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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Chandan paherat giridharlal .. | चन्दन पहेरत गिरिधरलाल ॥
कंचनवेलि प्यारी राधा के भुजवाम भागग ोपाल ॥१॥
प्रथमही चित्रत अक्षतृतीया वंदन भ्रुकुटी भाल ॥
एवेत पाग लटपटी बांधें पीतांबर गलमाल ॥२॥
कुंकुम कुचयुगहेम कलशपे चरचत हें नंदलाल ॥
कुंभनदास प्रभु रसिकशिरोमणि बिलसत व्रजकीबाल ॥। ३॥ | Chandan | NityaPad-235 | Saarang |
Akshay bhaagya suhag radheko akshay preetamako dinn ratiyaan .. | अक्षय भाग्य सुहाग राधेको अक्षय प्रीतमको दिन रतियां ॥
चन्दन पूज प्रीतम सुख दीजे रीझ रीझ यह कहुं बतियां ॥१॥
अक्षय सुजस कहां लों भाखों पार न पावत सेसमुख जतियां ॥
छुट्यो मान सहज परमानंद सुभ दन नीको अक्षय तृतीयां ॥२॥ | Chandan | NityaPad-235 | Adano |
Aaj baney nandanandari navchandanko tunn lepakiyen .. | आज बने नंदनंदरी नवचंदनको तन लेपकियें ॥
तामें चित्रबने केसरके राजतहें सख्री सुभगहियें । १॥
तन सुखको कटि बन्यो हे पिछोरा ठाडेहें कर कमललियें ॥|
रुचि वनमाल पीतउपरेना नयन मेंनसरसे देखिये।।२।।
करन फूल प्रतिबिब कपोलन मृगमद तिलक लिलाददियें |
चतुर्भुज प्रभु गिरिधरनलाल छबि टेढी पाग रही भुकुटिछियें ॥ ३॥। | Chandan | NityaPad-236 | Saarang |
Chandanpaherat giridharlal ... | चन्दनपहेरत गिरिधरलाल ॥।
पहरावत वललभ श्री विद्डल चंचल नयन विशाल ॥| १॥
चन्दन आभूषण अंगअंग राजत चन्दनकी उरमाल।॥
श्वेतपागकुंडल कपोलछबि निरख रहीं व्रजबाल ॥२॥।
अति आनंद नेह विलसत देखत हियो सिरात ॥
श्री विद्ठलगिरिधरहित चितकी कही न जात कछुबात॥। ३॥ | Chandan | NityaPad-236 | Saarang |
Chandanhiki kunjabanai .. | चन्दनहीकी कुंजबनाई ।।
चन्दन छिरके गादीतकीया चन्दन सेज विछाई ॥|१॥
चन्दनछिरके पाग पिछोरा चन्दन छिरकी सारी ॥
चन्दनहीको लेप कींये तन श्रीविद्धल गिरिधारी ॥२॥ | Chandan | NityaPad-236 | Saarang |
Paheren tunn chandanko bago baithe sheetal kunj .. | पहेरें तन चन्दनको बागो बैठे शीतल कुंज ॥
देखतही मन मोहिरहेत सखी मानो मदनके पुंज ॥१॥
लटपटी पाग बनी गिरिधरकें कियें सुधो शुंगार ॥ नेन्हीनेन्ही कली बीन अपनेकर गूंथों तुमको हार ॥२॥
यहसुन श्रवणन चली आतुरव्है कितिक दूर वह पौर ॥
श्रीविद्ठल गिरिधर नुपुरसुन बेगमिले उठदौर ॥३॥ | Chandan | NityaPad-236 | Saarang |
Banyo bago | बन्यो बागो
बामना चंदनको ॥ चंपकलीकी पागबनाई भालतिलक नवबंदनको ॥॥१॥
चोलीकी छबि कहत न आवबे काछोटा मनफंदनको ॥ परमानंद आनंद
तहांनित मुख निरखत नंदनंदनको ॥२॥ | Chandan | NityaPad-237 | Saarang |
Dekhari dekh rasik nandanandan .. | देखरी देख रसिक नंदनंदन ॥
लटपटी पाग सुभग आधेसिर रहीढरक कछुवंदन ॥ १॥
मृगमद तिलक रुचिर बनमाला तनचरचित नवचन्दन।।
चितबनि चारु कमलदल लोचन युवती जन मन फंदन ॥२॥
कबहुंक सहज बजावत सारंग कल मूरली स्वरमंदन ।।
चतुर्भुजप्रभु सुखरास सकल अंग गिरिधर विरह निकंदन ॥३॥ | Chandan | NityaPad-237 | Saarang |
Aaj baney giridhar doolhe chandanke vaage .. | आज बने गिरिधर दूल्हे चंदनके वागे ॥
टूटत तुण रोमरोम मन्मथ रस पागे ॥ १॥। भामिनी
करत तहां मंडप अति शोभा ॥ फिर फिर झंकार करत मधुप वास लोभा ॥२॥॥
थह विध मिल मिथुन वपु विविध रंग बाढे ॥ नागरी निजभभाव रबन ऊपर लखकाढे ॥३॥
उपमाकों कोन कहे कोटि मन्मथ मन लाजे ।।
लघुगोपाल नयनन लख सहचरी सुखकाजे ॥४॥ | Chandan | NityaPad-237 | Saarang |
Aaj dharein giridhar piyadhoti | | आज धरें गिरिधर पियधोती |
अतिझीनी अरगजा भीनी पीतांबर घनदामिनि जोती ॥१॥
टेढीपाग भुकुटी छबिराजत श्याम अंग अद्भुत छबि छाई ॥
मुक्तामाल फूली वनजाई परमानंद प्रभु सब सुखदाई ॥२॥ | Chandan | NityaPad-237 | Saarang |
Chandanpaher aaya haribaithe kalindike coole .. saghankunj dram | चन्दनपहेर आय हरिबैठे कालिंदीके कूल ॥ सघनकुंज द्रम
चहुंदिश फूल ललित लताके मूल ॥१॥ कुंदमाल श्रीकंठ बनी और विचविच
विविधभांतके फूल ॥ रुचिर प्रवाह बहेत यमुनामध्य तरु तमालके झूल ॥२॥
नाचत गावत वेणु बजावत सकल सखा लियें संग | गोविंदप्रभु पियकी छबि
निरखत होत नयन गतिपंग ॥३॥ | Chandan | NityaPad-237 | Saarang |
Dekhisakhi govindaken chandan shobhit saamal anga .. | देखिसखी गोविंदकें चन्दन शोभित सांमल अंग ॥
नानाभांति विचित्र चित्रकीये तामें केसर विविध सुरंग ॥१॥|
कंठमाल पीयरो उपरेना बनी इजार पचरंग ॥
कानन करणफूल भूकुटी गति मोहत कोटिअनंग ॥ २॥
मृगमदतिलक कमल दल लोचन शीसपाग अर्धग ॥
चतुर्भुजप्रभु गिरिधर तन छिनछिन छबिके उठित तरंग ॥।३॥। | Chandan | NityaPad-237 | Saarang |
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