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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Abgunth lavre malania sahero .. | अबगुंथ लावरे मालनिया सहेरो ॥
शुभघरी शुभदिन शुभपल महुरत बागो बन्यो सुनेरो ॥।१॥
हार चमेली गुलाब निवारों महेकत आवत केवरो ॥
बना बन्यो श्री वललभवर पिय श्री गोकुलमें गेहरो ॥२॥ | Phool ke Sahera | NityaPad-267 | Kanharo |
Banaa teree chaal atapati sohe .. | बना तेरी चाल अटपटी सोहे ॥
शीश फूलनको सहेरो बन्योहै अलक विलक मनमोहे ॥॥१॥
कर सिंगार चढे घोरीपर ले दरपन मुख जोहे ॥
हरिनारायन स्यामदासके प्रभु की उपमाकों नहीं कोहे ॥२॥ | Phool ke Sahera | NityaPad-267 | Kanharo |
Kunj mahal bunn baithe dulhaiya nava dulhani brakhbhan kishori .. | कुंज महल बन बैठे दुल्हैया नव दुलहनि ब्रखभान किशोरी ॥
पीत पागपर फूल सहेरो फूल वागो छुटे बंद सोरी ॥१॥
फूलन हार बन्यो अति शोभित फूलन गजरा फूल बन्योरी ॥
पुरबत गावत गिरिधर की रति कृष्णदास प्रभु संग ठग्योरी ॥२॥ | Phool ke Sahera | NityaPad-267 | Kanharo |
Gokulki panihari paniyan bharan chaali badebade nayana taame shobharahayo kajra .. | गोकुलकी पनिहारी पनियां भरन चाली बडेबडे नयना तामे शोभरहयो कजरा ॥
पहिरें कसुंभी सारी अंग अंग छबिभारी गोरीगोरी बहियनमें मोतिन के गजरा ॥१॥
सखी संगलिये जात हँसहँस बूझत बात तनहूँकी सुधि भूली सीस धरें गगरा ॥
नंददास बलहारी बिच मिले गिरिधा री नयनकी सैनन में भूल गई डगरा ॥२॥। | Panghat | NityaPad-268 | Bilawal |
Yuvati aavat dekhe shyam .. | युवती आवत देखे श्याम ॥
द्रमकी ओट रहे हरिआपन यपम्ुनातट गई बाम ॥१॥
जलहिलोरे गागरभर नागर जबहीं सीसउठायो ॥
घरकोचली जाय तापाछें सिरते घट ढरकायो ॥२॥
चतुरग्वार करगह्यो स्थाभमको कन कलकुटिया पाई।।
| Panghat | NityaPad-268 | Bilawal |
Dekho ree mohan panghat parr thaado haye nava nikunj taisiye sarad suhai raat . | देखो री मोहन पनघट पर ठाडो है नव निकुंज तैसीये सरद सुहाई रात ।
फूलको टिपारो बन्यो फूलनको मल्ककाछ फूलनके हार उर फूले 'फूले करत बात ॥१॥
फूलनको उपरैना फूलन पचरंग आन-आन भांति फूलके कुंडल छबि अति सुहात ।
फूलनकी बेनी सिर फूलन के बाजूबंद फूले फूले
“कृष्णदास' यह छबि कही न जात ॥२॥ | Tiparo | NityaPad-268 | Kanharo |
Panghat rokenhin rahat kanhai .. | पनघट रोकेंहीं रहत कन्हाई ॥
यमुनाजल कोऊ भरन पावत देखतही फिर आई ॥॥१॥
तबही श्याम एक बुद्धिउपाई आपन रहे छिपाई ॥
तट ठाढे जेसखा संग केतिनकों 'लियोबुलाई ॥२॥
बैठारे ग्वालिन को द्रमतर आपन फिरफिर देखत ।।
बडीबारभई कोई न आई सूरस्याम मनलेखत ॥३॥ | Panghat | NityaPad-268 | Bilawal |
Neekede haan mereen iduri ....| lejaihen chashumatighar aagein | नीकेदे हां मेरीं ईडुरी ॥॥| लेजैहें चशुमतिघर आगें
बहुरीमिलएके गुलरी ॥१॥ काहू नहीं डरात कन्हाई वाट घाट तुम करत
अचगरी ॥ यमुनादईईंड्री फटकारी और फोरी सब गगरी ॥२॥ भलीकरी
यहकुंबर कन्हाई आज मेटिहौं तुम्हारी लगरी ॥ चली सूर यशोमतिकेआगें
उराहनो ले तरुणी ब्रजसगरी ॥३॥ | Panghat | NityaPad-269 | Bilawal |
Ghatbhar daiho lakuti tabdehun ..| | घटभर दैहो लकुटी तबदेहूं ॥|
हमहुं बडेमहरकीबेटी हमतुमसों नाहिं डरेहूं ॥१॥
मेरी कनकलकुटी देरी मैं भरदेहों नीर ॥
बिसरगई सुध तादिनकी तुम हरे सबनके चीर ॥२॥
यहबानी सुन विवशभई तनकी सुध बिसराई ।॥
सूर लकुटकरगिरतन जानी स्याम ठगोरी लाई ॥३॥। | Panghat | NityaPad-269 | Bilawal |
Abahi dardere induria merrie pachrang | अबही डारदेरे ईंडुरिया मेरी पचरंग
पाटकी ॥ हाहाखात तेरेपैयापरतहों इतनोंलालचमोहि मथुरानगर के
हाटकी ॥॥१९॥ जो न पत्याउ जाय किनदेखो मनमोहन हैंजु डाटकी ॥
मदनमोहनपिय झगरो कौन बद्यों सोदेखेंगी लुगाईं वाटकी ॥२॥ | Panghat | NityaPad-269 | Bilawal |
Arihaun shyam mohini ghaali .. abahi gaee jalbharan | अरीहौं श्याम मोहिनी घाली ॥ अबही गई जलभरन
अकेली नंदनंदन चितवन उरसाली ॥१॥ कहारी कहों कछु कहत न आवबे
लगी मरमकी भाली ॥ सूरदासप्रभु मनहरलीनो विवशभई हौोंआली ॥२॥ | Panghat | NityaPad-269 | Bilawal |
Dekho juu mohan | देखो जू मोहन
काहू अबै मेरी ईंडुरी दुराई ॥ सूधेसूधे बेगि किनमानों यह कौन कीनी
चतुराई ॥१॥ कछूजो परस्पर करत सेनाबेनी ताहि मोहि किनदेहो बताई ॥
सबे सम िट यहां कहत कौनसों ताकी फेंट पक्र किनधाई ।।२॥ जापे होय
वेगकिन आनों ताहिहै ब्रजराजदुहाई ॥ गोविंदप्रभु कछु हँसत बहुत से मेरे जान
तुमहिं चुराई ॥३॥ | Panghat | NityaPad-269 | Todi |
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