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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Yamuna tata navanikunj dram navdal pahup punj tahaan rachinagarvar rawati usirki ..
यमुना तट नवनिकुंज द्रम नवदल पहुप पुंज तहां रचीनागरवर रावटी उसीरकी ॥ कुंकुम घनसार घोर पंकज दल बोरबोर चरचत चहूंओर अवनि पंकज पाटीरकी ॥१॥ शोभित तन गौर स्थाम सुखद सहज कुंजधाम परसत सीतल सुगंध मंदगति समीरकी ॥ नंददास पियप्यारी'निरख सखी ललिता ओट श्रवणन धुनि सुन आज किंकिणी मंजीर की ॥२॥
Khaskhane
NityaPad-245
Saarang
Vrindavan saghankunj madhuri
वृंदावन सघनकुंज माधुरी लतान तर यमुनापुलिन में मधुर बाजी बांसुरी ॥ जबतें ध्वनि सुनी कान मानो लागे मदनबाण प्राणनहू की कहा कहूं पीर होत पांसुरी ॥१॥ व्याप्यो जो अनंग ताते अंग सुधि भूल गई कोऊ निंदो कोऊ बंदो करो उपहासरी ॥ ऐसेब्रजाधीशजीसूं प्रीति नई रीतवाढी जाके हृदय गड रही प्रेमपुंज गांसरी ॥२॥
Khaskhane
NityaPad-246
Saarang
Seetal kunj pahop punj mahaa usirki rawati totty chhirkat
सीतल कुंज पहोप पुंज महा उसीरकी रावटी टाटी छिरकत कुंकुम मलयज देखत आवबत कांपी ॥ बहुत कर कपूर चूरसों सरस प्रेम पूर यमुनाकी लोल लहर बहुत वृक्ष चांपी ॥१॥ केसर मृगमद गुलाल लैलै दल कोमल जाल कोतों रची सहज रसाल पीतांबर ढांपी ॥ तेरोई ध्यान धरत तेरोई नाम रटत जगतको प्रभु आरति लेन पठड़ दिनमापी ॥२॥
Khaskhane
NityaPad-246
Saarang
Anat naan jaiye piya rahiye merey hii mahal .. joee joee kahoge
अनत न जैये पिय रहिये मेरे ही महल ॥ जोई जोई कहोगे सोई सोई करोंगी टहल ॥१॥ शब्या सामग्री वसन आभूषण सब बिध कर राखोंगी पहल | चतुर विहारी गिरिधारी पियाकी रावरी यही सहल ॥२॥।
Khaskhane
NityaPad-246
Saarang
Useer bhawan chhaayo suman taamein baithe radha raman arrie uns bhuj mellie ..
उसीर भवन छायो सुमन तामें बैठे राधा रमन एरी अंस भुज मेली ॥ मृगमद घसि अंग लगाय कपूरजलसों चुचाय सीतल लागे दोऊरी करत सुखद केली ॥१॥ गावे सारंगराग सरस स्वर कोकिला सुरतरस चलेतें न चलाय रससों पुलकित द्र॒मवेली ॥ जगजन्नाथहित विलास ग्रीष्म ऋतु सुखनिवास ललितादिक निरख निरख पावे रसझेली ॥२॥
Khaskhane
NityaPad-246
Saarang
Suur aayo sirpar chhaaya aaee payan tarr panthi
सूर आयो सिरपर छाया आई पायन तर पंथी सब झुक रहे देख छांह गहरी ॥ धंधीजन धंधौ छांड रहेरी धूपन के लिये पशुपंछी जीव जंतु चिरिया चुप रहरी ॥१॥ ब्रजके सुकुमारलोग देदे कमार सोर्वें उपवनकी ब्यार तामें पोढे पियप्यारी ॥ सूर अलबेली चल काहेंकूं डरत हैं महाकी मध्य रात जैसें जेठकी दुपहरी ॥२॥
