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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Karat jalkeli piyapyari bhujmeli ..
करत जलकेलि पियप्यारी भुजमेलि ॥ छुटत फुहारे भारे उजल हो दसवारे अतही सुगंधकी रेलि ॥१॥ निरखत ब्रजनारी कहाकहों छबिवारी ठाडी सखी सबसहेल ॥| राधागोविंदलाल जल मध्य करत ख्याल वुंदावन सुखझेल ॥२॥
Khaskhane
NityaPad-251
Saarang
Bunny aaj evet paag
बनी आज एवेत पाग लालसिर चलो सखी देखन जाय ॥) उसीर महल में कुसुम रावटी छिरक्‍्यो गुलाबनीर नैननको फल पाय ॥।१॥ मंजुल चोटा तामधि बांध्यो बने हे मदनरूप कदमकी छांय ॥ नंददासप्रभु प्रिया प्रीतम परस्पर कबहुक करत केलि कबहुत हसि ढर जाय ॥२॥
Khaskhane
NityaPad-251
Kanharo
Atee baney dou madanroop seey birajat useer mahal chhootat fuhaare neeke prem russ
अति बने दोउ मदनरूप से बिराजत उसीर महल छूटत फूहारे नीके प्रेम रस पुंज ॥ कुसुमन की शब्यारची बिबिध सुगंधखची सहचरी चहुं और सखी सघन बन कुंज ॥१॥ खासे खसखाने तामें गुलाब नीर बरखत मानों पियप्यारी हरखत जहां भंवर गुंज ॥ बिबिध फूलवारी फूली मदन मत्त पंग मुलि ब्रजाधीश मधुपावलि गुंजत गुंज ॥२॥
Khaskhane
NityaPad-251
Saarang
Bunn bunn mein banmali
बन बन में बनमाली बीहरत।। ललितादीक बनमाल लियें कर पेहेरावत मनुहारी ॥१॥ अंबकदंब झुकेचहुदीसतें फूल रही फूलवारी ॥ हंस चकोर मोर चात्रक पीक मधुप करत झंकारी ॥२॥ नाना बिथके द्विजबर बोलत त्रिविध पवन सुखकारी ॥ सुरदास प्रभु किये हे लीला प्राण करत बलहारी ॥३॥
Khaskhane
NityaPad-252
Saarang
Yamuna jall kreedat shyam chahun or
यमुना जल क्रीडत श्याम चहुं ओर बनी बाम नावमधि लाल रावटी रचि ॥ फूलनको बंगला मनोहर राजत झुकि रही लता हंस ओर चकोरकी पंगति सचि ॥१॥ कोकिला अलापततान लेत सुखकारी गावत प्रवीन प्यारी सारंग राग खचि ॥ छुटत जल जंत्रनफुंहीं मानों सुमन माल गुहीं व्रजाधीश मेंघ श्याम मूरत देखी ललचि ॥|२॥
Naav
NityaPad-252
Saarang
Chandan paher naav hari baithe sanga vrishbhan dulariho ..
चंदन पहेर नाव हरि बैठे संग वृषभान दुलारीहो ॥ यमुना पुलिन फूल शोभित तहां खेलत लाल बिहारीहो ॥१॥ त्रिविध पवन बहत सुखदायक सीतल मंद सुगंधाहो ॥। कमल प्रकाश कुसुम बहु फूले जहां राजत नंदनंदाहो ॥२॥ अक्षय तृतीया अक्षय लीला संग राधिका प्यारी हो ॥ करत बिहार सबे सखीसों नंददास बलहारी हो ॥३॥
Naav
NityaPad-252
Saarang
Baithe ghanshyam sunder khewat hain naav ..
बैठे घनश्याम सुंदर खेवत हैं नाव ।। आज सखी मोहन संग खेलवे को दाव ॥१॥ चमुना गंभीर नीर अति तरंग लोलें ॥ गोपिन प्रति कहन लागे मीठे मृदु बोलें ॥२॥ पश्चिक तुम खेवट हम दीजियें उतराई ॥ बीच धार मांझ रोकी मिषही मिष डुलाई ॥३॥ डरपतहों श्याम सुंदर राखीयें पद पास ॥ याही मिष मिलयो चाहे परमानंददास ॥४॥
Naav
NityaPad-252
Saarang
Useer mahalmein raajat douu jan . sees tiparo sohe lalke shwet saaree fabi rahee
उसीर महलमें राजत दोऊ जन । सीस टिपारो सोहे लालके श्वेत सारी फबी रही प्यारी तन ॥१॥ आसपास ब्रजयुव॒ति ठाडी करत विंजना बारत तन मन । *चतुर बिहारी' दंपति अद्भुत छबरि बरन सके एसो को है कविजन ॥२॥
Khaskhane
NityaPad-252
Saarang
Rachyo khaskhaano aaj
रच्यो खसखानो आज ब्रजपति तामे राजे रावटी उसीर नीर छिरकि छबिली ॥ छूटत फुहारे चारु जल गुलाब भर अपार निरख्ि थक्तित छबि जोबन गरविली ॥॥१॥ अरगजा चरचित चंद्रमुख्ली चहूं ओर ठाढी चतुर चमेली बेली माल कर सोहें ॥ स्वेत बसन अति सुवास बरनत छबि नंददास' निपट निकट कोटि मन्मथ मन मोहे ॥२॥
Khaskhane
NityaPad-252
Saarang
Kunj bhawan key aangan dolat lai curr phool chhari nandlala ..
कुंज भवन के आंगन डोलत लै कर फूल छरी नंदलाला ॥ करि चंदन की खोर मनोहर पहिरे विविध कुसुम की माला ॥१॥ छूटत है चहूं और फुहारे ढोरत बींजना सब वृजबाला ले कर गेंद खिलावत प्यारी “कृष्ण दास' प्रभु नैंन बिसाला ॥२॥|
Khaskhane
NityaPad-252
Saarang
Jamuna jall kreedat douu naav madhya piya pyaari daarat tansar atee russ bharey ree .
जमुना जल क्रीडत दोऊ नाव मध्य पिय प्यारी डारत तनसार अति रस भरे री । कबहुंक जितत वृषभान नंदिनी मदनमोहन प्रियके मन जु हरेरी ॥१॥ कुसुमकी रावटी उसीर मध्य राजत अरगजा लेप तन किये मदनकेलि अनुहेरी ॥ व्रजाधीश' प्रभुकी पिछोरी और मुरली छिनाय लई सप्तसिंधु जुबति पायन परे री ॥२॥
Naav
NityaPad-253
Saarang
Nadiyaan nadiyaan teer hari naav chalaai ray radha naar gokultekanhane sudh paaee ray..
नदीयां नदीयां तीर हरि नाव चलाई रे राधा नार गोकुलतेकान्हाने सुध पाई रे॥ एक तो ब्याकुल बाल किनारें एक तो फिरत बनतें उपवन देत दिखाई रे ॥१॥ एक बन ढूंढ सकल बन ढूंढ़यो कहां गये जादोंराई अरे ॥ एक तानसेनको प्रभु अतिही अचगरो तोहि नंद दुहाई अरे ॥२॥
Naav
NityaPad-253
Saarang

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