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SPIRITUAL BENEFACTOR
VAISHNAVACHARYA HDH PUJYA GOSWAMI 108 SHRI VRAJRAJKUMARAJI MAHODAYASHRI




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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
|---|---|---|---|---|
Jaago jaago hoe gopal .. | जागो जागो हो गोपाल ॥
नाहिन अति सोईये भयो प्रात परम सुचि काल ॥१॥
फिर फिर जात निरख मुख छिन छिन सब गोपनके बाल ॥।
विन विकसत मानो कमलको श ते ज्यों मधुकरकी माल ।।२॥
जो तुम मोहिन पत्याउ सूरप्रभु सुन्दर स्याम तमाल ॥|
तो उठिये आपन अवलोकिये त्यज निद्रा नयन विशाल ॥। ३॥ | Jagayeve | NityaPad-022 | Bibhaas |
Praatasmein jaagi anuraagi sovatahu teeri sthaamjooke sangiya .... | प्रातसमें जागी अनुरागी सोवतहु तीरी स्थामजूके संगिया ॥॥
चीर संभारत उठिरी दक्षिन कर वाम भुजा फरकी भर अंगिया ॥१॥
भालमें सुहाग भारी छबी उपजत न्यारी पहरे कसुंभी सारी सोथे रंग मनिया ॥
अग्रस्वामी लाड लडाई बहुत कीनी बडाई फूली फूली फिरत अतिही सग मगिया ॥।२॥
| Jagayeve | NityaPad-022 | Bibhaas |
Praatasmein bhayo samliaho jaago .. gaay duhunakon bhajan | प्रातसमें भयो सांमलियाहो जागो ॥ गाय दुहुनकों भाजन
मांगो ॥ १॥ रविके उदय कमल प्रकासे ॥ भ्रमर उठ चले तमचर भासे ॥ २॥ गोप
वधू दथधि मंथन लागी ॥। हरिजूकी लीला रसपागी ॥|३॥ बिकसत कमल चलत
अति सेनी ॥| उठो गोपाल गुहूं तेरी बेनी ॥ परमानंददास मन भायो॥ चरण
कमल रजते क्षणपायो ॥५॥। | Jagayeve | NityaPad-022 | Bibhaas |
Jaag houn bal gaee mohan .. tere kaaran sthaam sunder naee murali laee .. | जाग हों बल गई मोहन ।। तेरे कारन स्थाम सुंदर नई मुरली लई ॥
ग्वाल बाल सब द्वार ठाडे बेर बनकी भई ॥|
गायनके सब बंद छूटे डगर बनकूं गई ॥२॥
पीत पट कर दूर मुखतें छांड दे अलसई ।।
अति आनंदित होत यशुमति देखि युति नित्य न ई ॥ ३॥।
जागो जंगम जीव पशु खग ओर द्वज सबई ।। सूरके प्रभु दरस दीजे होत आनंद मई ॥।
| Jagayeve | NityaPad-023 | Ramkali |
Mein jaanyo jaagi kanhai taate bashumati tere ghar aaee merey pichhvaare | में जान्यो जागि कन्हाई ताते बशुमति तेरे घर आई मेरे पिछवारे
वेसेई सुरनसों तिनहूमधुर मुरलि बजाई ॥।१॥ जनम सफल कर विनती चित्त धर
अपने कान्हकिन देहो जगाई | ले उछंग मोहनकों यशुमति आंगन ठाडी गोपी
मुख देखत हँसत रसिक बलजाई ॥२॥ | Jagayeve | NityaPad-023 | Bibhaas |
Bhor bhayo jagoho lalana kahaa tum ajahu rahey hoe soy .. | भोर भयो जागोहो ललना कहा तुम अजहू रहे हो सोय ॥
पीओ धार अपनी धोरीकी जासों देह बल होय ।॥।१॥ बेनी गुहूं देठं दृण अंजन
मीसबिंदुका मुख धोय ॥! हसत वदन सुख सदन निहानों नान्ही नान््ही दतियां
दोय ॥२॥ टेरत ग्वाल बाल खेलनकों गोरंभनहूं होय ।| द्रजजन सब ठाडी मुख
