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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Phoolan kii choli phoolan key cholana phool marthe phool haath kaanan mein phool .. | फूलन की चोली फूलन के चोलना फूल मार्थे फूल हाथ कानन में फूल ॥
फूलन की सेज नीकी फूलन के चंदुबा फूलन के बीजना 'फूलन फोदां फूल ॥१॥
फूलन के गेंदुवा तकीया फूलन के फूलन की गाल मसूरी फूलन के झबा सय्या आगें पाछें फूल ॥
फूलन के महल फूलन के चित्रसारी परदा 'परमानंद' प्रभु राधा माधव फूल ॥२॥ | Phoolan Shringar - Asht Sakhi | NityaPad-265 | Kanharo |
Benny gunthi kahaa kou jaane merrie see teree saun raathe | | बेनी गुंथि कहा कोउ जाने मेरी सी तेरी सौं राथे |
बिच बिच फूल सेत पित राते और कहा सिखई सौं राधे ॥ १ ॥
बैठे कुंवर सँवारत वारत कोमल कर कक ही सौं राधे ॥
“हरिदास के स्वामि नख सिख तैं सँवारी कोमल कर नख ही सौं राधे ॥२॥ | Phoolan Shringar - Asht Sakhi | NityaPad-265 | Kanharo |
Paag sohe latpati gulab key phoolan kulah bharein .. | पाग सोहे लटपटी गुलाब के फूलन कुलह भरें ॥
भ्रुकुटी विलास हास कुंडल कपोल झाई कोटिक मनमथ मनहंरे ॥१॥
कुंचित केश सुदेश तिलक रुचिर भाल माल मोतिनकी विचित्र भेख करें ॥
चतुर्भुजदास प्रभु गिरिधर ऐसी विधि ठाड़े मुरली अधरधरें ॥२॥ | Phoolan Shringar - Asht Sakhi | NityaPad-265 | Kanharo |
Phool mehelmein bethe maadho sanga vrishbhan dulari .. phoolan key | फूल मेहेलमें बेठे माधो संग वृषभान दुलारी ॥ फूलन के
हार सिंगार सब फूलन के: फूलमुकट सिर धारी ॥१॥ फूलसिंगासन फूल
गेंदुवा: फूलन बनि हे तिबारी ॥ फूलेगावत बेनु बजाबत: राग रंग रसभारी ॥२॥
फूले मधुप कोकिला कुजत फूले पवन सुखकारी ॥ श्रीविद्ठल गिरिधरको
निरखत: अखियां टरत न टारी ॥३॥ | Phoolan Shringar - Asht Sakhi | NityaPad-265 | Saarang |
Phool bhavanmein giridhar baithe phoolan koo shobhit singar .. | फूल भवनमें गिरिधर बैठे फूलन को शोभित सिंगार ॥
'फूलनको कटि बन्यो पिछोरा फूलन बांधे पेच संवार ॥१॥
फूलनकी बेंनीजु बनी शिर फूलनके जु बने सब हार ॥
फूलनके मुक्ता छबि छाजत फूलन लटकन सरस संवार ॥२॥
करन फूल फूलन कर पहोंची गेंदफूल जल करत बिहार ॥
राधा माधौ हसत परस्पर दास निरखत डारत तनवार ॥३॥ | Phoola ka Shringaar - Pichoro | NityaPad-266 | Kanharo |
Phool mahal baithi radhaju sakhee saheli sanga .. | फूल महल बैठी राधाजु सखी सहेली संग ॥
नानाभांतके भूखन पहरे फूलन सारी रही फबि अंग ॥१॥
फूलनकी चोली अंग फूलन बाजूबंध बनाये ॥
फूलनकी बेंनी सिर राजत फूलनकी रचिंमांग भराये ॥२॥
सीस फूल सिर धर प्यारी के फूले फूलन अलक संबारि ॥
हार बन्यो फूलनको उर पर तेसीय बनी छबि अति सुकुमारी ॥३।।
नवरंग लाल गोवर्धनधारी नवरंग बनी कुंज सुखकारी ॥
