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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Baith laal phoolanaki chaukhandi .. | बैठ लाल फूलनकी चौखंडी ॥
चंपक बकुल गुलाब निवारो रायबवेलि श् रीखंडी।।१॥|
जाई जुई केवरो कुंजो कनक कणेर सुरंगी ॥
चतुर्भुजप्रभु गिरिधरजु को बानिक दिन दिन नवनवरंगी ॥२॥ | Phool Mandali | NityaPad-256 | Lalidya |
Phoolanke athkhambha raajat sanga | फूलनके अठखंभा राजत संग
वृषभान दुलारी॥ मोर चंदशिर मुकुट बिराजत पीतांबर छबि भारी ॥ १ ॥ फूलनके
हार शुंगार फूलनके संग सखी सुकुमारी ॥ परमानंददासको ठाकुर ब्रज जीवन
मनहारी॥२॥ | Phool Mandali | NityaPad-257 | Saarang |
Mukut kii chhaanh manohar keeye.... saghan kunjate | मुकुट की छांह मनोहर कीये।॥। सघन कुंजते
निकस सॉमरो संग राधिका लिये ॥ फूलन के हार सिंगार फूलन के खोर
चंदन की किये।। परमानंददास को ठाकुर ग्वाल बाल सब संग लीयें॥२॥ | Phool Mandali | NityaPad-257 | Saarang |
Aachhebane dekho madangopal.. bahut | आछेबने देखो मदनगोपाल॥ बहुत
फूलफूले नंद नंदन तुमकों गूथोंगी माल ॥।१॥। आय बैठे तरुवरकी छैँया अंबुज
नयन विशाल ॥ नैंक वियारकरों अंचलकी पाय पलोटोंगी लाल।।२॥ आछे
तब राधामाधव सों बोलत वचन रसाल ॥ परमानंदप्रभु यहां आयहो ब्रज तज
ओर न चाल॥३॥ | Phool Mandali | NityaPad-257 | Saarang |
Baithe phool mahal mein dou radha aur giridhari | phoolanke haar | बैठे फूल महल में दोउ राधा और गिरिधारी | फूलनके हार
सिंगार फूलनके फूलटिपारों धारी ॥ १ ॥ फूलनकी सेज गेंदुवा तकीया फूलनकी
पिछवारी॥ फूले गावत वेणु बजावत राग रंग भयो भारी॥२॥ फूले मधुप
कोकिला कूजत वहेत पवन सुखकारी॥ श्रीविद्ठलगिरिधरनलाल पर तन मन
धन सब वारी॥३॥ | Phool Mandali | NityaPad-257 | Saarang |
Phoolanaki mandali varmandit phool hiyein piya anga lasenhen.. phoolanaki sez phoolanke aabhushan | फूलनकी मंडली वरमंडित फूल ह ियें पिय अंग लसेंहें॥ फूलनकी सेज फूलनके आभूषण
फूले फूले कोटिकाम एसेंहें॥१॥ फूलन बनी अति दासचतुर्भुन सखी सब
फूल हियें हुलसेहें॥। फूल निशा शशि फूल रहे हैं गिरिधर भामते कुंज बसेहें।।२ | Phool Mandali | NityaPad-257 | Saarang |
Baithe kusum bangla | बैठे कुसुम बंगला
लाल॥ जाई जुई गुलाब माधुरी बिचबिच कमल रसाल।॥।१॥ फूलनहीको
गहनो पहरें हरि ओर ढिंग ब्रजबाल।॥ फूलनहींकी रचीजु शब्या सुंदर
मदनगोपाल।॥ छाजत पोहोप भवन नंदनंदन शोभा बढी रसाल॥ कृष्णदास
तहां बीरी खवावत हितकर दियेहें उगार॥३॥ | Phool Mandali | NityaPad-257 | Saarang |
Dekhsakhi phoolan athkhambha baithehen | देखसखी फूलन अठखंभा बैठेहें
गिरिधर पियप्यारी ॥ सेवतीसुमन यूथका गूंथी मालती माधवी बेलि
निवारी॥१॥ फूलनके छाजे फूलनकी छत्री फूलनके कलशा झूमकारी॥।
फूलनकी गादी तकिया चौखट फूलनकी रची विचित्रि पिछवारी ॥ २।। फूल
सिंहासन फूले बिहरत दंपति फूली सखी फूलवारी ॥ गूढभाव अंतर आनंदनिधि
'फूलत कृष्णदास बलिहारी ॥३॥ | Phool Mandali | NityaPad-257 | Saarang |
Baat kahet rasrang uchchalita.. phoolan key mahel virajat | बात कहेत रसरंग उच्छलिता॥ फूलन के महेल विराजत
दोऊ मंद सुगंध निकट वहे सलिता ॥ १॥ मुखमिलाय हँस देखत दर्पण में सुरत
श्रमित उर माल विगलिता॥ परमानंदप्रभु प्रेम विवश भये कहि हम में सुंदरको
ललिता॥२॥ | Phool Mandali | NityaPad-258 | Saarang |
Dekhari dekh hariko mahal... chahuun or phooli drum wellie | देखरी देख हरिको महल।॥ चहूं ओर फूली द्रुम वेली
तरुमाल सोहें हरल ॥। १ ॥ कुंदमालकी बनी तिबाही बीच सुमन युथिका सहल॥
भीतर भवन गुलाब निवारों करण केतकी पहल॥२॥ बहुत्त भांत फूलनके
झरोखा तापर कलशा रहल | वंदनवार संवारी छाजे छबिसों छहल॥ ३ ।॥ बोलत
मोर कोकिला अलिगण ओर खगनकी चहल ॥। गोविंदप्रभु प्यारीसों मिलकें
मधुर बचन हसकहल।॥।४॥ | Phool Mandali | NityaPad-258 | Saarang |
Laalan baithe kusum bhawan.. latpati | लालन बैठे कुसुम भवन॥ लटपटी
विघूर्णित लोचन मकरकंडल सोहे श्रवनन॥१॥ शीतलताई सुंदरताई सौरभ
छाय रही शोभातन॥ कहुं कहा रसरूप माधुरी रसिक पीबत रस प्रमुदित मन
मन॥२॥ | Phool Mandali | NityaPad-258 | Saarang |
Cull raag sarang eechh) | कल राग सारंग ईछ)
श्री गिरिधरनलाल मिल बैठे फूल मंडली राजें ॥ विचविच कुंद गुलाब बीच
बीच बोरसरी छबिछ ाजें ॥१॥ अतिविचित्र फूलनकी तिबारी करण केतकी कुंजो भ्राजें ॥
रायवेलिके खंभ मनोहर मधुकर मधुरें गाजें ॥२॥ बरण वरण
फूलनकें फोंदना बंदनबार ओर सबसाजें ॥ अति प्रवीण ललितादिक गावत
मदन गोपाल रीझवे काजें ॥३॥ गावत राग सारंग सप्त स्वर मधुर मधुर मुरली
ध्वनि बाजें ॥ गोविंदप्रभुकी या बानिकपर निरख निरख रतिपति जीय
लाजें ॥४॥ | Phool Mandali | NityaPad-258 | Saarang |
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