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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Sheetal suvas atihi chhirakyyo gulab | शीतल सुवास अतिही छिरक््यो गुलाब
रस खसखानो ॥ मध्य निर्मल जंत्र जल कृत पवन जाडो लागत हेमन्त ऋतु
याही ठोर अब आय रही हे मानो ॥१॥ अत्तर अरगजा सोहे पान फूल तेसोई
राग रंग सुन्दरि त्रियन संग एसेंड मन आनन्द आनों ॥। प्रभु विचित्र गिरिधर पिय
तुम योंही ग्रीष्प ऋतु जुग बर बानों ॥१॥ | Khaskhane | NityaPad-247 | Saarang |
Sheetal | शीतल
उसीर गृह कुंज में ता मध्य श्याम श्याभा सखीजन । जारी झरोखा संवार
कोउ ठाडी फूल्यो हे सुवास सुधावन ॥१॥ कमल बरन दोउ अरगजा आंग
सोहे झीनी घाग सारी श्याम छबि पाई अलकन । व्रजाधीश प्रभु केलि जल
यंत्र फूही जल बरखत मानों सुर कुसुमन ॥२॥ | Khaskhane | NityaPad-248 | Saarang |
Sheetal khaskhaano suhavano munn manyo amrit roop adhar aanyo taa madhya baithe balkrishna | शीतल खसखानो सुहावनो मन मान्यो अमृत रूप अधर आन्यो ता मध्य बैठे बालकृष्ण
सुनत राग वास बरसानो । छूटत हें फुहारे नाना विध होद भरे बादर की छबि
कारे कारे जामें वर्षा निर्तत मोर अखारे कोकिला सोर करत सुख बरखानों ॥।९॥
अतर और गुलाब अरगजा लाग्यो सुगंध समीर बहत मंद्र मंद विजना करत
सखी सब साज लिये नेनन सरसानो । कबहुक जल ले ले छिरकत शीत लगत
मानों केलि करत फिरत गावत दोउ तान तरंग ब्रजाधीश प्रभु तन मन धन हरखानो ॥२॥ | Khaskhane | NityaPad-248 | Saarang |
Mahel useer dou baithe mose mein hode mein paam jhulaaven .. garein baiyaan | महेल उसीर दोउ बैठे मोज में होद में पाम झुलावें ॥ गरें बैयां
झुक लेत फुहारन मुख ढिंग मुखहि डुलावें ॥९॥ स्वेत महीन उपरनान में छबि
शोभित बार खुलावें ॥ नागरिया नागरि छबि चितवत एक टक पलक भुलाबे॥२॥ | Khaskhane | NityaPad-248 | Saarang |
Sheetal suvas atihi chhirakyyo | शीतल सुवास अतिही छिरक््यो
गुलाब रस खसखानो । मध्य निर्मल जंत्र जल कृत पवन जाड़ो लागत हेमन्त
ऋतु याही ठोर अब आय रही हे मानो ॥१॥ अत्तर अरगजा सोहे पान फूल
तेसोई राग रंग सुंदरि त्रियन संग एसेंई मन आनंद आनो । प्रभु विचित ्र गिरिधर
पिय तुम योंही ग्रीष्म ऋतु जुग वर बानों ॥१॥ | Khaskhane | NityaPad-248 | Saarang |
Aaj attari parr useer mahal mein rache dampati byaru karat ... | आज अटारी पर उसीर महल में रचे दम्पति ब्यारु करत ॥।
खोवा मलाई बासोंधी ओर पय हँस हँस घूंट भरत ॥१॥ चहुूँ ओर खसखानो
छुटत फुहारे फुही बिंजना बयार सिरी मन को हरत ॥ नंददास प्रभु प्रिया
प्रितम परस्पर हँस हँस कोर लेत सहचरी कनक डबा बीरासों भरत ॥२॥ | Khaskhane | NityaPad-248 | Kanharo |
Dekhiyat madhojuke mehel . jethmas atee jadaat maghmas | देखियत माधोजुके मेहेल । जेठमास अति जडात माघमास
कहेल । दूरिहीते देखियत है बादर केसे पहेल । बीच बीच हरत स्थाम जमुनाकेसे
देहेल । श्रीपति को कहा काज यही बात की सेहेल ॥ परमानंददास तहां
करत फिरत टहेल ॥ | Khaskhane | NityaPad-248 | Saarang |
Duperi jhanak bhaee taamein aaye paas merey mein uthh keeno aadar .. | दुपेरी झनक भई तामें आये पास मेरे में उठ कीनो आदर ॥
आंको भरले गई तनकी तपत सब ठोर ठोर बूँदन चमक ॥।१॥
रोम रोम सुख संतोष भयो गयो अनंग तनतें न रह्मो ननक ।। मोहि मील्यो अब चतुर धोंधीके
प्रभु मिट गई विरहकी जनक ॥२॥ | Khaskhane | NityaPad-249 | Saarang |
Teak dupahareeki tapan mein | टीक दुपहरीकी तपन में
भलेई आये मेरे गेह ॥ भवनबिराजो बिजना ढुराऊं श्रम झलकत सब देह ।।१॥
श्रमको निवारीये अरगज़ा धारीये।॥। जीयतें टारीये ओर संदेह ॥२॥ चतुर
शिरोमनि याहीतें कहीयत सूर सुफल करो नेह ॥३॥ | Khaskhane | NityaPad-249 | Saarang |
Kahaanten aaye hoo jaa madhyanh samey assie ghaammen bethoju mein dhoruun beejana .. nish | कहांतें आये हु जा मध्यान्ह समे एसी घाममें बेठोजु में ढोरूं बीजना ।। न िश
कहां बसेलाल जिय बस्यो वाको ख्याल हारि गये हो जुलाल पलका पर
पोढना ॥१॥ सीतल सुगंध चारु अरगजा घोर धर्यो रावटीमें चलो लाल चंदन
अंग परसना ॥ हरिनारायन एयामदास के प्रभु प्यारे मया कीनी मोपर नैनन
निरखुं बिसारु न पलना ॥२॥ | Khaskhane | NityaPad-249 | Saarang |
Chhootat fuhaare chaaru chadhe chanduba sou laage | छूटत फुहारे चारु चढे चंदूबा सो लागे
बूंदन की बरखा बरखा झरे लागी मानों सावन की । चलत सुगंध डोरे अरगजा
अरु चंदन की अत्तर गुलाब नीर उसीर छिरकावन की ॥१॥ बने जल भोन मे
बिछोना रचे बंगला में मच्छ कच्छ मेंडक अरु मुर॒ग नचावन की । राजभोग
आरती उत्तारत श्रीविद्ठल प्रभु सूर बलिहारी जाय नट बर मन भावन की ॥२॥ | Khaskhane | NityaPad-249 | Saarang |
Sunariali duperiki | सूनरीआली दूपेरीकी
बिरीयां बैठे झरोखन पोवत हार ॥ ओंचक आय गये नंदनंदन मोत्तन चितये
कांकरीडार ॥१॥ हों सकुची लज्जीत भई ठाडी गुरुजन मनमें कियो बिचार ॥।
गोविंद प्रभु पिय रसिक शिरोमनी सेन बताई भुजा पसार ॥२॥। | Khaskhane | NityaPad-249 | Saarang |
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