यह छबि निरख निरख निरख दोउनकी सूरदास तन मन धन वारि ॥४॥ | Phool ka Shringaar Dhare | NityaPad-266 | Kanharo |
Phool mahal baithe nandanandan phoolan tunn shobhit singar .. | फूल महल बैठे नंदनंदन फूलन तन शोभित सिंगार ॥
फूलनकीं पाग फूलनकों बागो फूलन पटका सरस संवार ॥१॥
फूलनको नखशिखलों गहेनो पहेरे लालन मदन मुरार ॥
फूलनको शिरपेच बन्यो शिर 'फूलन कटि बन्यो ईजार ॥॥२॥
तेसीय बनी राधिका प्यारी फूललकी झलकत तन सारी ॥
तेसेई बने नंदकेनंदन छबि पर सूरदास बलहारी ॥३॥ | Phool ki Paag | NityaPad-266 | Kanharo |
Jamuna tata syaam sunder useer rawati rachee raajat yuvati mandal madhya gopal laal pyaaro .. | जमुना तट स्याम सुंदर उसीर रावटी र ची राजत युवति मंडल मध्य गोपाल लाल प्यारो ॥
फूलन के आभूखन अंगअंग 'फबि रहे कुंजन के छाजे बेंठे देखत अखारो ॥१॥
कबहुक टोक करत सुबल संग श्रीदामा बाहु मधुमंगल कहत ब्रज रखवारो ॥
कृष्णदास सोई विद्डलेश गृह राजत ईन बलल्लभीयनके नेंनन तारो ॥२॥ | Phool ka Shringaar Dhare | NityaPad-266 | Kanharo |
Atee udaar mohanmere nirakhanen phooleri bichbich | अति उदार मोहनमेरे निरखनेंन फूलेरी बिचबिच
बरुहाचंद फूलनको सेहरो सोहे कुंडलकल श्रवननपर निगम -निगम झूलेरी ॥१॥
'फूलनकी मालगरे चंदन के चित्रकरें पीतांबर फेंट बांधे अंगन अनुकुलेंरी ॥
छीतस्वामी गिरिवरधर गायनको नामलेत टेरत सबठाड़ी भई कदम तरु भुलेरी ॥२॥ | Phool ke Sahera | NityaPad-267 | Saarang |
Phoolan koo mukut banyo phoolan koo pichhora tunn shobhit atee pyaari barr phoolan koo shungar . | फूलन को मुकुट बन्यो फूलन को पिछोरा तन शोभित अति प्यारी बर फूलन को शुंगार ।
कंठफूल बागो फेंटा फूलगादी गेंदुवा फूल हँस बेठे हें स्थामा स्थाम शोभा को नहीं पार ॥
फूलन के आभूषण वसन विराजत फूलन के फोंदा फूल उरहार ।
नंददास प्रभु फूले निरखत सुधि भूलें शुकदेव नारद शारद रटत वार बार ॥ | Phool ke Sahera | NityaPad-267 | Saarang |
Phool mahal mein baithe maadho sanga vrikhbhan dulari .. | फूल महल में बैठे माधो संग वृखभान दुलारी ॥
फूलनहार सिंगार फूलन को फूल मुकुट शिर धारी ॥२॥
फूल सिंघासन फूलगेंदुवा फूलन बनी है तिबारी ॥
फूले गावत बेमु बजावत राग रंग रस भारी ॥२॥
फूले मधुप कोकिला कूजत फूले पवन सुखकारी ॥
श्रीविद्ठल गिरिधरकों निरखत अखियां टरत न टारी ॥२॥ | Phool ke Sahera | NityaPad-267 | Kanharo |
Banaabanken byaahan aayo kirati sutaa badan dekh harkhaiya .. | बनाबनकें ब्याहन आयो किरति सुता बदन देख हरखैया ॥
पीतांबर मुक्तामाल सुभग उर सोहे लाल फूलको सहेरो शिर ढरकैया ॥१॥
मकर कुंडल कान मानों उदयो भान नखशिख बने सुजान सरस सुहैया ॥।
रसिक रसीले मेरे मन में ठसीले दास कुंभन छबि पर बलजैया ॥२॥ | Phool ke Sahera | NityaPad-267 | Kanharo |
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