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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Chalo kinn dekhan kunj kutee .. | चलो किन देखन कुंज कुटी ॥
मदन गोपाल जहां मध्यनायक मन्मथ फौजलु टी ॥॥१॥
सुरत समर में लरत सखीकी मुक्तामाल टुटी ॥
उरजतेंजु कंचुकी चुरकुट भई कटीपट ग्रंथिछुटी ॥२॥
रसिकशिरोमणि सूरनंदसुत दीनी अधर घुटी ॥
परमानंद गोविंदग्वालिन की नीकी जोट जुटी ॥३॥ | Rajbhoj Kunj | NityaPad-228 | Saarang |
Bunny radha | बनी राधा
गिरिधर की जोरी ॥ मनहु परस्पर कोटि मदन रति की सुन्दरता चोरी ॥१॥
नूतन श्याम नंद नंदन वृखभानसुता नव गोरी ॥ मनहू परिमल बदन चंद
को पीवत चकोर चकोरी ॥२॥ कुम्भनदास प्रभु रसिकलाल बहुं विधि
रसिकनी निहोरी । मनहु परस्पर रंग बढ़यो अतिकि उपजी प्रीत न थोरी ॥३॥ | Rajbhog Darshan | NityaPad-228 | Saarang |
Chalo sakhee kunj gopal jahaan .. terison madanmohanpein chala lejaaun tahaan ..1.. | चलो सखी कुंज गोपाल जहां ॥ तेरीसों मदनमोहनपें चल लेजाऊं तहां ॥१॥
आछे कुसुम मंदमलयानिल तरु कदंबकी छांह ॥
तहां निवास कियों नंदनंदन चित तेरे मन मांह ॥२॥
ऐसीरी बात सुनत ब्रजसुंदर तोहि रह्मो क्यों भावे ॥
परमानंदस्वामी मनमोहन भाग्य बडेते पावे | ३॥ | Rajbhoj Kunj | NityaPad-228 | Saarang |
Aaj laal rasbhare nikunj mandir mein baithe pyarisang || | आज लाल रसभरे निकुंज मंदिर में बैठे प्यारीसंग ||
करत मद न केलि सुखसिंधु रह्मो झेल कंठ भुजनभुज मेल गावत सुघर दोऊ तान तरंग ॥।१॥
कहारी करोंगे भांवर कुसुमन गूँथी बेनी सीस फूल गजमोती खसितमंग |
गोविंदप्रभु चित्रकरत प्यारी के उरपर स्वेद अति वेपथ सकल अंग ॥२॥ | Rajbhoj Kunj | NityaPad-228 | Saarang |
Yaatein bhawat madangopale .. sarang raag saras alapan sughar | यातें भावत मदनगोपाले ॥ सारंग राग सरस अलापन सुघर
मिलन ताले ॥१॥ अतीत अनागत ओघर आनत सप्तक कंठ मराले ॥ गावत
अलापत सुलप संचु मिलवतें किंकिनी कुंजित जाले ॥ कुम्भनदास प्रभु रसिक
'सिरोमन सोहत रति पति वाले ॥ गावत हसतक भेद दिखावति गोवर्द्धन धर
लाले ॥२॥ | Rajbhog Darshan | NityaPad-228 | Saarang |
Badan saroj upar madhupawal maano | बदन सरोज उपर मधुपावल मानो
फिर आइ हो ॥ कुंचित कच बिच बिच चंपकली उरझाई हो ॥१॥ लाल के
नेन कृपा रंगभरे सुन्दर भ्रू भाई हो ॥ मकर कुंडल प्रति बिंबल श्याम कपोलन
झांई ॥२॥ लाल के मनि कौस्तुभ कंठ लसे हिरदे बनमाल रुराई हो ॥ सुन्दर
सब अंग अंग गोविन्द बलबल जाई हो ॥३॥ | Rajbhog Darshan | NityaPad-228 | Aasawari |
Kunwar baithe pyaareeke sanga angang bharey rung balbal bal tribhangi yuvatin sukhdai .| | कुंवर बैठे प्यारीके संग अंगअंग भरे रंग बलबल बल त्रिभंगी युवतिन सुखदाई ।|
