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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Rasbhare peeya pyaari baithe kusumbhavan ..
रसभरे पीय प्यारी बैठे कुसुमभवन ॥ कुसुमनकी शेज ओर कुसुमवितान तने तेसो ही सीतल मंद सुगंध पतन ॥१॥ कुसुमन के परदा कुसुमन के बाजना कूजत अली पीक कीर शुक श्रवन गोविन्द बलिजोरी सदाड़ बिराजे सुककरत राधा रमन ॥२॥
Phool Mandali
NityaPad-262
Kedar
Naval nagari naval
नवल नागरि नवल नागर किशोरमिलि कुंजकोमल कमल दलन सज्या रची ॥ गौर सांवल अंग रुचिरता पर मिले सरस मानों नीलमणी मृदुल कंचन खच्ती ॥१॥ सुरति निवीबंध हेतु पीयमाननी कुच भुजन में श्रम जल कलह मोहनमची ॥ सुभग श्रीफल उरज पान परसत रोस हुंकरगर्वजुत भृंगभामिनी लची ॥२॥ कोककोटिक कला हरत मन पियको विविध कलमाधुरी रतिकाम नाहिन बची ॥ प्रणय में रसिक ललितादिक सखी सब पीवत मकरंद सुखरास अन्तर बची ॥३॥
Phool Mandali
NityaPad-262
Saarang
Paag sohe latpati gulab key phoolan kulah bharein ..
पाग सोहे लटपटी गुलाब के फूलन कुलह भरें ॥ भ्रकुटी विलास हास कुंडल कपोल झाई कोटिक मनमथ मनहरे ॥१॥ कुंचित केश सुदेश तिलक रुचिर भाल माल मोतिनकी विचित्र भेख करें ॥ चतुर्भुजदास प्रभु गिरिधर ऐसी विधि ठाड़े मुरली अधरधरें ॥॥२॥
Phool Mandali
NityaPad-262
Kanharo
Champakali sou paag banaauun, piya key sees bandhaavan koo ..
चंपकली सो पाग बनाऊं, पिय के सीस बंधावन को ॥ सेहेरो कुन्द कली को तापर दुलहिन ब्याह सधावनकों ॥१॥| कमल पुष्प कों ललित टिपारो, मलल्‍लकाछ डहकावन को ॥ मुकुट चमेली की कलियन को'काछनी कटि महकावन को ॥२॥ कुलह वंधूक कुसुमन की सुरंग रंग शिशु गति तन छबि पावन को ॥ टोपी पीत सोनजाकी धरि लाल गोद खिलावन कों ॥३॥ चंपा के कुसुमन को फेंटा, अमेठ उमेठ बतावन को ।॥। पीत दुमालोबसंत पंखुरिन भोजन भाव जतावन को ॥४॥ अष्ट सखी को भेख सखा धर सब विध हित चित दीनो ॥ बनविहार यों एक समे कर, सूर मनोरथ सबको कीनो ॥५॥
Phool ke Shringaar
NityaPad-263
Khamaj
Maan manaayo radha pyaari radha pyaari ..
मान मनायो राधा प्यारी राधा प्यारी ॥ का ।कहियत मदन दहन को नायकपीर प्रीतिकी न्‍्यारी ॥३१ ॥्रु . ॥ तुजू कहत ही कबहु न रूसों अवधों कैसें रूसी ॥ विनहीं शिशिर तनक तामसतें तुबमुख कमल विदूसी तेरे ॥२॥ विरहरूपरसनागरि लीने पलट कछूसी ॥ तैरें हुती प्रेमकी संपति सो संपति किन मूसी ॥। ३ ।
Maan Saagar
NityaPad-263
Khamaj
Champakaliso paag banaaun, piyake sees bandhaavan koo .
