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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Shyam anga sakhee hamey chandanakon neeko sohe bago .
श्याम अंग सखी हमे चंदनकों नीको सोहे बागो । चंदन इजार चंदन को पटुका बन्यो सीस चंदनको पागो ॥१॥। अति छबि देत चंदन उपरना बीच बन्यो चंदनको तागो । सब अंग छींट बनी चंदन की निरखत सूर सुभागों ॥२॥
Chandan
NityaPad-241
Saarang
Chandan argaja lepan aaee baal lalke anga lagavan .
चंदन अरगजा लेपन आइ बाल लालके अंग लगावन । सीतल गुलाब जल ता मधि कपूर डारि अंजुली भरी भरी लेपत गात लागत पवन जु डार बन ॥१॥ नाना विधके कुसुमनसों सेज मनभावन । मुरारिदासके प्रभु ग्रीष्पक्रतु दाह तपत तेसी लागी सारंगी गावन ॥|१९॥
Chandan
NityaPad-241
Saarang
Chandan sugandh anga lagaay aaye merey grih hamahi mug jovat laal tiharohe ..
चंदन सुगंध अंग लगाय आये मेरे गृह हमही मग जोवत लाल तिहारोहे ॥ ढीले ढीले पग धरत घामके सताये लाल बोलहु न आवे बैन कोनके बचन पारेहो ॥१॥ बैठो लाल सीतल छांह श्रमहुको निवारन होय सीतल जल यमुनाको अनेक भांति पीजिये। नंददास प्रभु प्रिय हमतो दरसकी प्यासी ऐसी नीकी करो कृपा मोहि दरस दीजिये ॥॥२।।
Chandan
NityaPad-241
Saarang
Bheenji hansi hansi rasik russ mein douu atee jhampat ..2.. aeka raag sarang (daad)
भींजि हँसि हँसि रसिक रस में दोऊ अति झंपत ॥२॥ एक राग सारंग (ड) चंदन चित्र सम्हारे री बागे चंदन कुंज बैठे पियप्यारी ॥ चंदन तलप रची मन भाई चंदन की भीजी ओढे पीत सारी ॥१॥ चंदन सौं मानों पवन लागत मंद मंद आवत सुखकारी ॥ दास 'कल्यान' चंदन लिए ठाढी सखी कुंज तरे अवलोकत भारी ॥२॥
Chandan
NityaPad-242
Saarang
Chandan khaur thaur thaur anga lepan karat aras paras bilas greesham tapati ..
चंदन खौर ठौर ठौर अंग लेपन करत अरस परस बिलास ग्रीषम तपति ॥ गुलाबन की पंखुरिन सों सेज रचि पचि सुगंध सुवास बस पुहुपन के बींजना ढुरत ढुरावत प्यारी प्यारे प्रानपति ॥१॥ पुहुपन सौं गूंथे बार पुहुपन के सब सिंगार गुलाब जल छूटति फुहारे भर भर अंक माल त्यों त्यों त्यों प्यारी अति कंपत ॥ 'हरिवल्लभ' प्रभु गुंसाई यह विधि ऋतु मनाई
Chandan
NityaPad-242
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Chandan pahiri chully sukumari laalan kau munn
चंदन पहिरि चली सुकुमारि लालन कौ मन मोहे ॥ सारी सरस बनी अति झीनी कर नौलासी सोहें ॥१॥ कर नोती झाई गंडनि पर देखत ही मन लोभा ॥ मृगमद तिलक विराजे भाल पर अखिल भुवन की सोभा ॥ २॥ पंकज लोचन अति अनियारे अंजन रेखा राजें ॥ नासा बेसरि की छबि निरखत कोटि काम छबि लाजे ॥३॥ अरून अधर दसनावलि की दुति चिबुक चिन्ह सुखकारी ॥ मुख अवलोकति सखी ललितादिक अपनों तन मन वारी ॥४॥ स्थाम संग कुंजन में ठाढी करत विनोद विसेके ॥। “गदाधरदास कहांलो बरनों जा मुख रसना इके ॥॥५॥
Chandan
NityaPad-242
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Aeye douu saghan kunj key dwaar thaadhe karat
ए दोऊ सघन कुंज के द्वार ठाढे करत सिंगार परसपर ॥ सेत कुलहे सिर स्वेत पिछोरा मोतिन माल बिराजति उर पर॥१॥ नील जलद तन राजत तिहारो चंपक बरन तिहारी सोहत सुंदर बर ॥॥ “रसिक प्रीतम की बानिक निरखति लेति बलैयां दोऊ कर कर ॥।
Chandan
NityaPad-242
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Hari key anga kaun chandan laptaanon
हरि के अंग कौं चंदन लपटानों तन तेरे दिखियतु जैसें पीत चोली ॥ आभूषन मरगजे चंदन लपटावत छिपै न छिपाई मानौं कृष्ण बोली ॥ १ ।। कहुं चंदन कहुँ अलक ही खसि सुरत रंग की पोट खोली ॥ हरिदास के स्वामी स्थामा कुंज बिहारी अरुन कंठ बिच रहत न ओली ॥२॥
Chandan
NityaPad-242
Saarang
Chandan mahal banyon atee sunder .. taa madhe baithen bunny madan
चंदन महल बन्यों अति सुंदर ॥ ता मधे बैठें बनी मदन गुपाल॥१॥ अति रमनीय पुनित किसोरी अंग नवल बनी राधे बाल ॥ कटि धोती उपरना केसरी (सीस) किरीट कुंडल बन माल ॥ 'कृष्णदास' रसरास रसिक दान निरतत गावत परम रसाल ॥२॥
Chandan
NityaPad-243
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Aaj atee sobhit haye nandlal . navchandanko lape kiyo haye taa parr
आज अति सोभित है नंदलाल । नवचंदनको लेप कियो है ता पर मोतिन माल ॥ १ ॥ खासाको कटि बन्यो पिछोरा कुलह जु सुतरु सोहे भाल। कुन्द मालती कंठ विराजत बीच बीच फूल गुलाल ॥२॥ सारंग राग अलापत गावत मधुर मधुर सुरताल ॥ गोविन्द प्रभुकी या छबि निरखत मोहि रही व्रजबाल ॥३॥
Chandan
NityaPad-243
Saarang
Payan chandan lagaauun ..
पायन चंदन लगाऊं ॥ बहो भांतिन बिजना ढुराऊं छिरकि गुलाब जल तों तन नैन सिराऊं ॥१॥ अगर कपूर घसि अंग लगाऊं मृगमद आड बनाऊं ॥ 'कल्यान' के प्रभु गिरिधरन छबिले ले लै लाड लड्याऊं ॥२॥
Chandan
NityaPad-243
Nayaki
Seetal
सीतल समीर तन चंदन कौं लेप किये बैठे लाल कदम की छांही ॥ फूलन कौ हार ॒हिए प्रेम भरे अति जीऐ लेत प्यारी अंक लाई मेलि ग्रीवा बांही ॥१॥ करत अधर मान परसि करत कुच कंचुकी के बंद खोलि मन न अघाही ॥ श्रीविद्डल “गिरिधरनलाल' सकति बरनि कोंन सुख कौ समूह बाढ्यौं कुंज बन मांही ॥२॥
Chandan
NityaPad-243
Saarang

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