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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Govind maangtahen dadhi rotty .. makhan sahit dehu merrie janani shubhra sukomal motee .. 1..
गोविंद मांगतहें दधि रोटी ॥ माखन सहित देहु मेरी जननी शुभ्र सुकोमल मोटी ॥ १॥ जो कछु मांगोसो देहु मोहन काहेकी आंगन लोटी ॥ कर गहि उछंग लेत महतारी हाथ फिरावत चोटी ॥|२॥ मदनगोपाल श्यामघनसुंदर छांडो यह मति खोटी ॥| परमानंददासको ठाकुर हाथ लकुटियाछोटी ॥३॥।
Kaleoon
NityaPad-027
Bhairav
Laal tohe dulhani laaungi chhoti . chalo begg abb karo
लाल तोहे दुलहनि लाउंगी छोटी । चलो बेग अब करो कलेऊ माखन मिश्री रोटी ॥॥१॥ चंदन घसकें ऊबट न्हवाऊं तब बाढेगी चोटी ॥। श्रीविद्ठल बिपिन विनोद बिहारी वात नहिं ये खोटी ।।२॥।
Kaleoon
NityaPad-027
Malkos
Haa haa leho aeka core .. bahut bair bhaihe dekho merrie or ..1..
हा हा लेहो एक कोर ॥ बहुत बेर भईहे देखो मेरी ओर ।।१॥ मेल मिश्रीदूध ओटबो पीयो व्हेहे जोर ।। अबहो खेलन टेरहें तेरे गवाल भयो भोर॥२॥ जागे पंछी द्रुम द्रुम सुन प्रातकरन लगे सोर॥ खेलवेकों उठ भाजोगो मान मेरो निहोर ॥३॥ लेहूँ ललन बलाय तिहारी छोर अंचल ओर ॥ बदन चंद विलोक सीतल होत हृदय मोर ॥।४॥ बैठ जननी गोद जेंबन लागे गोविंद थोर ॥ रसिक बालक सहज लीला करत माखनचोर ।॥।५।।
Kaleoon
NityaPad-027
Bhairav
Kamal nayan hari karo kaleva || mankhan rotty sadya jamyo dakshi
कमल नयन हरि करो कलेवा || मांखन रोटी सद्य जम्यो दक्षि भांत भांत के मेवा | १॥ खारक दाख चिरोंजी किशमिस उज्ज्वल गरीय बदाम ॥। सक्कर सेव छुहारे सिंघारे हरे खरबूजा जाम ॥२॥ केई मेवा बहु भांतभांतके खटरसके मिष्ठान ।। सूरदासप्रभु करत कलेऊ रीझे स्थाम सुजान ॥। ३॥
Kaleoon
NityaPad-028
Bibhaas
Abahi yashoda mankhan laaee .. mein mathake abahiju nikasyon
अबही यश्ोदा मांखन लाई ॥ में मथके अबहीजु निकास्यों तुम कारण मेरे कुंवर कन्हाई ॥॥९॥॥ माग लेहु ऐसे ही मोपें मेरेही आगें खाहु ।। और कहूजिन खेहो मोहन दीठ लगेगी काहू।। २॥ तनक तनकही खाउ लाल मेरे जो बढि आजे देह ॥ सूरस्याम कछू होउ बडेसे वैरिनको मुख खेह ॥। ३॥।
Kaleoon
NityaPad-028
Bibhaas
Karo kaleu kanhar pyaare .. terat gwal baal sub thaade aaye
करो कलेऊ कान्हर प्यारे ॥ टेरत ग्वाल बाल सब ठाडे आये कबके होत सवारे ॥१॥ मांखन रोटी दियो हाथ पर बल जाऊं हों खाओ ललारे॥ खेलो जाय ब्रजहीके भीतर दूर कहूंजिन जाओं बारे ॥२॥ टेर उठे बलराम स्यामकों आवहु जांय धेनु वनचारें ॥ सूरस्थाम कर जोर मातासों गाय चरावन करत हाहारें ॥३॥
Kaleoon
NityaPad-028
Bibhaas
