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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Aarti vaarat radhika nagri..
आरती वारत राधिका नागरी।। तन कनकथार भूषणरत्नदीपक कियें कमलमुक्तावली मंगल उजागरी ॥|१॥| रुणित कटिमेखला सुभग घंटावली झालर शंख जेकरत उच्चागरी॥ अनुराग छत्र अंचल चमर नयन चलभाव कुसुमांजली चतुरगुण आगरी ॥ २॥ सखी यूथन लिये विविध भोजन 'किये सुखद गिरिवरधरन रिझबत सुहागरी ॥ विष्णुस्वामीपथ श्रीवल्लभपदपद्य नमत कृष्णदास बड़ भागरी॥३॥
Rajbhog Aarti
NityaPad-222
Saarang
Leeje beeri param udaar..
लीजे बीरी परम उदार।। लाई स्वच्छ समार मनोहर अति सुगंध सीतलता डार॥१॥ निरख निरख छबि मन आनंदे लीनी सुहस्त पसार ॥ सूर निरख नंद तन मन धन बारत मुक्ताहार ॥२॥
Useer Beeri
NityaPad-222
Saarang
Tum jaavo jaavau beeri kaun pai maiya. kaba key curry anchavan
तुम जावो जावौ बीरी कौन पै मैया। कब के करि अँचवन मांगत हैं हलधर कुँवर कन्हैया ।। इतनौ बोल सुनत उठि धायौ श्रीदामा भरि झोरी॥ ग्वालन के मंडल मधि नायक हरि-हलधर की जोरी।॥ दीनौ बॉँटि सबनि अपने कर हँसि हँसि पान चबावै।। अब सब चले दानघाटी 'परमानंद' दान चुकावै॥
Useer Beeri
NityaPad-222
Saarang
Raniju karat singar aarti..
रानीजू करत सिंगार आरती॥ नखसिरत्र अंग अंग छबि अनुपम निरख नैन पलक नहीं पारती ॥१॥ कनक कुसुम अरु मनिगन मुक्‍ता ले बार कुंवरपर डारती॥ विचित्र जसोदा दुग चकोर हरिमुखविधु वारवार निहारती॥।२॥
Rajbhog Aarti
NityaPad-222
Saarang
Aarti gropikaraman giridharanaki nirakh bavrajayuvati anandbhini.!
आरती ग्रोपिकारमण गिरिधरनकी निरख बव्रजयुव॒ति आनंदभीनी।! मणि खचित थार घनसार वाती बरें ललित ललितादि सख्ती हाथलीनी ॥ १॥ बिहरत श्रीकुंज सुखपुंज पियसंग मिल विविध भोजन किये रुचि नवीनी || प्रकट परमानंद नवल विट्वलनाथदास गोपाल लघु कृपाकीनी ॥।२॥।
Rajbhog Aarti
NityaPad-222
Saarang
Aarti karat yasoda pramudit phooli anga naan samaat..
आरती करत यसोदा प्रमुदित फूली अंग न समात॥ बलबल कहि दुलरावत आनंदमग्न भई पुलकात ॥१॥ कनक थार रत्नदीपावली चित्रत घृत भीनी बात॥। कलि सिंदूर दूब दि अक्षत तिलक करत बहु भांत ॥ २॥ अन्न चतुर्विध विविध भोग दुंदु भी वाजत बहुजात ॥ नाचत गोप कुंकुमा छिरकत देत अखिल नगदात ।। ३ ॥ वरखत कुसम निकर सुर नर मुनि ब्रजयुवती मुसकात।। कृष्णदास प्रभु गिरिधरको श्रीमुख निरख लजत शशिकांत।।४॥
Rajbhog Aarti
NityaPad-222
Saarang
Aeye munn maan merey kahyo kaahe koo risani pyaari tuu. pratham ree
ए मन मान मेरे कह्यो काहे को रिसानी प्यारी तू। प्रथम री भैरो गुन जन गाइये याही ते सुघराई होतु॥१॥ मालकोस की तानन ले-ले राजत रूप बिहाग॥। 'द्वारकेस' प्रभु बसंत खिलावत याही तैं बढत सुहाग ।२॥।
Mala
NityaPad-223
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Mohan madan gopal kii aarti.
