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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Phoolanaki mandali manohar baithe jahaan rasik | फूलनकी मंडली मनोहर बैठे जहां रसिक
गिरिधारी॥ जाई जुई ओर कुन्द केतकि रायवेलि सो सरस संवारी ॥। १ ॥ चंपक
बकुल गुलाब निवारी विविध भांत कीनी चित्रसारी ॥ बैठी तहां रसिकनी राधा
फूलनकी पहेरें तन सारी ।।२॥ वरणवरण फूलनके आभूषण फूलनपाग बनी
अतिभारी॥ गोविंदप्रभु फूले अति शोभित निरख फूली वृषभान दुलारी ॥३ ॥। | Phool Mandali | NityaPad-258 | Saarang |
Saurabh madhvi saras suhai... | सौरभ माधवी सरस सुहाई।॥
फूलनके फोंदा रचि गूंथें फूलनकी मालाजु बनाई ॥ १ ॥ फूलनके कंकण बाजूबंध
फूलनकी चोकी ढरकाई ४ फूले रहत सदा मंडल में फूली सखा राधा ढिंग
आई ॥२॥ हँस हँस कहत लाल गिरिधरसों फूलनकी मंडलीजु बनाई ॥ चतुर्भुज
प्रभु गिरिधरनलालकी- अंगअंग छबि वरणी न जाई ॥३॥ | Phool Mandali | NityaPad-258 | Saarang |
Vrishbhanandini | वृषभाननंदिनी
मिल गिरिधरनलाल संग कुंज के मेहेलमें केलि ठानी ॥ परमशीतल सुखद
तरणि तनया निकट सघन समसर वहेत स्वच्छपानी ॥१॥ कुंद केतकी जाई
कुसुम परिमल मलय परम रमणीक तहां सघनबानी ॥ हंस सारस मोर और
खग कीर रोर मंद मारुत चलत मधुप गानी ॥२॥ कोक कोटिककला प्रकट
विलसत बाला वार तनमनहित प्राण पति रानी ॥ कहत गोर्विंदप्रभु रीझ रसबश
भई मदनमोहन नवल युवती सुखदानी ॥३॥ | Phool Mandali | NityaPad-259 | Saarang |
Dekhari dekh piya bhawan sukhakaari .. foolanason | देखरी देख पिय भवन सुखकारी ॥ फूलनसों
रचिपचि कीनेहें श्रीवृषभान दुलारी ॥१।| लालगुलाब के खंभ मनोहर छाजेनकी
छबिभारी ॥ चंपक बकुल गुलाब निवारों कीनीहे चित्रसारी ॥२॥ कुंदमालकी
बनी तिबारी विविध पोहोषकी जारी ॥| सुमन यूथके कलशा शोभित ता पर
बंदनवारी ॥३॥ झूमरहे चहूंदिशा झूंमकी गेंदनकी छबिन्यारी ।॥| खेलत तामें
लाललाडिली मुदित भरत अंकवारी ॥४॥ फूलनकी पाग फूलनके चोलना
फूलन पटुकाधारी ॥ फूलनके लेहेंगा सारी मध्य फूलन अंगिया कारी ॥५॥
फूलनकी सेज फूलनके बंधना फूलनकी चौकी मनहारी ॥ फूलन बने गेंदुवा
तकिया चहूंदिश फूलरही फूलवारी ॥६॥ फूलन पंखा करलियें ठाडी फूल
रही ब्रजनारी ॥ गोविंदप्रभु फूले अति झोभित रसफूले श्रीमोवर्द्धनधारी ॥॥७॥ | Phool Mandali | NityaPad-259 | Saarang |
Phoolanke mehel giridhar baney bhamini .. kanakaki veli | फूलनके मेहेल गिरिधर बने भामिनी ॥ कनककी वेलि
लपटी तरु तमालसों स्यामघन में ज्यों लसत सौदामिनी ॥१॥ नव कुसुम सेज
पल्लव रचित हरखसों कंठ आरोप भुज चलत गज गामिनी ॥ नंदनंदन मधुर हास
मूदुबोलनी रीझाय लीने कृष्णदासकी स्वामिनी ॥२॥ | Phool Mandali | NityaPad-259 | Saarang |
Nandanandan vrishbhan nandini baithe phoolmandali raajen .. phoolanke | नंदनंदन वृषभान नंदिनी बैठे फूलमंडली राजें ॥ फूलनके