Khaskhane
NityaPad-246
Saarang
Birajat douu usirmahal chhootat fuhaare aagein neeke .. lalitaadik sakhee gaaven
बिराजत दोऊ उसीरमहल छूटत फुहारे आगें नीके ॥ ललितादिक सखी गावें बजावें रसकी चहलपहल ॥१॥ जबप्यारी फल ले धरत धारपर थिरहवे रहत मानी चहल ॥ चतुर बिहारी गिरिधारी प्यारीकी सखी भूली विजनाकी टहल ॥२॥
Khaskhane
NityaPad-246
Saarang
Sunder tibaro khaskhaane koo banaayo haye baithe vrajrajkunwar manko
सुंदर तिबारो खसखाने को बनायो है बैठे ब्रजराजकुंवर मनको हरतहैं || अतिसुगंध जल बहुभांतिन के बेलाभर लाय लाय सखी सब छिरक्‍्यो करतहैं ॥१॥ सीतलसुगंध त्रिविध समीर बहे कोकिला चकोर मोर डोलत फिरत हैं ॥ जीवन फुहारे छूटें मानो मनन्‍्मथ लूटें झुक झुक झुक धार हौदन भरतहैं ॥॥२॥
Khaskhane
NityaPad-246
Saarang
Sohat rung bharey
सोहत रंग भरे दोउ उसीर महल में छूटत फुहारन गुलाब नीर ॥ वरनीय अली भुव बूंदन फबीहे मानोअलक शरद कमल ऊपर ओसकन जैसें दोऊ जन अंग लपेटहें चीर ॥१॥ गावत जहां दम्पती बजावत विशाखा बीन ठाडी हे प्रवीन सखी सभा सुरत हीर ॥ कृष्णदास प्रभु गिरिधर छबि निरखत सावनसों झर लायो रसकुंज पुंज धीर समीर ॥२॥
Khaskhane
NityaPad-247
Saarang
Attar gulab neer parada
अत्तर गुलाब नीर परदा लपटे उसीर त्रिविध समीर की झकोर लहदवो करें ॥ छूटत फुहारे होद भरे अति भारे सारे नानाविध चादर की धार बहवो करे ॥१॥ रंग जमे रागिन रहत सारंग की ग्रीष्म निवास गुनी गान कहवो करे ॥ एसे निज मंदिर में बिराजें दोउ बालकृष्ण प्रभु ब्रजाधीश आठो प्रहर दरस लहबवो करे ॥२॥
Khaskhane
NityaPad-247
Saarang
Sheetal khaskhaanon suhano munn manyo amrit roop
शीतल खसखानों सुहानो मन मान्यो अमृत रूप अधर आन्यो ता मध्य बैठे बालकृष्णसुनत राग वास बरसानो ॥ छूटत हें फुहारे नाना बिध होद भरे बादर की छबि कारे जामें वर्षा निर्तत मोर अखारे कोकिला सोर करत सुख बरखानो ॥॥१॥ अतर ओर गुलाब अरगजा लग्यो सुगन्ध समीर बहत मंद मंद बिजना करत सखी सब साज लिये नेनन सरसानो ॥ कबहुक जल ले ले छिरकत शीत लगत मानों केल करत फिरत गावत दोउ तान तरंग ब्रजाधीश प्रभु तन मन धन हरखानो ॥२॥
Khaskhane
NityaPad-247
Saarang
Sheetal pateer gulab neer sukh kii seer useer bhawan sijya
शीतल पटीर गुलाब नीर सुख की सीर उसीर भवन सिज्या रची स्वेत अत्तरसों तरकर विविध कुसुम ढोरन आवत बिजना पवन ॥१॥ छूटत फुहारनसों नेन्ही सी फुहारी घनसार घोर अंगराग दहन ॥ तहां बैठे चित्र विचित्र चक्र चूडामणि राजत राधिका रबन ॥२॥
Khaskhane
NityaPad-247
Saarang

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