bagau .. | Part1-317 | सुदिन सुमंगल जानि जसोदा लाल कों पहिरावति बागौ ॥
अँग-अँग भूषन ललित मनोहर लटकि जवारें पागौ ॥ व्रज-सुंदरी निरखि मन
हरषतिं सगन होत मन फूलत । रूप-रासि रस-रसिक लाडिलौ देखियतु नव तन
भूलत ॥ मैया देखति लेति बलैया मुख चूँवति सचु पावति । 'परमानंददास'
मन हरषत सुमिरि-सुमिरि गुन गावति ॥ | Saarang |
Silaa pakhaaro bhojan keeje .. | NityaPad-203 | सिला पखारो भोजन कीजे ॥
नीके व्यंजन बने कौनके चारत्र धाख सबहिनकों दीजे॥१॥
अहो अहो सुबल अहो श् री श्रीदामार्जुन भोज विशाल ॥
अपने अपनेओदन लाओ आज्ञा दईहै गोपाल ॥२॥
फल अंगुरिन अंजलिनबिच राखे वांटवांट सबहिन को देत।।
परमानंदस्वामी रसरीझे प्रेमपुंजकों बांध्योसेत ॥३॥ | Saarang |
Vividh basant banaaen chalon sub daikhan kunwar kanhai .. mirighatiyan dramalata sugandh alie thaade saji sukhdai .. 1.. | Part3-070 | विविध बसंत बनाएँ चलों सब दैखन कुँवर कन्हाई ॥ मिरिघटियां द्रमलता सुगंध अलि ठाडे सजि सुखदाई ॥ १॥
बागों केसरी चोवा सोहै सुरंग गुलाल उडाई ॥
ब्रजबालक गावति कोलाहल धुनि “ब्रजाधीस' मनभाई ॥२॥
| Basant |
Shrilakshman bhupkumar prakate srivallabh | Part2-317 | श्रीलक्ष्मण भूपकुमार प्रकटे श्रीवललभ
पूरणकाम॥ परमकृपाल कृपाकर जनपर भक्तनके अभिराम॥१॥
प्रेमभक्ति दिखाय निजजनकों ओर दीने परम सुखधाम ॥ जन मथुरा कहे
कहांलो वरनों जगत कृतारथ तुम्हारो नाम ॥२ | Kanharo |
Aaj mohi aagam agam janaayo .. sondhon | NityaPad-241 | आज मोही आगम अगम जनायो ॥ सोंधों
छानी अरगज़ा चंदन आंगन भवन लीपायों ॥१॥ आगम आवन जान प्रीतम
को गोपीजन मंगल मायो ॥ आनंद उर न समाय सखी नव साजि सिंगार
बनायों ॥२॥ तन सुख पाग पिछोरा झीनो केसर रंग रंगायो ॥ मुक्ता के आभूषन गुही मनी पहिरावत हुलसायो ॥३॥ पंखा बहु सिर प्रीतम को, नित राखुंगी
छिरकायों ॥ ग्रीषमऋतु सुख देति नाइक यह औसर चलि आयों ॥ आवेंगे महेमान
आज हरि भाग्य बडे दिन पायों ॥ 'कुंभनदास' नव नेह नई क्रतु आगम सुजस
सुनायों ॥४॥ | Saarang |
Balihari raas biharin kii | | Pustak1-330 | बलिहारी रास बिहारिन की |
मरकत मनि कज्वन-मनिमाला ग्रथन नन्दकुमार की ॥१॥
सारंग राग अलापत गावत बिच मिलवतयतति ताल
की नाचत गावत बेन बजावत लेत उदार उगाल की ॥२॥
यमुना सरस मल्लिका मुकुलित त्रिविध समीर सुढ़ार की ।
'क्ृष्णदास” बलि गिरिधर नवरंग सुरतनाथ सुकुमारा की ॥३॥ | Saarang |
Seetal sadanmein seetal bhojanbhayo seetal curran koo aisab sakhiyaan.. | NityaPad-221 | सीतल सदनमें सीतल भोजनभयो सीतल करन को आइसब सखियां।।
छीरक्यो गुलाबजल नीले पीरे पाननमें बीरी अरोगत नाथ सीतल होत अखियां॥१॥
जल गुलाबघोर लाई अरगजा चंदन में नेक लगावो कंठ लपटाई॥
कुंभनदास प्रभु गोबरधनधर कीजे सुख सनेह हाथ पंख ढुराई ।॥२॥ | Saarang |
Krishna shrikrishna mammahi gati jaaniye... | NityaPad-358 | कृष्ण श्रीकृष्ण मममाहि गति जानिये।॥
देह इंद्रिय प्राण दारागारादि वित्त आत्मा सकल श्रीकृष्ण की मानिये ॥१॥
कृष्ण मम स्वामीहों दास मनवचकरम कुष्णकर्ता येही सदा जिय आनिये ॥
कृष्णदासनि नाथ हरिदासवर्य धरचरण रजबललभाधीश मन सानिये ॥२॥। | Gori |
Kajarwari gori jwaari .. yaa sanwaliya | Part3-119 | काजरवारी गोरी ज्वारि ॥ या सांवलिया
की लगवारि ॥ निसदिन रहेत प्रेमरंगभीनी ।। हरि रसिया सों यारी कीनी
॥ १॥ मदनगुपाल जानि रिझवार ॥ नानाविधिके करत सिंगार ॥ मिलनकाज
रहे अंग अंगोछें || सरस सुंगधन तेल तिलीछें ॥ २॥ अंजन नाहि भटवेंदीये ॥
स्यामरंग ननन में पीये ॥ गावतद्दू जसुमति ग्रह आबे ॥ कृष्ण चरित्र बह
गाय सुनावे ॥ ३॥ सुंदरस्याम सुनेंढडिगआय || चितवत ही चित हरि लेजाय ॥
कोऊ कहे काड्ू की न माने ॥ अपने मनकी गायवखाने ॥४॥ रामरायप्रभु
योंसमुझावे || कहि भगवान् कोऊनीके गावे || ५॥ लखिइनस्याम कहेनिरधार ॥
यह लगणवारिन यह लगवार ॥६॥ | Bilawal |
Chorikarat kanhgharpaye .. | NityaPad-183 | चोरीकरत कान्ह्घरपाये ॥
निशवासरमोहि बहुतसतायो अबहरि हाथहि आये ॥१॥
माखनदधि मेरोसबखायो बहुत अचगरीकीन्हीं ॥
अबतो हाथपरेहोलालन तुमहीभलेमैंचीन्हीं ॥ २॥
दोऊभुजपकरकेंकह्ञों माखन लेहों मँगाय ॥
तेरीसों मैनेंकनचाख्यो सख्ागयेसबखाय ।॥३॥
मुखतनचिते विहँसहँसदीनो रिसत बगईबुझाय ||
लियेस्थाम उरलायग्वालिनी सूरदास बलजाय ॥॥४॥ | Ramakali |
Srijmunajiki mahima mopein varani naan jaaee .. | NityaPad-011 | श्रीजमुनाजीकी महिमा मोपें वरनी न जाई ॥
सूरसुता घनश्यामवरन प्रफुल्लित रूप निकाई।॥। १॥
श्रीहरि गोपवधू द्विज सब श्रीगोकुलके लरकाई ॥
ब्रजाधीश प्रभु आदि भक्तनकों सकलसिद्धि सुखदाई ॥।२॥ | Ramkali |
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