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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Merey pachhakanso mug jhaaru ..
मेरे पछकनसो मग झारु ॥ या मग में प्यारो मेरो आवत हे तन मन जोबन वारु )।१॥ सेज सँवारु चमर ढुरावुं मधुर स्वर गाउं ।। रसिक प्रीतम पिय जो मिले मोहे हंस हंस कंठ लगाउं
Palkan Bhaavna
NityaPad-224
Kafi
Myrie chhaal aaj ayeri merey mahal tunn munn dhana sub baaru ..2..
माइरी छाल आज आयेरी मेरे महल तन मन धन सब बारु ॥२॥ हों बल गईं सस्त्री आजकी आवनको पलकनसों मग झारु ॥ १॥ अति सुकुमार पद करन कंकर गुन सब टारुं ॥ नंददास प्रभु नंदनंदनसों एसी प्रीत नित धारुं ॥२॥
Palkan Bhaavna
NityaPad-224
Saarang
Sirdhare pakhauja morke..
सिरधरे पखौजा मोरके।। गुंजाफछ फूलनके लटकन शोभित नंदकिशोरके ॥१॥ ग्वाल-मंडलीमध्यविराजत कौतुक माखनचोरके ॥| नाचत गावत वेणु बजावत अंस भुजा सखा औरके ॥२॥ तैंसेई फरहरात रंग भीने छबि पीतांबर छोरके ॥ परमानंददासको ठाकुर मन हरत नयनकी कोरके ॥३॥
Rajbhog Darshan
NityaPad-224
Saarang
Saranganayaniri kaheko kiyo eto maan ..
सारंगनयनीरी काहेको कियो एतो मान ॥ गोरी गहरु छांड मिल छालहिं मनक्रमवचन यातें होत कल्यान ॥॥|१॥ जिन हठ कररी तू नटनागरसों भेरोंही देनगान॥ मुरली तान कान्हरो गावत सुनलेरी कान ॥ २॥ रंगरंगीली सुघरनायकी तू जियमें अडान॥ नंददास केदारों करिकें योही विहाय गयो मान ॥३॥
Mala
NityaPad-224
Bhairav
Anandsindhu badhyo hari tanamen .. radhamukh pooranshashi nirakhat
आनंदसिंधु बढ््यो हरि तनमें ॥ राधामुख पूरणशशि निरखत उमग चल्यो ब्रज बूंदावन में ॥।१॥| इत रोक्‍्यो यमुना उत गोपिन कछु एक फैल पर्‌यो त्रिभुवनमें । नापरस्यो करमठ अरुग्यानी अटक रहो रसिकन के मनमें || २॥। मंदमंद अवगाहत बुद्धि बलभक्त हेत लीला छिनछिनमें ॥ कछु एक लझ्यो नंदसूनू कृपातें सो देखियत परमानंदजनमें ॥३॥
Rajbhog Darshan
NityaPad-225
Saarang
Giridhar dekhehinsukhhoy ..
गिरिधर देखेहींसुखहोय ॥ नयनवंतको यही परम फल येही विधि मोहे त्रैलोय ॥१॥ महामरकतमणि नीलअंबुजको रूपलियो है निचोय ॥ कृष्णदासनि नाथ नवरंग मिलेहें विरह॒ दुखखोय ॥२॥
Rajbhog Darshan
NityaPad-225
Saarang
Nandanandan navalkunwar
नंदनंदन नवलकुंवर ब्रजवर सौभाग्यसीम वदनरूप निरखत सखा नयनन मन हरतरी ॥ स्यामएवेत अतिप्रवीण बंक चपल चितवनी मानों शरदकमल ऊपरखंजन द्वै लरतरी ॥१॥॥ अलकाबवलि मधुप पात अंगअंग छबि कहिन जात निरख सुंदरवदन मदन कोटि पांय परतरी ॥ कुंभनदासप्रभु गिरिधरस्थाम रूपमोहनी दिव भू पाताल युवती सहजें वश करतरी ॥ २॥
Rajbhog Darshan
NityaPad-225
Saarang
Aisee preeti kahoon naheen dekhi ..
ऐसी प्रीति कहूं नहीं देखी ।। यशुमति सुत श्रीवह्ठभसुत जैसी शेष सहख्रमुख जात नलेखी ॥।१॥ आज्ञामांग चले श्रीगोकुल फिरफिर झांक झरोखन पेखी ।। सुनियत कथा जलदचातककी कुमुदिनि चंद्रचकोर विषेखी ॥२॥ इनको कियो सरब्ब जिय भावत करत श्रुंगार विचित्र विषेखी ॥ गोविंदगोवर्धनपें मांगत बिछुरो पलछिन अर्द्धनममेखी ।। ३।।
Rajbhog Darshan
NityaPad-225
Saarang
Taadinate mohi adhik chatpati ..
तादिनते मोहि अधिक चटपटी ॥ जादिनते देखे इन नयनन गिरिधर बांधे माई पाग छूटपटी ॥॥१॥ चलेरी जात मुसकात मनोहर हँसजो कही एक बात अटपटी ॥ होंसुन श्रवणन भई अतिव्याकुल परीजो हृदय में मदन सटपटी ॥।२॥ कहारी करुं गुरुजन भये बैरी बैर परे मोसों करत खटपटी।॥ परमानंदप्रभु रूप विमोही नंदनंदनसो प्रीति अतिजटी ॥३॥
Rajbhog Darshan
NityaPad-225
Saarang
Nayanan lagiho chatpati ..
नयनन लागीहो चटपटी ॥ मदनमोहनपिय निकसे द्रवारहबे शोभित पाग लटपटी॥१॥ दूरजाय फिर चितयेरी मो तन नयन कमल मनोहर भूकुटी ॥ गोविंदप्रभुपिय चलत ललित गति कछुक सखा अपनी गटी ॥२॥
Rajbhog Darshan
NityaPad-225
Saarang
Chitbat rahat sadaa gokul tunn .. warwar khirki haye
चितबत रहत सदा गोकुल तन ॥ वारवार खिरकी हे झांकत अति आतुर पुलकित तन ॥१॥ नम्न सखा सुख संगही चाहत भरत कमलदल लोचन ॥ ताही समय मिलेरी गोविंदप्रभु कु बर विरह दुःखमोचन ॥। २ ॥
Rajbhog Darshan
NityaPad-226
Saarang
Dekho dharkan nava rung pagki ..
देखो ढरकन नव रंग पागकी ॥ वामभाग वृषभान लाडिली चितवन अति अनुराग की ॥ १॥ सुखसागर गिरिधरन छबीलो मूरति परम सुहागकी ॥ मदनमोहन राधेजूकी जोरी गोपालदासके भागकी ॥२॥|
Rajbhog Darshan
NityaPad-226
Saarang

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