मोहन मदन गोपाल की आरती। आरती और न जाऊं लाल हों तुम पर सर्वस्व॒ वारती ॥१॥ घंटा ताल मूदंग झालरी, बेनु रवाव बजावति॥ कृष्णदास रस भरी राधिका रहे इकटक कबहु आपुनयो संभारती॥२॥
Rajbhog Aarti
NityaPad-223
Saarang
Bhor bhayo jaage jaam laal hoe abb ramkali udey bhayobhan...
भोर भयो जागे जाम लाल हो अब रामकली उदे भयोभान॥। गुन की कली गुन पूरनप्यारी कहा अब होत देव गान ॥१॥ भयो बिभास आभास सब देखियत बलि-बलि जाउं तू सुनि लेरी कान ।। आस न करि तू अपुने प्रीतम की सोरठ समजि ले भन ही मन आन ॥॥२॥ सारंग नाम जाको ताके पास जाय आली सो नट भयो कहा करे अभिमान ॥ चितवति चित पूरव मुख बेठी मधुमाध मद भयो तोकूं आन ॥३॥ ये क्रोध भयो गोरी कोन गुनन ते ए मन कहा करों कहा कहूं आन ॥ केदारुन दुःख मिट गयो कान्हर तेरो जीवन प्रान ॥४॥ रेन बिहाय गई प्यारी पिय पास गई मदनमोहन पिय अति ही सुजान।॥। चलत हिंडोल अंकमाल सोभा बन ठन हरिदास ' के स्वामी स्यामा कुंज बिहारी ललित चरन चित धरु ध्यान ॥५॥
Mala
NityaPad-223
Bhairav
Sanga trian bunn mein khelat
संग त्रियन बन में खेलत रविजा-तट मुरलीधर मध्य रास नुत्यकला गुननिधान ॥ सप्त सुरन तीन ग्राम बजाय लिये आरोही-अबरोही धरन मुरन सम प्रमान ॥१॥ प्रथम राग भेरव गाइये मन मोह लिये चलतें अचल भये अचल तें चल भये ॥| मालकोस की तान ले ले बान बेधत प्रान राग हिंडोल मन कलोल मीठे बोल लेत मन मोल |। २।! मेघ ज्यों बरखत रस बुंदनि घुमडि बिरहिनि के मन हरे उमड ।॥। श्रीराग गावत नेन नचावत सोरठ गाइए हो सुंदर स्थाम धुनि सुनि जागत तन मन काम ।। ३॥। नवल केदारो गावत राग छेत सुलप गति सुघर सुजान ॥ ब्रजाधीस प्रभु सरद रेन सुख विलास मदनमोहन पर वारों तन मन प्रान ॥४।॥
Mala
NityaPad-223
Bhairav
Lalit vrajadesh giriraj raaje .. ghosh seemantini sanga girivar
ललित व्रजदेश गिरिराज राजे ॥ घोष सीमंतिनी संग गिरिवर धरन करत नित फले तहां काम लाजे ॥१॥ त्रिविध पवन संचरे सुखद झरणा झरे, छूलित सोरभ सरस मधुप भ्राजे | ललित तरु फूल फूल फूलित खट ऋतु सदा, चत्रभुजदास गिरिधर समाजे ॥।२॥
Mala
NityaPad-224
Bhairav
Sundarmukhaki houn balbal jaauun ..
सुंदरमुखकी हों बलबल जाऊं ॥ लावण्यनिधि गुणनिधि शोभानिधि देखदेख जीवत सब गाऊं ॥१॥ अंगअंगप्रति अमितमाधुरी प्रकट रुचिर ठांई ठाऊं।॥ तामे मूदु मुसकाय हरत मन न्‍्यायकहत कवि मोहन नाऊं।। २॥ सखा अंसपर वाम बाहुदिये या छबिपैं बिनमोल बिकाऊं ॥ परमानंद नंदनंदनकोंनिरख निरख उर नयन सिराऊं ॥३॥
Rajbhog Darshan
NityaPad-224
Saarang

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