top of page
Kirtan Title
Kirtan
Category
Book-Page#
Raag
Aaj vrindavipin kunj adbhut
आज वृन्दाविपिन कुँज अद्भुत नई।। परम शीतल सुखद स्याम सोभित तहां माधुरी मधुर और पीत फूलन छई॥।१॥ विविध कंदली खंभ झूमका झुक रहे मधुप गुंजार सुर कोकिला धुनि ठई ॥ तहां राजत श्रीवृषभान की लाडिली मनो हो घनश्याम ढिंग उलही सोभा नई ॥२॥ तरनी तनया तीर धीर समीर जहां सुनत ब्रजबधू अति होय हरखित भई ॥ नंददासनी नाथ और छबि को कहे सोभा नैन पंगुगति व्है गई ॥३॥
Rajbhoj Kunj
NityaPad-230
Saarang
Neeki baanik naval nikunjki ..
नीकी बानिक नवल निकुंजकी ॥ वरण वरण प्रफुल्लित द्रम वेली मधुमाते अलिगुंजकी॥१॥ करत विहार तहां पिय प्यारी संपति आनंद पुंजकी ॥ परमानंदप्रभुकी छबि निरखत मनमथ मनसालुंजकी ॥२॥
Rajbhoj Kunj
NityaPad-230
Saarang
Aachhe baney dekho madangopal... bahut phoolphoole nandanandan tumko
आछे बने देखो मदनगोपाल।॥ बहुत फूलफूले नंदनंदन तुमको गूथोंगी माल ॥१॥ आये बैठे तरुवर की छैयां अंबुजनयन विशाल ॥ नेक वियार करूं अंचलसों पाय पलोटोंगी बाल ॥२॥ आछे तब राधा माधोंसों बोलत वचन रसाल ॥ परमानंदप्रभु यहां रहो ब्रजते और न चाल ॥३॥
Rajbhoj Kunj
NityaPad-230
Saarang
Shobhit nava kunjanki chhabi bhaari ..
शोभित नव कुंजनकी छबि भारी ॥ अद्भुतरूप तमालसो लपटी कनकवेली सुकुमारी॥१॥ बदन सरोज डहडहे लोचन निरख छबि सुखकारी ॥ परमानंदप्रभु मत्तमधुपहैं श्रीवृषभानसुता फुलवारी ॥२॥
Rajbhoj Kunj
NityaPad-230
Saarang
Kunjan maanjh birajat mohan, radhika sunder sthaam kii jory .. tese yeye sunder
कुंजन मांझ बिराजत मोहन, राधिका सुंदर स्थाम की जोरी ॥ तेसे ये सुन्दर स्थाम अनुपम तेसीहे सुन्दर राधेजु गोरी ॥।॥९॥ गोपी ग्वाल सखा संग लीने मधुर मुरली स्वर बाजत थोरी ॥ सूरदास प्रभु मदनमोहन पिय चिरजीयो नवल किशोर नवलकिशोरी ॥२॥
Rajbhoj Kunj
NityaPad-230
Saarang
Aaj nava kunjanki atishobha..
आज नव कुंजनकी अतिशोभा॥ करत विहार तहां पियप्यारी निरख नयन मन लोभा ॥|१॥| रूपबरि सींचत निजजनकों उठत प्रेमकी गोभा।॥ परमानंदप्रभुजी चितवनी लागत चितको चोभा॥२॥
Rajbhoj Kunj
NityaPad-230
Saarang
Laalan baithe kunjasthali kusumit vanaparimal aamod
लालन बैठे कुंजस्थली कुसुमित वनपरिमल आमोद तहां कूजत कोकिला रहे रसमत्त अली ॥१॥ कुबलयदल कोमल शब्या रची मूदुल सुहस्त वेणीग्रथित चंपकली ॥ गोविंदप्रभु दंपति जु परस्पर रहे रसमत्त रली॥२॥
Maankunj
NityaPad-231
Saarang
Piya joe karat manuhari saprajh dekhari piyapyari ..
पिय जो करत मनुहारी सप्रझ देखरी पियप्यारी ॥ कुंजके द्वार कबके ठाढेहें मममोहन ललनए तू खरी निठुर वृषभानदुलारी ॥१॥ अलक सवारनके मिस भामिनि हेरत पियतन नयनविहारी ॥। गोविंदप्रभु रूपदेख पियाको सुखभयो तन दृष्टिसो भरत अंकवारी ॥२॥
Maankunj
NityaPad-231
Saarang
Jaahi tunn munn dhana deeje aalee taason rusno kaise bunny aave ..|
जाहि तन मन धन दीजे आली तासों रूसनो कैसे बनि आवे ॥| घोष नृपति सुत एते पर बहु नायक ताते कहतहों समुझ चितें अनखन कैसे पिय पाते । नवलनिकुंज नवलबैठे ताते हों पठई ऐसो समयो तोहिसी बडभागिन पावे ॥ सोईतो विचित्रगुण रूप त्रियाजो गोविंदप्रभुको रिझावे ॥ १॥
Maankunj
NityaPad-231
Saarang
Joe tuu abki bair bunn jaay .. nandanandan koo neeke dekhe tunn munn nain siraay ..1...
जो तू अबकी बेर बन जाय ॥ नंदनंदन को नीके देखे तन मन नैन सिराय ॥१॥। बैठे कुंज महल में मोहन सुन्दर रूप सुहाय ॥| परमानन्ददास को ठाकुर हँसि भेटेंगें धाय ॥२॥
Rajbhoj Kunj
NityaPad-231
Saarang
Aalee kunjabhavan baithe vrajraj suban bolat mukharsik kunwar tuu chala pranpiyari ..
आली कुंजभवन बैठे व्रजराज सुबन बोलत मुखरसिक कुंवर तू चल प्राणपियारी ॥ तेरेहित लोभीलाल उठ चल भर अंक माल विरह रसाल छांड प्यारी तोऊपरहों वारी ॥१॥ छांड मान करशुंगार दर्पणले मुखनिहारकोटि काम डारो वार पहिरें नीलसारी ॥ गोविंदप्रभु रसरंगरेल कंठ भुजा अंसमेल वश करी गिरिधारी ॥२॥
Maankunj
NityaPad-231
Saarang
Chitey maskani hoe vushbhan dulari ..
चिते मसकानी हो वुषभान दुलारी ॥ खसत मुरलीकर नंदनंदनके लियौहै लालमनुहारी ॥१॥| गजगति चाल चलत ब्रजसुंदर लटकत स्यथामरस मत्तपियारी ॥ कटि किंकिणी उर हार तरलताटंक अलक घुंघरारी ॥२॥ देख विवश भये मदनमोहन पिय चंपकतन बनी नीलसारी ॥ आकोभर मिलीरी नवल नागरसूं गोविंदजन बलहारी॥३॥।
Maankunj
NityaPad-231
Saarang

© 2026 All rights reserved. Vaishnav Samaj of RTP, DBA - Krishnadham-VYO 

bottom of page