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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Aaj sakhee raajat srinandanandan..
आज सखी राजत श्रीनंदनंदन॥ खासाको कटि लसत पिछोरा अंग लगायें चन्दन ॥१॥| तामधि चित्र बनावत बनिता करत मदनको कंदन॥। द्वारकेश बिजनाजु ढुरावत चरन कमल करि बंदन ॥।१॥
Chandan
NityaPad-239
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Nandanandan chandan paharen navghan sunder
नंदनंदन चंदन पहरें नवघन सुंदर केसर रंजित प्रीतम प्रीत गहेरी॥ जमुना तट निकुंज मंदिर में संग क्रजजन ठहरेंरी ॥१॥ कुसुमनके बिजना ढुराय बदन हरिहीयते बिरहकी खेद हरेंरी॥ मीठे कंठ रसिकजन गावत कोकिलाको गरव हरेंरी ॥ २॥।
Chandan
NityaPad-239
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Rukhri madhubanaki mohansang nisdin rahat kharee .. jabaten
रुखरी मधुबनकी मोहनसंग निसदिन रहत खरी ॥ जबतें परसभयो मोहनको तबतें रहेत हरी ॥॥१ ॥ सीतल जल जमुनाको सींचत प्रफुलित ड्रमलता सगरी ॥ नंददासप्रभुके शरन जाए तें जीवन मुक्ति करी ॥२॥
Chandan
NityaPad-240
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Kahaan mett aaye hoe piyaa
कहां मेट आये हो पिया लालन अरगजा अंगको ॥ अबही लगाय गये मेरे ग्रहतें ॥ध्रु .॥। शिथिल किये नैन बेन सिधिल कियोहीयो कौन रंग भयो सब अंगको ॥१॥ एसी कौन त्रिय जिन तुम्हे रिझायवेको मेट्यो ताप तनको॥ सुघररायके प्रभु अजहु पाय परतहो बचन स्थिर स्वास भयो भ्रंगको ॥ २॥
Chandan
NityaPad-240
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Aaj gopal paahune aaye anand mangal
आज गोपाल पाहुने आये आनंद मंगल गाऊंगी ॥ जल गुलाबसों घोर अरगजा आंगनभवन लीपाऊंगी ॥१॥ सीतल सदन सुखदके साधन कुचभुज बीच बसाऊंगी ॥ कुंभनदास लाल गिरिधरको जो एकांत कर पाऊंगी ॥२॥
Chandan
NityaPad-240
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Sunari aalee dupaharki
सुनरी आली दुपहरकी बिरियां बैठी झरोंखन पोवतहार ॥ ओचक आय गए नंदनंदन मोतन चिते कांकरीडार ॥१॥ हों सकुची लज्जीत भई ठाडी गुरुजन मनमें कियो बिचार ॥ गोविदप्रभु पिय रसिक शिरोमनी सैन बताई भुजापसार ॥२॥
Chandan
NityaPad-240
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Chandanki khor kiye chandan ghas anga lagaave sondheki lapat jhapat pawan faharanmein .
चंदनकी खोर किये चंदन घस अंग लगावे सोंधेकी लपट झपट पवन फहरनमें । प्यारी के पिया को नेम फियके प्यारी सो प्रेम अरसपरस रीझ रीझावे जेठकी दुपेहरीमें ॥१॥ चहुूं ओर खस सँवार जल गुलाब डारडार सीतल भवन कीयो कुंज महलमें । सोभा कछु कही न जाय निरख नैन सचुपाय पवन ढुरावे परमानंददास टहलमें ॥२॥
Chandan
NityaPad-240
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Chandanmahalmein kesar lagaaye gaat phoolanke haar chaaru aur
चंदनमहलमें केसर लगाये गात फूलनके हार चारु और उरधारे।। सीतल अरगजा लेले लेपत गात रंगभरी अख्ीयन सब ससख्त्री निहारे॥ १ ॥ मोहनपें पीतपट श्यामतन नील सारी रूपकी सीमारी सूर मुनिमन धारें॥ सूरश्याम ग्रीष्मरितु तपत तेसेई गावत सारंगराग छूटत फूहारे संग छबिकी फूंआरें॥२॥ (
Chandan
NityaPad-240
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Tapat dhoop
तपत धूप दुपेहतीकी ता मध तुम कोन कारन आये ॥ सुनीहो गँवार नारी आदर करि मोहनकों आलिंगन करन देई मन भाये ॥॥९॥ दसनको अग्रधूप मोहे ब्रज सूर अनूप केसे नीके लागत मानो गृह बन आये ॥ गोविन्दप्रभु जान सिरोमनि लाडिले परेई रहो इन चरननतर जानत गेल भुलाये ॥२॥
Chandan
NityaPad-240
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Aaj mohi aagam agam janaayo .. sondhon
आज मोही आगम अगम जनायो ॥ सोंधों छानी अरगज़ा चंदन आंगन भवन लीपायों ॥१॥ आगम आवन जान प्रीतम को गोपीजन मंगल मायो ॥ आनंद उर न समाय सखी नव साजि सिंगार बनायों ॥२॥ तन सुख पाग पिछोरा झीनो केसर रंग रंगायो ॥ मुक्ता के आभूषन गुही मनी पहिरावत हुलसायो ॥३॥ पंखा बहु सिर प्रीतम को, नित राखुंगी छिरकायों ॥ ग्रीषमऋतु सुख देति नाइक यह औसर चलि आयों ॥ आवेंगे महेमान आज हरि भाग्य बडे दिन पायों ॥ 'कुंभनदास' नव नेह नई क्रतु आगम सुजस सुनायों ॥४॥
Chandan
NityaPad-241
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Kesein key kesein aaye hoe joo merey yeh teak dupheriki jhakanmein .
केसें के केसें आये हो जु मेरे यह टीक दुपहेरीकी झकनमें । भवन बिराजो तो बिंजना ढुराउं श्रम जलकन संग देह ॥१॥ श्रम निवारीयें जू अरगजा धारीयें ओर टठारीयें जू जियकों संदेह । चतुरसिरोमणि याही ते कहावत हो जू सूर सफल करो नेह ॥२॥
Chandan
NityaPad-241
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Dekhori yeh chandan pahere thaade kadam kii chhaai .
देखोरी यह चंदन पहेरे ठाडे कदम की छाई । कदम की डारतर सुन्दर खसखानो रच्यो कुसुमनसे सेज बनाई ॥१॥ बिंजना ब्यार करत ललितादिक छूटत फुहारे फुही । झरनाझर लाई सीतल मंद सुगन्ध ब्यार चलत तहां बैठे अधिक छबि छाई । श्याम सुन्दर ओर कुंवरी राधिका बैठे डार दोउ गल वांही ॥ हरिनारायन श्यामदास के चेरे इने नवनिधि दूजे अष्ट महा सिद्धि पाई ॥२॥
Chandan
NityaPad-241
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