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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Suva padhawat sarang nayani .. badan sanket | सुवा पढावत सारंग नयनी ॥ बदन संकेत
लालगिरिधरसों गरजत गुप ्त निकट मत केनी ॥॥१९॥ अहो कीर तुम नीलबरण
तन नेक चितें मन बुद्धि हरलेनी ॥ होत अवेर जात दिन वन गृह हम तुम भेट
होयगी गेनी ॥२॥ जब लग तुम जो सिधारो सघनबनहों जुगई यमुनाजल
लेनी ॥ परमानंद लालगिरिधरसो मृूदु मृदुबचचन कहत पिकबैनी ॥॥३॥ | Rajbhog Darshan | NityaPad-226 | Saarang |
Tein kachhu ghaliri thagori piyapar | तें कछु घालीरी ठगोरी पियपर
प्यारी ॥ निशदिन तुही तुही जपत प्राणपति तेरी एरीसों लालन गिरिवरधारी ॥ १॥
समर बेग आवे स्वरूप तब सुधि न कछू तनकी बिहारी ॥ रसना रटत तुबनाम
राधे राधे गोविंद प्रभु पिय ध्यानसो भरत अंकवारी ॥२॥ | Rajbhog Darshan | NityaPad-226 | Saarang |
Hoe neeke jaantari alitere hadayaki sub baat .. sakal | हो नीके जानतरी आलीतेरे हदयकी सब बात ॥ सकल
घोषयुवतिनको सर्वस्व तेही हर्योरी आली सांवरेगात ॥१॥ जाको कार्य सिद्ध
करत विधाता ताहि नकाहूकी परवा है री माईंकहीरहो कोऊ पांच सात ॥
गोर्विदप्रभु निधिनीको धन पायो तेही छिपायो मोसो कित दुरत हैरी जोतू डार
डार तोहों पातपात ॥२॥ | Rajbhog Darshan | NityaPad-226 | Saarang |
Abaheeten yeh dhota chita chorat aagein aagein | अबहीतें यह ढोटा चित चोरत आगें आगें
कह ा करोगे ॥ नेक बडे बलहोउ बलजाऊं त्रिभुवन युवतिन के मनजु हरोगे ॥ १॥
देखनके नहेनेसे उरमें सप्तद्वीप नव्खंड रानी यशुमतिको दिखायोहै सोई सांची
अनसरोगे ॥ गोरविंदप्रभुके जु नवनबैन रस सींचत मेरे जाने मनमथस्से लरोगे ॥२॥। | Rajbhog Darshan | NityaPad-226 | Saarang |
Kahajo bhayo mukhmore kachhu kahuju kahyo .. rasik sujan ladillo lalan | कहाजो भयो मुखमोरे कछु काहूजू कह्यो ॥ रसिक सुजान लाडिलो ललन
मेरी आँखियनमांझ रहो ॥१॥ अब कछू बात फैलपरी दिये प्रेम जामन भयोहै
दूधते दह्यो ॥ त्रैलोक अतिही सुजान सुंदर सर्वस्व हर्यो गोविंदप्रभु जु लह्दों ॥ २॥ | Rajbhog Darshan | NityaPad-226 | Saarang |
Poochhat janani kahaan | पूछत जननी कहां
ते आये । आज गयो श्रीवल्लभके घर बहोतक लाड लडाये ॥१॥ विविध
भांति पट भूषन ले ले सरस सिंगार बनाये। शीश पाग सिरपेच जु बांधे
मोरचन्द्रिका लाये ॥२॥ बहोत भांति पकवान मिठाई विंजन सरस बनाये ।
पायस आदि समर्पे मोहि मेरी लीला गाये ॥३॥ प्रेम सहित बललभमुख निरखत
और न कछु सुहाए । रसिक प्रीतम जु कहत जननी सों आज अधिक सुख
पाये।।४॥ | Rajbhog Darshan | NityaPad-227 | Saarang |
Tum sanga khelat ler gaee toot .. | तुम संग खेलत लर गई टूट ॥
रहो ढोटा तुम खरेई अचगरे मेरो लियो कर सूट ॥॥१॥
योंरिसाय कहतहों तुमसों वचन रहितही घूट ॥
अबही नई पहरहों आई चुरियां गई सब फूट ॥२॥
यह विनोद नीको करपायो मानों पसरी लूट ॥
परमानंदप्रभु जब बीनूंगी तबही करूंगी कूट ॥३।॥| | Rajbhog Darshan | NityaPad-227 | Saarang |
Ghee abke pheri leeje hoe sugharrai vahee taana .. saras madhur | घी अबके फेरि लीजे हो सुघरराय वही तान ॥ सरस मधुर
नीकि चोखपरी है तामें तानबंधान ।॥९॥ अवघर सरस बिकट गिरिधरपिय
तुमहीपें बनि आवे मोहि तिहारी आन ॥ गोविंदप्रभु प्रिययसिकशिरोमणि
मदनमोहन पिय अतिहि सुजान ॥२॥ | Rajbhog Darshan | NityaPad-227 | Saarang |
Kahaa kahon laal sughar rung rakhyon murali | कहा कहों लाल सुघर रंग राख्यों मुरली
में॥ तान बंधान स्वर भेदलेत अतिजत विचविचमिलवत विकट अवघर ॥१॥।
चोख माखनीकी रेख तामें गायन मिलवत लांबेलांबे स्वर ॥ बिचबिच
लेत तिहारों भाम सुनरी सयानी गोविंदप्रभु ब्रजरानी के कुंवर ॥२॥ | Rajbhog Darshan | NityaPad-227 | Saarang |
Bhalei merey aayeho piya teak dupahareeki biriyaan .. shubhdin | भलेई मेरे आयेहो पिय टीक दुपहरीकी बिरियां ॥ शुभदिन
शुभ नक्षत्र शु भमहूरत शुभपलछिन शुभघरियां ॥१॥ भयोहै आनंदकंद मिट्यो
बिरहदुःखटंद चंदनघस अंगलेपन और पायन परियां ॥ तानसेन के प्रभु मया
कीनी मोपर सूखीवेल करी हरियां ।॥२॥ | Rajbhog Darshan | NityaPad-227 | Saarang |
Balbal houn kunwari radhika nandasuban jaason | बलबल हों कुंवरी राधिका नंदसुबन जासों
रति मानी ॥ वे अति चतुर तुम चतुर सिरोमनि प्रीत करी केसे रही छानी ॥१॥।
बेनु धरत हे कनक पीतपट सो तेरे अंतरगत ठानी ॥ पुन श्याम सहज तुम रन शयामा अम्बर मिस अपने उर आनी ॥२॥ पुलकित अंग अबही व्हे आयो
निरख सखी निज देह सयानी ॥ सूर सुजान सखी को बूझे प्रेम प्रकास भयो
बिकसानी ॥३॥ | Rajbhog Darshan | NityaPad-227 | Aasawari |
Tum merrie motin ler | तुम मेरी मोतिन लर
क्यों तोरी ॥ रहो ढोटा तू नंदमहरकों करन कहत कहा जोरी ॥१॥ मैं जान्यो
मेरी गेंद चुराई ले कंचुकीविच होरी ॥ परमानंद मुसकायचली तब पूरणचंद
चकोरी ॥२॥ | Rajbhog Darshan | NityaPad-227 | Saarang |
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