देखत अति आतुर सब कोय ॥३॥ उठ बैठे लए गोद यशोदा सुंदर सुत तिहं
लोय॥ रसिक प्रीतम लागे गरें जननीपें मांगत रोटी रोय ॥४॥। | Jagayeve | NityaPad-023 | Ramkali |
Praatsamay uthh chalhu nandan grih balram krishna mukh dekhiye |. | प्रातसमय उठ चलहू नंदन गृह बलराम कृष्ण मुख देखिये |।
आनंदमें दिन ज ाय सखीरी जन्म सुफल कर लेखिये ॥।१॥ प्रथम काल हरि
आनंदकारी पाछे भवन काज कीजिये ॥ रामकृष्ण पुन बनहिं जायगे चरण
कमल रज लीजिये ॥२॥ एक गोपिका ब्रजमें सयानी स्थाम महातम सोईजाने ॥।
परमानंद प्रभु बद्यपि बालक नारायण कर माने ॥।३॥॥ | Jagayeve | NityaPad-023 | Bibhaas |
Jagaave yashoda maiya jaago merey laalaa.. dathi mishree velabhar | जगावे यशोदा मैया जागो मेरे लाला।। दथि मिश्री वेलाभर
लाई उठोहो कलेऊ करोहो गोपाल ॥। १॥ गो दोहनकी भईहे बिरिया टेरत सखा
संगके ग्वाला ॥ आसकरनप्रभु मोहन नागर मुख देखन आईं वब्रजबाला ।।२॥ | Jagayeve | NityaPad-024 | Ramkali |
Jaagiye vrazarajkunwar kamal kosh phoole .. kumudini jiya | जागिये व्रज़राजकुंवर कमल कोश फूले ॥ कुमुदिनी जिय
सकुच रही भूृंगलता झूले ॥९॥ तमचर खग करत रोर बोलत बनराई ॥ रांभत
गौमधुर नाद वछ चपलताई ।।२॥ रवि प्रकाश विधु मलीन गावत ब्रजनारी ॥
सूर श्रीगोपाल उठे परम मंगलकारी ॥। ३॥। | Jagayeve | NityaPad-024 | Bilawal |
Cone purry nandlaalen baan .. praatasmein jaaganaki viriyaan | कोन परी नंदलालें बान ॥ प्रातसमें जागनकी विरियां
सोवतहें पीतांबर तान ॥१॥ मात यशोदा कबकी ठाडी ले ओदन भोजन घृत
सान ॥ उठो स्यथाम कलेऊ कीजे सुंदर वदन दिखाओ आन ॥२॥ संग सखा
सब द्वारें ठाडे मधुवन धेनु चरावन जान ॥| सूरदास अतिही अलसाने सोवतहें
अजहू निशिमान ॥।३॥। | Jagayeve | NityaPad-024 | Bilawal |
Mainhariki muratni bunn paaee .. suna yashumati sanga chhaand aapano | मैंहरिकी मुरत्नी बन पाई ॥ सुन यशुमति संग छांड आपनो
कुंवर जगाय देनहों आई ॥।१॥ सुन त्रिय बचन विहस उठ बैठे अंत्तरयामी कुंवर
कन्हाई ॥ मुरलीके संग हुती मेरी पहुंची दे राधे वृषभान दुहाई ॥२॥ में निहार
नीची नहीं देखी चलो संग दें ढोरे बताई ॥ बाढी प्रीति मदन मोहनसों घर बैठे
यशुमति बोहोराई ॥३॥ पायो परम भावतो जियको दोऊ पढे एक चतुराई ॥
परमानंददास जाहि बूझो जिन यह केलि जन ्म भरगाई ॥।४॥ | Jagayeve | NityaPad-024 | Ramkali |
Mukh dekhnahon aaee lalco kaal mukh dekh gaee dathibechan | मुख देखनहों आई लालको काल मुख देख गई दथिबेचन
जातही गयोहे विकाई ॥१॥ दिनते दूनों लाभ भयो घर काजर वछिया जाई ॥
आईहों धाय थंभाय साथकी मोहन देहो जगाई ॥२१॥। सुन प्रिया बचन विहस
उठ बैठे नागर निकट बुलाई ॥ परमानंद सयानी ग्वालिनी सेनसंकेत
बताई ।।३॥ | Jagayeve | NityaPad-024 | Ramkali |
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