top of page
SPIRITUAL BENEFACTOR
VAISHNAVACHARYA HDH PUJYA GOSWAMI 108 SHRI VRAJRAJKUMARAJI MAHODAYASHRI




HAVELI ADDRESS: 795 BEAVER CREEK ROAD, APEX, NC 27502
MAILING ADDRESS: 200 Morrisville Square Way, Suite 103, Morrisville, NC 27560
E-MAIL: Info@krishnadham-vyo.org
Non-Profit 501(c) EIN Number : 47-4639529
00:00 / 02:41
Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
|---|---|---|---|---|
Nandanandan bundavan chand .. yeh kahee janani jagawat laalahi jaago | नंदनंदन बुंदावन चंद ॥ यह कही जननी जगावत लालही जागो
हो मेरे आनंद कंद ॥।१॥ आलस भरे उठे मममोहन चलत चाल ठुमक अतिमंद ॥।
पौंछबदन अंबरतें जसोमति हीरदे लगाय उपज्यो आनंद ।॥।२॥ सब तव्रजसुंदरी
आई देखनकों दरसन होत मीट्यो दुःख द्वंद ॥ ब्रतिपति श्रीग ोपाल परिपुरन
जाको जस गावत श्रुति छंद ॥ ३॥ | Jagayeve | NityaPad-025 | Bhairav |
Jaago mohan bhor bhayo | bikse kamal kumudani mundi tamcharko | जागो मोहन भोर भयो | बिकसे कमल कुमुदनी मुंदी तमचरको
सुर हास गयो ॥। १॥ टेरत ग्वालबाल सखा ठाड़े पुरव दिश पंगति उदयो ॥ सुनत
बचन जागे नंदनंदन सूर जननी उच्छंग लयो ॥२॥। | Jagayeve | NityaPad-025 | Bhairav |
Aalas bhor uthiri sejaten karsun meedat akhiyaan .... | आलस भोर उठीरी सेजतें करस ुं मीडत अखियां ॥॥
सगरी रेन जागी पियके संग देखत चकित भई सखियां । १॥
काजर अधर कपोलन पी लगी हे रची महावर नखियां ।।
रसिक प्रीतम दरपन ले प्यारी चीर सँवार मुखढकियां ॥२॥ | Jagayeve | NityaPad-025 | Lalit |
Nandke laal uthhe jabsoye .. dekh mukharvindaki shobha | नंदके लाल उठे जबसोये ॥ देख मुखारविंदकी शोभा
कहो काके मन धीरज होये ॥१॥ मुनि मन हरण युवतीको बपुरी रति पति जात
मान सब खोये ॥ ईषदहास दशन द्युति बिकसत मानिक ओप धरे जानो
पोये ॥ २॥ नवलकिशोर रसिक चूडामनि मारग जातलेत मन गोये ॥ सूरदास
मन हरन मनोहर गोकुलवस मोहे सब लोये ॥।३॥ | Jagayeve | NityaPad-025 | Bilawal |
Sowat aaj awaar bhaee ... utho merey lalahon balhari bhaanu | सोवत आज अवार भई ॥। उठो मेरे लालहों बलहारी भानु
उदय भयो रेन गई ॥१॥| ठाडी महेरि जगावतहरिकों बदन उधार निहार लई ॥।
सुंदरश्याम सखा तोहि बोलत खेलनकों आनंद मई ॥२॥ हूंकत गाय लेत
वछरूवा जाय खिरक करो घोष लई ।। सूरदासगोपाल उठे जब केलि सखा
संग करत नई ॥३॥। | Jagayeve | NityaPad-025 | Bilawal |
Houn parbhaatasmein uthaai kamalanayan tuharo dekhanmukh .. | हों परभातसमें उठआई कमलनयन तुहारो देखनमुख ॥
गोरसवेचन जात मधुपुरी लाभ होय मारग पारऊंसुख ॥१॥ कमलनयनप्यारो
करतकलेऊ नेंकचिते मोतनकीजेरुख ॥ तुमसपने में मिलके विछुरे रजनी
जानितकासों कहीये दुःख ॥।२॥ प्रीति जो एकलाल गिरिधरसों प्रकटभई अब
आयजनाई ॥ परमानंदस्वामी नागरनागरिसों मससा अरुझाई ।। ३।। | Jagayeve | NityaPad-025 | Bhairav |