खंभ फूलन की तिबारी फूलनके परदा अति छबि छाजें ॥१॥ फूलनके चौक
फूलनकी अटारी फूल बंगला छबिश्राजें ॥ ताऊपर कलशा फूलनके फूलन के
फोंदना बिराजें ॥२॥ फूल शुंगार प्यारी तन शोभित मदनगोपाल रीझवें
काजें ॥ छीतस्वामी गिरिधर छबि राजत रमा सहित रतिपति जिय लाजें ॥३॥ | Phool Mandali | NityaPad-259 | Saarang |
Phoolanke bhawan giridharan navnagari phool shringarkar atihi raajen .. phoolankipag | फूलनके भवन गिरिधरन नवनागरी फूल शृंगारकर अतिही राजें ॥ फूलनकीपाग
सिर श्यामके राजहीं फूलनकी माल हीयमें बिराजें ॥॥९॥ फूल सारी बनी फूल
कंचुकी तनी फूल लहेंगा निरख काम लाजें ॥ छीतस्वामी फूले सदन प्यारी
सदां विलसत मिलत अंग कामसाजें ॥२॥ | Phool Mandali | NityaPad-259 | Saarang |
Phoolanke | फूलनके
महेल बने फूलन वितान तने फूलनके छाजे झरोखा फूलनकी किंवारहें ॥
'फूलनकी गादी गूंथी तकिया फूलनके बैठे श्यामश्यामा शोभित अपारहें ॥१॥।
'फूलनके बसन आभूषण बिराजें फूलनके फोंदा फूल उरहारहें ॥ नंददास
प्रभु फूले निरखत सुधिबुधि भूले शुकदेव नारद शारद रटत्त वारंवारहें ॥२॥ | Phool Mandali | NityaPad-260 | Saarang |
Phoolanaki choli phoolanke cholana foolmaathen phool haath | फूलनकी चोली फूलनके चोलना फूलमा्थें फूल हाथ
कानन में फूल ॥ फूलनकी सेज नीकी फूलनकें चंदुवा फूलनके वींजना फूलन
'फोंदा फूल ॥९ ॥ फूलनके तकीया फूलनकी गालमसूरी फूलनके झबा शब्या
आगें पाछें फूल ॥ फूलनके मेहेल फूलनकी चित्रसारी परदा परमानंद प्रभु
राधामाधव फूल ॥२॥ | Phool Mandali | NityaPad-260 | Saarang |
Baney madhauju key mahal .. jethh maas atee | बने माधौजू के महल ॥ जेठ मास अति
जड़ात माघ मास कहल ॥१॥ दूर ही तें देखियत हैं बादर केसे पहल ।। बिच
बिच हरित स्थाम यमुना केसे दहल ॥२॥ श्रीपतति को कहा काज यह बात
सहल ॥ परमानंददास तहाँ करत फिरत टहल ॥३॥ | Phool Mandali | NityaPad-260 | Saarang |
Baithe kusum bangla laal .. juee karen gulab madhuri | बैठे कुसुम बंगला लाल ॥ जुई करेण गुलाब माधुरी
बिचबिच कमल रसाल ।॥॥१९॥ फूलनहीकी रचीहे शय्या फूलनही माल ॥
फूलनही को गेहेंनों पहेरें सुंदवर गोपाल ॥२॥ क्रीडत पोहोप भवन नंदनंदन
शोभाबढी अपार ॥ दास रसिक तहां बीरी खवाबवत प्यारों देत उगार ॥३॥ | Phool Mandali | NityaPad-260 | Saarang |
Foolanason benny guhi phoolan kii | फूलनसों बेनी गुही फूलन की
अंगिया फूलनकी सारीमानों फूली फूलबारी ॥ फूलनकी दुलरी हमेल हार
फूलन के फूलनकी चोली चारु ओर गजरारी ॥१॥ फूलनके तरोंना कुंडल
फूलन के फूलनकी किंकिणी सरस संवारी ॥ फूलमहेलमें फूली श्रीराधा
प्यारी ॥२॥ | Phool Mandali | NityaPad-260 | Saarang |
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