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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Kunjan maanjh birajat mohan, radhika sunder shyam kii jory .. | कुंजन मांझ बिराजत मोहन, राधिका सुन्दर श्याम की जो री ॥
तेसे ये सुंदर श्याम अनुपम तेसीहे सुंदरराधेजु गोरी ॥१॥
गोपी ग्वाल सखा संग लीने मधुर मुरली स्वर बाजत थोरी ॥
सूरदास प्रभु मदनमोहन पिय चिरजीयो नवल किशोर नवल किशोरी ॥२॥ | Rajbhoj Kunj | NityaPad-231 | Saarang |
Shyam juko sthaam manawat aaye . | श्याम जुको स्थाम मनावत आये ।
सनमुख व्हेके छुबावत मुकुटकी परछांये ॥१॥ इन दर्पन ले वे नाना करत हें
छबिसों धसिके आये। सुरस्याम वृन्दावन जीवन छलसों हां हां खाये ॥२॥ | Maankunj | NityaPad-232 | Saarang |
Praat uthat urr anand bharaken peeje jamuna jall nirmal .. | प्रात उठत उर आनंद भरकें पीजे जमुना जल निर्मल ॥
पानपरसत अंग अंग मिटे आरत सनमुख होत रसना रस निश्चल ॥१॥
गोपीजनव्रजवास धर्मकुल दैवीजन सब आवत हें चल ।।
रहत नहीं दोष सुमरे लक्ष्मण सुतसब सुख वास चरण दृढके बल ॥२॥
त्रिविध ताप मेटनके साधन ए लपटनों चंदन कर सीतल ॥
परमानंद तमाल वललभकी हम पर रहो छाया अति सीतल॥३॥ | Akshay Tritya | NityaPad-232 | Saarang |
Chali sakhitra ! sthaam sunder tonhi bolat . | चलि सखित्र ! स्थाम सुंदर तोंहि बोलत ।
कुंज-महल में बैठे मोहन तेरी रूप उर तोलत।।
तो-विनु कछुन सुहात है लालहिं तू कत गहरू लगाव ॥
मेरे कहें वेग चलि भामिनि ! जो तेरे जिय भावे ॥
नंद-नंदन सों प्रीति निरंतर सुनत वचन उठि धाई॥
'छीत-स्वामी गिरिधर पै नागरी, हेत जानिके आई।॥ | Maankunj | NityaPad-232 | Saarang |
Sarang nayaniri kaheko | सारंग नयनीरी काहेको
'कियो एतो मान ॥ गौरी गहरूछाँड मिल लालहिं मनक्रमवचन यातें होत कल्यान॥ १॥
जिन हठ कररी तू नटनागरसों भैरोंही देवगान ॥ मुरली तान कान्हारो गावत सुनलेरी
कान ॥ २॥ रंगरंगीली सुघरनायकी तू जियमें अडान ॥ नंददास केदारो करिकें
याही विहाय गयो मान ॥३॥ | Maankunj | NityaPad-232 | Saarang |
Japat syaam tere guna baithe | जपत स्याम तेरे गुण बैठे
कदम्ब की छैयां || उन तो विनती बहुत कर पठई तू जो करत है नैयां ॥१॥ नेंक जो
दृष्टि परत नकरखी बह छबि तेरे नैनन महियां ।। सूरदास प्रभु गिरिधर बौली चली
है टेक परी बहियां ॥२॥ | Maankunj | NityaPad-232 | Saarang |
Seetal kharan baahu bhuj balamen jamunatir gokul vraj mahiyaan .. | सीतल खरन बाहु भुज बलमें जमुनातीर गोकुल ब्रज महीयां ॥
सीतल पान खरी सुध चरनन नित्य दुध जटी अति जतन कहीयां।।१।॥
गोवर्धन अरु वृंदावन तरुवर सीतल छैंयां ॥
जन घूमत दध मथना सीतल पीवत गोरसको घैयां ॥२॥|