Karo kaleu ramkrishna mill kahat yashoda maiya .... | करो कलेऊ रामकृष्ण मिल कहत यशोदा मैया ।॥।
पाछें वछ ग्वाल सब लेकें चलो चरावन गैया ।!१॥
पायस सिता घृत सुरभिनको रुचिकर भोजन कीजे ॥
जगजीवन ब्रजराज लाडिले जननीकों सुख दीजे ॥२॥
सीसमुकुट कटि काछनी पीत बसन उर धारो।।
कर लकुटीले मुरली मोहन मन्मथ दर्पनिवारो ॥३॥
मृगमद तिलक श्रवण कुंडल मणि क ौस्तुभ कंठ बनावो ॥
परमानंददासको ठाकुर ब्रज़जन मोद बढावो |।४॥ | Kaleoon | NityaPad-026 | Bhairav |
Jayati aabheer nagri prananathe .. | जयति आभीर नागरी प्राणनाथे ॥
जयति ब्रजराज भूषण यशोमति ललन देत नवनीत मिश्री सुहाथे ।१॥|
जयति पातपर भात दधि खात श्रीदाम्मा संग अखिल गोधन वुंद चरें साथें।।
ठोर रमणीक बुंदा विपिन शुभ स्थलसुंदरी केलि गुण गूढ गाथें ॥२॥
जयति तरणि तनया तीर रासमंडल रच्यो ततताथेईथेई ताथे ॥
चतुर्भुजदासप्रभु गिरिधरन बोहोरि अब प्रकट श्रीविद्डलेशब्रज कियो सनाथे ॥।३॥ | Kaleoon | NityaPad-026 | Ramkali |
Maiya mohi makhan mishree bhaave .. meetho dadhi mithaai madhu ghrit | मैया मोहि माखन मिश्री भावे ॥ मीठो दधि मिठाई मधु घृत
अपनो करसों क्यों न खवावे ॥१॥ कनक दोहनी दे कर मेरे गौदोहन क्यों न
सिखावे॥ ओटटय्ो दूध धेनु धोरीको भरके कटोरा क्यों न पिवावे ॥ २॥। अजहू
व्याह करत नहीं मेरो तोहि नींद क्यों आवे ॥ चतुर्भुज प्रभु गिरिधरकी बतियां
सुन ले उछंग पय पान करावे ॥। ३॥। | Kaleoon | NityaPad-026 | Ramkali |
Douu alsaanen raajat praat .. shree vrishbhan nandani nand suta rasik salaune gaat .. 1 .. | दोऊ अलसानें राजत प्रात ॥ श् री वृषभान नंदनी नंद सुत रसिक सलौने गात ॥ १ ॥
नीलपीत अम्बर लपटानो छिन छिन अधिक सुहात ॥
मानहु घन दामिन अपनी छबि होई एक बिकसात ॥। २॥
बिन मकरंद अरबिंद वुन्द मिल अंग अंग बिकसात ||
सुखसागर गिरिधरन छबीलो निरख अनंग लजात ॥।३॥ | Jagayeve | NityaPad-026 | Bibhaas |
Aachho neeko lonon mukh bhorahi dikhaaiye .. nishake uneede | आछो नीको लोनों मुख भोरही दिखाइ़ये ॥ निशके उनीदे
नयना तोतरात मीठे बेना भावते जियके मेरे सुखही बढाइये ॥१९॥ सकल सुख
करण त्रिविध ताप हरण उरको तिमिर बाढ्यो तुरत नसाइये ॥ द्वारे ठाढे ग्वाल
बाल करोहो कलेऊ लाल मीसी रोटी छोटी मोटी माखनसों खाईए |। २॥| तनकसो
मेरो कन्हैया वार फेर डारी मैया बेंनी तो गुहों बनाइ गहरन लगाइये | परमानंदप्रभु
जननी मुदित मन फूली फूली अति उर अंगन समाइये ।॥। ३॥। | Kaleoon | NityaPad-027 | Bhairav |
Chhagan magan pyaare laal keejiye kaleva || chhinkete sagari dadhi | छगन मगन प्यारे लाल कीजिये कलेवा || छींकेते सगरी दधि
उखल चढ काढलेहो पहर लेहो झगुली फेंट बांधलेहो मेवा ॥९॥ यमुना तट
खेलन जावो खतेलन के मिस भूख न लागे कोन परी प्यारे लाल निश दिनाकी
टेवा॥ सूरदास मदनमोहन घरही क्योंन खेंलो लाल देहो चकडोर बंगी हंस मोर
परेवा ॥२॥ | Kaleoon | NityaPad-027 | Bhairav |
bottom of page