चंपकलीसो पाग बनाउं, पियके सीस बंधावन को । सहेरो कुंद कलीको तापर दुलहिन ब्याह सधावनकों ॥|१॥ कमल पुष्प को ललित टिपारो, मल्‍लकाछ डहकावन को । मुकुट चमेली की कलियन को, काछनी कंटि महकावन को ॥२॥ कुलह बंधूक कुसुमन की सुरंग रंग सिसुगति तन छबि पावन को । टोपी पीत सोनजाकी धरि लाल गोद खिलावन को ॥३॥ चंपाके कुसुमनको फेंटा, अमेठ उमेठ बतावन को । पीत दुमालो बसंत पंखुरिन भोजन भाव जतावनकों ॥४॥ अष्ट सखीकों भेख सखा धर सब बिध हित चित दीनो । बनबिहार यों एक समे कर, सूर मनोरथ सबको कीनो ॥५॥
Phoolan Shringar - Asht Sakhi
NityaPad-264
Saarang
Phoolko mukut cutty kaachhani joo phoolanaki phoolan izaar parr phool patka joo saaj |
फूलको मुकुट कटि काछनी जु फूलनकी फूलन इजार पर फूल पटका जु साज | फूल स्रवन कुंडल हार फूलनके फूली अधर मुरली सप्तसुरसों गाज ॥१॥ बाजूबंद फूलनके कर कंकन फूलनन के फूलनकी पहोंची पाय पेंजनी रही बाज | दास कुंभननाथ गोवर्धनधर निरख फूलीं फूलीं अंखियां अद्भुत बने आज ॥२॥
Phoolan Shringar - Asht Sakhi
NityaPad-264
Kanharo
Phoolan koo mukat banyo phoolanko pichhora
फूलन को मुकट बन्यो फूलनको पिछोरा तन शोभित अति प्यारी बर फूलन को शूंगार | कंठफूल वागो फेंटा फूलगादी गेंदुबा फूल हँस जेठे हें स्थामा स्थाम शोभा को नहीं पार ॥ फूलन के आभूषण वसन विराजत फूलन के फोंदा फूल उरहार । नंददास प्रभु फूले निरखत सुधि भूले शुकदेव नारद शारद रटत बार बार ॥।
Maan Saagar
NityaPad-264
Saarang
Mukutki chhaanh manohar kiye .
मुकुटकी छांह मनोहर किये । सघन कुंजतें निकसी सांवरो संग राधिका लिये ॥१॥ फूलन के हार सिंगार फूलन खौर चंदन किये । परमानन्ददासको ठाकुर ग्वाल बाल संग लिये ॥२॥
Phoolan Shringar - Asht Sakhi
NityaPad-264
Saarang
Foolanason benny guhi phoolan kii
फूलनसों बेनी गुही फूलन की अंगीया फूलन की सारी मानों फूली फुलवारी ॥ फूलनकी दुलरी हमेल हार फूलन के फूलन की चोको चारों ओर गजरारी ॥१॥ फूलन के तरोना कुंडल फूलन के फूलन की किंकिली सरस संवारी ॥ फूलन के मेहेल बने फूली श्रीराधा प्यारी फूले नंददास जाय बलिहारी ॥२॥
Maan Saagar
NityaPad-264
Saarang
Phoolke bhawan giridharan navnagari phool singar curry atee hii raaje .
फूलके भवन गिरिधरन नवनागरी फूल सिंगार करि अति हि राजे । फूलनकी पाग सिर स्थाम के राज ही फूल की माल हियपें विराजे ॥१॥ फूल सारी बनी कंचुकी फूल की फूल लहेंगा निरख काम लाजे । छीतस्वामी फूल-सदन प्यारी संग विलसि मिलवत अंग काम दाजे ॥२॥
Phoolan Shringar - Asht Sakhi
NityaPad-265
Kanharo
Vrindaavan rahasya dhaam 'virahat varr shasama shyam angang kotikam sriradha patrani ..
वृन्दावन रहस्य धाम 'विरहत वर शसामा श्याम अंगअंग कोटिकाम श्रीराधा पटरानी ॥ हसन लसन गृह विलास अधर सधर माधुरी विलोक रहेसि भूलि मंद गति बानी ॥१॥ फूलन की शेज फूलन की हीये हार फूलन के वर शृंगार ॥ फूली अंग न समानी 'फूलन के तने वितान फूल बनी है बात कूलेहे सघन वन मीन काल जानी ॥२॥। प्यारी जस गह्मो बीन उमड्यो जानो मनशेन कमल नैन चैन पायो रहे शिरहे लखानी ॥ दुलेहेनी दुलहलाल प्रेम प्रीती रुची रसाल अति विचित्र दुती रसाल 'निरखत राजधानी ॥३॥।
Phoolan Shringar - Asht Sakhi
NityaPad-265
Kanharo

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