सोवत तें जागत मनमोहनअखीयां सीतल करत कन्हैया ॥|
गोपीजन नेंनके भागन सीत बसो ब्रज हलधर भैया ॥|३।॥।|
निरख सीतल ब्रजवास निरख मुख मंगल मूरत जसोदा मैया ॥
परमारंद सीतल सरसाने वदन कमलकी लेत बलैया ॥।४।। | Akshay Tritya | NityaPad-232 | Bhairav |
Yehi subhaav sadaa vraj vasin rati russ keli | येही सुभाव सदा ब्रज वासिन रति रस केलि
मोहन संग हंसवो पाया करत केलि यमुना के तीरा ॥
गोपीजन धन पूरव सुकृत कीनो कुच भुज बीच बसाये
ले आये नांहिन मोलिक निरमोलक नग हीरा ॥१॥
घन तनश्याम तेसेड मन अति नीको लागत
मेरे दुखायवेते नील पीत लपटाये परपीरा।।
छीतस्वामीगिरिधरन श्रीविद्धल सुबस बस ो जहां
हमही भेटत भवन विराजो घसी अरगजाबासी बीरा ॥२॥ | Akshay Tritya - Kaleoo | NityaPad-233 | Bilawal |
Sugan manaay rahee vrajbala manbhaavan ghar aavanakon .. | सुगन मनाय रही ब्रजबाला मनभावन घर आवनकों ॥
चंदन भवन लिपाय सोॉंज सज अरगजा अंग लगावनकों।। १॥
भोग राग रंग संपूरन आनंद अपनी रुचि उपजावनकों ।।
कृष्णदास गिरिधरन संग मिली बिरह व्यथा बिसरावनकों ॥२॥ | Akshay Tritya - Kaleoo | NityaPad-233 | Bibhaas |
Lehu lalan kachhu karhu kaleu apune haath jeemaaungi ... | लेहु ललन कछु करहु कलेउ अपुने हाथ जीमाउंगी ॥।
सीतल माखन मेलश्री कर कर कोर खवाऊंगी ॥१॥
ओट्यग्यो दुध सद्यधोरीको सीयरो कर कर प्याऊंगी ॥
तातो जान जो न सुत पीवत पंखा पवनढुराऊंगी ॥ २॥
अमित सुगंध सुवास सकल अंग करि उबटनो गुन गाउंगी ॥
उष्णसीतल हु न्हवाय खोरजल चंदन अंग लगाऊंगी ॥३॥
त्रिविध ताप नस जातदेखि छबि निरखत हीयो सीराउंगी ॥
परमानंद सीतल करि अखीयां बानिक परबल जाउंगी ॥४॥ | Akshay Tritya | NityaPad-233 | Bibhaas |
Peet pichhori kahaan tein paaee sagavagi kesar rung bheeni | पीत पीछोरी कहां तें पाई सगवगी केसर रंग भीनी
ओढी साज सुभग घन सुंदर तनसुखकी मानो पाई अत झीनी।। १॥
रतीसुख चेन प्रकट सुगंध अगर अरगजा तांई कहत कहां कीनी ॥
प्रीतकी रीत कीतही जानेकी हम चारी काहुकी नहिं लीनी ॥२॥
तन मन देख सीस अपुनेको रीझे प्रीतम नवल सखी दीनी ॥२॥
वरन सदा चरचा जाकी सदा कलमत हीनी॥।३॥
चहूं अरगजा चंदन कुल ले जाउं मरजादासनी ॥
नाच नचैये घुघंट केसो सुरश्याम ये मूरत चीनीं ॥४॥ | Akshay Tritya - Kaleoo | NityaPad-233 | Bilawal |
Aaj prabhaat jaat maaragamen sugan bhayo phal falit jasodake .. | आज प्रभात जात मारगमें सुगन भयो फल फलित जसोदाके ॥
मंगल निध जाके भवन बिराजत इत आनंद अंग अंग प्रमदाके॥१॥
सीतल सुबास अवासन महियां मंगल गीत गावत मिल सखीयां ॥
परमानंद नीरखि मोहन मुख हरख हीये सीतल भई अखीयां ॥२॥ | Akshay Tritya - Kaleoo | NityaPad-233 | Bibhaas |
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