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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Aaj baney giridhari doolade chandanki tunn khor karein .. | आज बने गिरिधारी दूलडे चंदनकी तन खोर करें ॥
सकल सिंगार बने मोतिनके बिविध कुसुमकी माल गरें ॥१॥
खासा को कटि बन्यो पिछोरा मोतिन सेहरो शीस
धरें ॥ राते नयन बंक अनियारे चंचल खंजन मान हरें ॥ २।|
ठाडे कमल फिरावत गावत कुंडल श्रमकण बिंदु परें ॥।
सूरदास मदन मोहन मिल राधासों रति केलि
करें ॥३॥ | Chandan | NityaPad-237 | Saarang |
Aajabane nandanandari navchandan anga argaja laayen .. rurkat | आजबने नंदनंदरी नवचन्दन अंग अरगजा लायें ॥ रुरकत
हार सुढार जलज मणि गुंजत अलि अलकन समुदायें ॥१॥ पीत वसन तन
बन्यो पिछोरा टेढी पाग टोरालटकायें।। अक्षयतृतीया अक्षयलीला
अक्षयगंगादास सुखपायें॥२॥ | Chandan | NityaPad-238 | Saarang |
Sakhee sugandh jall | सखी सुगंध जल
घोरिकें चंदन घस अंग लगावें॥ निरख निरख लालन मुख हंस हंस मन
ललचावें ॥१॥ चंदन अंग चित्रीत कीये बहुविध हुलरावें॥ कृष्णदास लेपन करे मन्मथही लजाबें॥२॥ | Chandan | NityaPad-238 | Saarang |
Chandanko vago banyo | चंदनको वागो बन्यो
चंदनकी खोर कीयें चंदन के रूखतर ठाडे प्यारी।। चंदनकी पाग शिर चन्दन को
फेंटा बन्यो चंदनकी गोली तन चंदनकी सारी ॥। १॥ चन्दनकी आरसी निहारतहें
दोऊजन हंसहंस जात भरत अ ंकवारी॥ सूरदास मदनमोहन चन्दनके महल बेठे
गावत सारंग राग रंग रह्मों भारी॥२॥ | Chandan | NityaPad-238 | Saarang |
Chandan paheren govardhanrai .. | चन्दन पहेरें गोवर्धनराय ॥
संगबनी वृषभाननंदनी शोभा वरनी न जाय ॥ १ ॥
विविध भांतके हार मनोहर चन्दन तिलक बनाय।॥
ब्रजनारीं मिल मंगल गावें जो जाके मनभाय ॥।२॥
सब सामग्री भोग धरावें मेवा बहोत मंगाये॥
चतुर्भुजप्रभु गिरिधर मुख निरखत कोटि अनंग लजाये॥३॥ | Chandan | NityaPad-238 | Saarang |
Atee udaar mohan merey nirakh nayan phoole ... | अति उदार मोहन मेरे निरख नयन फूले ॥।
बीचबीच बरुहा चंद फूलनको सेहरोरी माई कुंडल किरन ऊपर निगम अगम
भूले ॥१॥ चंदनके चित्रकीयें बनी कुंदमाल हीयें पीतांबर कटि बांध अंग
अनुकूले ॥ छीतस्वामी गिरिवरधर गायनकों नाम धूमर टेरत आय ठाडीं भई
कदबतरु के मूले ॥ २॥॥ | Chandan | NityaPad-238 | Saarang |
Nikibannik giridharanlalki ... | नीकीबांनिक गिरिधरनलालकी ॥।
सहजई मांझ हरत सर्वस्व हसि चितबनि नयन विशालकी ॥|१॥ लटपटी पाग
तिलक मृगमद रुचि अनुपम भूकुटी भालकी ॥ कुंडल किरण प्रतिबिंब बिराजत
छबिराजत वनमालकी ॥२॥ कोटि काम विध कित छबिराजत सुंदर श्याम
तमालकी॥ चतुर्भुज प्रभु गढी मनमेरे छबि मोहन मदनगोपाल की ॥।३॥। | Chandan | NityaPad-238 | Saarang |
Sakhee sugandhjal ghorke chandan | सखी सुगंधजल घोरके चंदन
हरि अंग लगावत।॥ बदनकमल अलकें मधुपनसी टेढी पाग मन भावत॥१॥
कोउ बिंजना कुसुमनके ढोरत कुसुमभूखन लेले पहरावत॥ मृदुबेलि सीयरीतर
क्रीडत ब्रजाधीश गुन गावत॥ २॥ | Chandan | NityaPad-239 | Saarang |
Merey grih chandan atee komal leeje | मेरे गृह चंदन अति कोमल लीजे
हो सुंदर ब्रजनायक ।। परमउदार चतुर चिंतामनि लाई स्वच्छ तुमलायक || १॥
अंगलेपन करत परस्पर निरख अनंग लजावत॥ चंदन पहेरे आय हरि बैठे सूर
रसिक जस गावत॥२ | Chandan | NityaPad-239 | Saarang |
Chandanko bangla atee shobhit bethe tahaan govardhandhari.. | चन्दनको बंगला अति शोभित बेठे तहां गोवरधनधारी॥
शोभित सबे साज चहुं ओरन संगराजत वृषभान दुलारी ॥। १॥
अति सुंदर जारी झरोख्रा अतिही विचित्र बनी चित्रसारी॥
रत्नजटित सारोटा बिराजत श्रीनवनीत प्रीया सुखकारी ॥।२॥
चहूं ओर ब्रजबनिता निरखत रतनजटित नोछावर वारी ॥
परमानंद प्रभुके हित कारन सभग सेज रच रुचिर सवारी ॥ ३।। | Chandan | NityaPad-239 | Saarang |
Chandan arghaza leey aaee baal lalke anga lagavan .. | चंदन अरगज़ा ले आई बाल लालके अंग लगावन ॥
सुगंध गुलाबजल तामध्य कपूरडारि अंजुली भरभर लेपत गात लागत पवन चढावन || १॥
नाना बहु भांतनके कुसुमनसों शय्यारची मची सुवास बसी प्रीतम मनभावन।॥।
मुरारीदास प्रभु ग्रीष्मरितु दाह तपत तेसेई लागी सारंग राग गावत॥२॥ | Chandan | NityaPad-239 | Saarang |
Chandan keenwardwar taamein | चंदन कींवारद्वार तामें
बैठे पियप्यारी करत बिहार दोउ अति सुखकारी॥ चंदनकी पाग शिर
चंदनको पिछोरा कटि चंदनकी चोली बनी चंदनकी सारी ।।१॥ कुसुमन
बन मालगरें सीतल सुगंध खरें चंदनके बिंजना दूरत ब्रजनारी ।। चतुर बिहारी
गिरिधारी छबि निरखत रीझरीझ रहसि रहसि भरत अंकवारी ॥२॥ | Chandan | NityaPad-239 | Saarang |
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