Douu bhaiya maangat bheyaapen deree maiya dadhi makhan rotty .. suna
दोऊ भैया मांगत भेयापें देरी मैया दधि माखन रोटी ।। सुन यशुमति एक बात सुतनकी झूठेही धामके काम अंगोटी ॥१॥ बलभद्र गह्मो नासाको मोती कान्हकुंवर गही दृढकर चोटी ॥। मानो हंस मोर भखलीने कहा वरणुं उपमा मति छोटी ॥२॥| यह देखत नंद आनंद प्रेम मगनज़ु करत लोट पोटी ॥ सूरदासप्रभु मुदित यशोदा भाग्य बडे करमनकी मोटी ॥|३॥
Kaleoon
NityaPad-028
Bibhaas
Maano batlalju merrie .. karo bhojan raar bhoolo houn matju
मानो बातलालजू मेरी ।। करो भोजन रार भूलो हों मातजू तेरी ॥१॥ दह्ों माखन दूधे मेवा परोस राखी थारी ॥ करो भोजन लाल मेरे जाऊंहों बलहारी ॥ २॥। गोद बेठोहों जिमाऊं गाऊं तेरे गीत ।। खेलिवेकों तोहि बोलत ग्वाल तेरे मीत ॥ ३॥। कहो ताहिं बुलाउं बैठे तेरे पास ॥ करोहों दधिमथन उदयो सूरकमलप्रकाश ॥।४॥ मायके सुन वचन मोहन विहँस प्रेम गोपाल ॥ कियो भोजनदियो अतिसुख रसिक नयन विशाल ॥५॥।
Kaleoon
NityaPad-028
Bibhaas
Keejiye nandlal kaleu .. kheer khaand or makhan mishree
कीजिये नंदलाल कलेऊ ॥ खीर खांड ओर माखन मिश्री लीजिये परम रसाल ॥ १॥| ओटयो दूध सद्य धोरीको तुमको देहों गोपाल ॥। बेनी बढे होय बलकीसी पीजिये मेरे बाल ।। २॥। हों बारी या बदनकमल पर चुंबन देहो गाल ॥ गोविंदप्रभु कलेऊ कीनो जननी वचन प्रतिपाल ॥३॥
Kaleoon
NityaPad-029
Ramkali
Uthat praat kachhu maat jashoda mangal bhog deit douu chhora .
उठत प्रात कछु मात जशोदा मंगल भोग देत दोऊ छोरा । माखन मिसरी दह्यों मलाई दूधभरे दोऊ कनककटोरा ॥१॥ कछुक खात कछु मुख लपटावत देत दूराय मिलि करत निहोरा। परमानन्द प्रभु झबक परत दूग भरत लाल भुज करत कलोला ॥ २॥
Kaleoon
NityaPad-029
Bibhaas
Houn balbal jaauun kaleu laal keeje .. kheer khaand ghrit
हों बलबल जाऊं कलेऊ लाल कीजे ।। खीर खांड घृत अति मीठोहे अबकी कोर बछ लीजे ॥। १॥ बेनी बढे सुनो मनमो हन मेरो कह्ो पतीजे।। ओटबो दूध सद्य धोरीको सात घूंट भर पीजे ॥२॥ वारने जाऊं कमलमुख ऊपर अंचरा प्रेमरस भीजे ॥ बोहोरस्थो जाय खेलो यमुनातट गोविंदसंग करलीजे ।। ३॥।
Kaleoon
NityaPad-029
Ramkali
Makhan tanak deree maay .. tanak karpar tanak rotty maagat
माखन तनक देरी माय ॥ तनक करपर तनक रोटी मागत चरणा चलाय ॥| १॥ तनक से मनमोहना की लागो मोहिं बलाथ ।। तनक मुखमें दूधकी दतियां बोलतहे तुतराय ॥२॥| कनक भूपर तनक रींगत नेत पकर्‌यो धाय | कंपियो गिरी शेष संक्यों सिंधु अति अकुलाय |। ३॥ तनक माग्यो बहोत दीयो लियो कंठ लगाय | सूरप्रभुकी तनक चुटिया गुहत माय बनाय ॥।४॥
Kaleoon
NityaPad-029
Ramkali

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