top of page
Kirtan Title
Kirtan
Category
Book-Page#
Raag
Houn baar daro jagat vraj ees sees adha
हों बार डारो जगत ब्रज ईस सीस अध टेढी पगीयन उपर ॥ तन टूटत बलि जाय जुवति जन जहां तहां देखियत चटक कर ॥१॥ तन चंदन ओर स्वेत पीछोरी अरगजा भीजी रह्यो सुन्दर बर ॥ कल्याण के प्रभु गिरिधरजु की माधुरी निरखि मदन मनहर ॥२॥
Chandan
NityaPad-243
Bilawal
Dampati sukh
दंपति सुख करति अति ही रस भीजे चंदन अरगजा अंग लेपन कीए ॥ अति सीतल सुगंध खसखानो छिरक्‍्यों गुलाब जल बरखत पवन पानी पुरवा देखीयत ग्रीषम ऋतु मानन लागे हरख हिये ॥१॥ अग्र धूम अग्र धूम महेक आवत सोरभ लेत सुख पावत जीए ॥| जानन मनि जान 'तानसेन' के प्रभु अचबत नित अमीए॥२॥
Chandan
NityaPad-243
Saarang
Aaj baney giridharanlal sakhee useer mahal madhi kusum sijya rachee ..
आज बने गिरिधरनलाल सखी उसीर महल मधि कुसुम सिज्या रची ॥ जंत्रन फुहारे छुटे सीत मंद अति सुगंध त्रिविध ज्यार सिरी सोभा सची ॥१॥ अरगजा अनुप अंग विविध कुसुम भरत रंग निरतत रस भरे त त थेई नची ॥ “नंददास' प्रभु पिय लेत गति में गति गिड गिडता घिलांग धिलांग मृदंग बजी॥२॥
Chandan
NityaPad-244
Saarang
Baithe vrajraj kunwar useer sadan kunj bhawan
बैठे ब्रजराज कुंवर उसीर सदन कुंज भवन सीतल मंद त्रिविध पवन लागत सुखदाई ॥ सहचरी समीप आय ठाढी मुख निरखत हें पहिरावत पहोंप माल अरगजा लगाई ॥१॥ इक सख्री पान खवावे अधर कमल परस करत इक सखी दरपन ले पिये को दिखाई ॥ प्रभु 'कल्यान'गिरिधर पीय यह बिध ऋ्रतु मनाय निरखि निरखि उर आनंद हृदय में समाई ॥२॥
Chandan
NityaPad-244
Saarang
Atee udaar mohan merey nirastri nainn phule ree ..
अति उदार मोहन मेरे निरस्त्रि नैंन फुले री ॥ बीच बीच वरुहा चंद फूलन को सेहरो माई, कुंडल, किरन पर, अगम निगम झुलैरी ॥१॥ कुंदन की माल गरे चंदन के चित्र करे पीतांबर फेंटा बांधे अंग अनुकुले री ॥ “छीत स्वामी गिरिवरधर गायन को नाम धूमरि टेरत, आय ठाढी भई कदम त्तरु के मुले री ॥२॥
Chandan
NityaPad-244
Saarang
Atee suvas seetal
अति सुवास सीतल उसीर सार छिरकत बार वार अतिसुकुमारी ॥-भरि गुलाब जल अपार फुहारेन की झर झरात चंदन छिरकत छैल पहिर स्वेत सारी ॥१॥ बार बार तृन तोरे गोकुल चंद पर स्यथामा सलोनी संग चितवत चित चोरे ॥ 'छीत स्वामी ' गिरिवरधर वि्डलेश पद प्रताप निरखि नैंन रस बस भई सब ही तृन तोरे ॥२॥।
Chandan
NityaPad-244
Saarang
Greeshm ritu maadho juu key mahal mein aavan koun atee tarsat hain ..
ग्रीष्म ऋतु माधो जू के महल में आवन कों अति तरसत हैं ॥ जेठ मास में तन जुडात ज्यों माघ मास सरसत हैं ॥१॥| भवन बूंद यों छूटत फुहारे मानौं पावस ऋतु बरसत है ॥। घोरि अरगजा अंग लगावति बैठें अति हुलसत हैं ॥२॥ ना वैभव वेकुंठ जो ब्रज में श्रीवल्लभ गृह दरसत हैं ॥ 'नंददास' तहां ताप रहे क्‍यों रमा आदि पग परसत हैं ॥३॥
Chandan
NityaPad-244
Saarang
Odhein llal upareni atijhini ..
ओढें ल्लाल उपरेनी अतिझीनी ।। तनसुख श्वेत सुदेश अंस पर बहुत अरगजा भीनी ॥१॥ अतिसुगंध सीतल अरु चंदन सादी रचना कीनी ॥ रहीधसि भुव पर थाग दुपेची कोटिमदन छबि छीनी ॥२॥ सूथन बनी हिरमिची शोभित गति गयंदकी कीनी ॥ परमानंदप्रभु चतुरशिरोमणि व्रजवनिता प्रेम रतिदीनी ॥।३॥
Chandan
NityaPad-244
Saarang
Sakhee sugandh jall ghorke chandan hari lagawat .
सखी सुगंध जल घोरके चंदन हरि लगावत । वदनकमल अलकें मधुपनसी टेढी पाग मन भावत।।१॥ कर बिंजना कुसुमन के ढोरत कुसुम भूखन ले ले पहिरावत ॥ मृदुवेली सी वृच्छतर क्रीडत ब्रजाधीश गुन गावत ॥२॥।
Chandan
NityaPad-245
Saarang
Vrindavan kunjanmein madhya khaskhaano rachyo seetal viar jhuk
वृंदावन कुंजनमें मध्य खसखानो रच्यो सीतल वियार झुक गोखन बहत है ॥ सुगंधी गुलाबी जल नाना बहुभांतिनके लै लाय धाय सखी सब छिरकत हैं ॥१॥ धार धुरवा छूटत तहां नीके दादुर मोर पिक शुकजु फिरत हैं॥ कृष्णदास फुहारे छूटे मानो मनमथ लूटें झुक झुक झुक धारे हौदन भरत हैं।।
Khaskhane
NityaPad-245
Saarang
Seetal useer grih chhirakyo gulab neer parimal patir ghansar
सीतल उसीर गृह छिरक्यो गुलाब नीर परिमल पाटीर घनसार वरखतहैं ॥ सेज सजी पत्रनकी अतरसों तरकी अरगज़ा अनूप अंग मोद दरसत हैं॥१॥ वीजना बियार सीरी छूटत फुहारे नीके मानोघमननमें नहैंनी नहैंनी फुही बरसतहें | चतुरविहारी प्यारी रससो विलास करत जेठमास हेमंतक्रतु सरस दरसत है ॥२॥
Khaskhane
NityaPad-245
Saarang
Atee udaar mohan merey nirasitri nainn phule ree ..
अति उदार मोहन मेरे निरसित्रि नैंन फुले री ॥ बिच बिच बरुहाचंद: फूलनको सेहरों बन्यों कमक कुंडल सो सोभादेत निगम नेत मुलेरी॥१॥ चंदन को लेपकीये गुलाब की बन मालही । ये: पीतांबर कट बाधें अंगन पट दकुलें ॥ छीत-स्वामी गिरिवर धर गायम को नाम धोरी टेरत सब ठाड़ी भई तरु कदंम मुलें ॥२॥
Chandan
NityaPad-245
Saarang

© 2026 All rights reserved. Vaishnav Samaj of RTP, DBA - Krishnadham-VYO 

bottom of page