ललित गति विलास हास दंपतिअतिमन हुलास विगलित कच सुखदाई ॥
सुमनवास स्फटित कुसुम निकर तैसीई शरद रैन जुन्हाई ॥१॥
नव निकुंज भ्रमरगुंज कोकिला कलकूजत पुंज
सीतलसुगंध मंद बहत पवन सुखदाई ॥।
गोविंदप्रभु सरस जोरी नवकिशोर और नवकिशोरी निरख मदनफौज मारी छैलछबीले नवलकुंवर व्रजकुल मणिराई ॥२॥ | Rajbhoj Kunj | NityaPad-229 | Saarang |
Baithe hari radha sanga kunjabhavan apane rung karmurli adhar dharey sarang mukh gaaee ..| | बैठे हरि राधा संग कुंजभवन अपने रंग करमुरली अधर धरे सारंग मुख गाई ॥|
मोहन अतिही सुजान परम चतुर गुणनिधानजानबूझ एक तान चूककें बजाई ॥।१॥
प्यारी जब गद्मो बीन सकल कलागुणप ्रवीण अतिनवीन रूपसहित वही तान सुनाई ॥
वल्लभ गिरिधरनलाल रिझदई अंकमाल कहत भलें भलें लाल सुंदर सुखदाई ॥२॥। | Rajbhoj Kunj | NityaPad-229 | Saarang |
Neck kunj kripa curr aaiye .. | नेक कुंज कृपा कर आइये ॥
अतिही मान कर रही किशोरी कर मनुहार मनाइये ॥१॥
कर कपोलते छूटत नहीं क्यों हूं अतिउसास तन पाइये ॥
मेचक वलित ललितमुख जहां तहां सुहस्त संवार बनाइये ॥।२॥
यामें कहा गाँठको लागे जो बातन सचु पाइये ॥
झूठेई आदर करत किशोरी सूर यह यश गाइये ॥३॥ | Rajbhoj Kunj | NityaPad-229 | Saarang |
Kunjamen viharat yugal | कुंजमें विहरत युगल
किशोर॥ यह अचंभों देख सखीरी उग्यों चंद विनभोर ॥९॥ तहां घनस्याम
दामिनी राजत द्वैशशि चार चकोर ॥ अंबुज खंजन मीन मधुपमिल क्रीडत
एकहि ठोर ॥२॥ तहां द्रै कीर बिंब फल चाखत विद्गुम मुक्ता जोर ॥ बार
मुकर आनन पर झलकत नाचत सीस न मोर।। ३॥। तामें अधिक अधिकतामहिया
वीस कमल इक ठौर ॥ हेमणिलालताही द्वैफल मान देत अकोर ॥४॥ कनक
लता पर नीलमणि राजत उपमा कहा कहूं कछू छोर ॥ सूरदासप्रभु यह विधि
क्रीडत ब्रजजुवतिनके चितचोर ॥५॥ | Rajbhoj Kunj | NityaPad-229 | Saarang |
Aajki baanik kahee najaay baithe nicus kunjdwar .. | आजकी बानिक कही नजाय बैठे निकस कुंजद्वार ॥
लटपटी पाग सिर सिधिल चिहुर चारु खसित वरुहाचंदरस भरे ब्रज़राजकुमार ॥।१॥
श्रमजल बिंदुकपोल विराजत मानों ओस कण नीलकमलपर ॥
गोविंद प्रभु लाडिलो ललन वर कहा कहो अंग अंग सुंदरवर ॥२॥ | Rajbhoj Kunj | NityaPad-229 | Saarang |
Birajat neeki kunj kutee .. madanmohan radha soun mill tahaan | बिराजत नीकी कुंज कुटी ।। मदनमोहन राधा सों मिल तहां
रस बरजोर जुटी ॥१॥ मगन भये मन मगन मानों भवलीला सुरती ठटी ॥
कृष्णदास प्रभु की छबि निरखत गिरधर रस लपटी ॥२॥ | Rajbhoj Kunj | NityaPad-230 | Saarang |
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