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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Mohi jalbharan dere kanhaiya ..
मोहि जलभरन देरे कन्हैया ॥ और नागर सब गागर लेगंई मोहि रोकतहै घरमग जोवे मेरीमैया ।। १ ॥। मेरोकह्यों तूमानलेहो मोहनसुनहो कुंवर बलदाऊजूकेभैया ॥ कुंवरसेन के प्रभु आनहीं कीजे हौं तोतेरी लेहों बलैया ॥२।।
Panghat
NityaPad-269
Bilawal
Kiye chatakamatak thadoi rahat panghatpar paniharanso karatatok .. kahuko takatang kahuko taktarang kahuki induri lait kaahuson
किये चटकमटक ठाडोई रहत पनघटपर पनिहारनसो करतटोक ॥ काहूको तकतअंग काहूको तकतरंग काहूकी ईंडुरी लेत काहूसों कहत पानी प्याओरी ओक ॥१॥ काहूकी आंखसिरानी काहूकी कंचुकीकुच काहूकों चलत देत भुजकीझोक ॥ चतुरबिहारीगिरिधारीतुम बहुत भये हो नातर अबहीगिनिदेहों रोक ॥२॥।
Panghat
NityaPad-269
Bilawal
Aaee huun abahin dekh subhag sunder bhekh thaado larka aeka rupco bhee baro .. paradani fabat patuka kanth parr karurat karau namaat maaee badan
आई हुं अबहीं देख सुभग सुन्दर भेख ठाड़ो लरका एक रूपको भी बरो ॥ परदनी फबत पटुका कंठ पर करुरत करउ नमात माई बदन नाई भांवरों ॥१९॥ नीर यमुना तीर भर धरि गागर जबहीं उठाय देत देखत सब गांवरों ॥ टोकत आवत जात नरनारी कहत युं कियो कारज भलो भरत नहिं भामरो ॥२॥ टरत कैसें अंक लिख्यो मम भाग्य में कहेवो करो कोऊ धरत केरो नांवरो ॥ दास परमानंद नंदमंदन कुंवर हृदय में बसत माई मेरे री सांवरो ॥३॥
Panghat
NityaPad-270
Saarang
Houn paniya naan jaihon merrie
हों पनिया न जैहों मेरी मटुकी झटककर पटकी ॥ अचानकआन गहीहों सांवरे मेरेसेंग की सबसब सटकी ॥१॥ काल्हि दुपहरगईहूं कुंजमें कोजाने याघटकी ॥ प्रभुकल्याण गिरिधरकी माधुरी सो मेरेनयन अटकी ॥२॥
Panghat
NityaPad-270
Bilawal
Jaba hii
जब ही में देख्यों नागर नंद को मन भई प्रीति करिवेकी कहु अचरा इंडुरी डारी दई कहें गागरि सुधि विसरी गई भरिवेकी । चित चुभि रही छबीलेकी छबि सैनेन से दे मन हरिवेकी ॥ ब्रजपति देह दितापित कित भई रहें तन मग पग धरवेकी ।।
Panghat
NityaPad-270
Todi
Houn kitt
हों कित जाऊंरी कौन घाट कौन वाट कित कहुंपाऊं अरी नंदनंदन ॥ ले गयोरी मन मानिक मेरो दे गयोरी धीरनिकंदन ॥१॥ मुरलीबजायकें कसकस मोहन बस कीमी व्रजचंदरी ॥। रसिकप्रीतम कोऊ कैसें बसिहैं या छैलके छैलफंदरी ॥॥२॥। (की! राग कानहरो
Panghat
NityaPad-270
Bilawal
Tuu raadhe ! nutt naval nagri . gaj-gati gaban karati madhu
तू राधे ! नट नवल नागरी । गज-गति गबन करति मधु व्यासनि चली जमुना-जल भरन गागरी ॥ उर पर हार सिंगार बन्यो है कटि मेखला चरन झांझरी । अंबु लैन कहें चली अकेली संग लाडिलौ करत लागरी ॥। देखि बदन मोहे गन गंधर्व गयो निसापति गगन भागरी ॥ परमानंद प्रभु सब सुखदाइक लालन जूके कंठ लागरी ॥|
Panghat
NityaPad-270
Kanharo
Ebal aavat dugger
एबाल आवत डगर डगरी ॥ रतनजटित पटकीये री ओट शीश बिराजत तापर कनक गगरी ॥१॥। भोंहरुर वीदीये छब्वलीसो दसन बसन साजे शोभा राजत सगरी ॥ नंददास नंदलाल रीझे पाछें चल आवत बोलत बचन अचगरी ॥२॥
Panghat
NityaPad-270
Todi
Gwalini krishnadarsason ataki ..
ग्वालिनि कृष्णदरससों अटकी ॥ बारबार पनघट परआवत सिर यमुनाजल मटकी ॥१॥ मनमोहन को रूप सुधानिधि पीवत प्रेमस गटकी ॥ कृष्णदास धन्यधन्य राधिका लोकलाज सब पटकी ॥२॥
Panghat
NityaPad-270
Aasawari
Jalakon gaee sughat neh bhar laaee parihai chatpati darshaki ita mohangas uta
जलकों गई सुघट नेह भर लाई परीहै चटपटी दरशकी इत मोहनगास उत गुरुजनत्रास चित्रलिखी ठाड़ी नामधरत सखी परसकी ।॥॥१॥ टूटे हार फाटेचीर नयनन बहत नीर पनघट भई भीर सुधि न कलशकी ॥ नंददास प्रभुसों ऐसी प्रीति गाढी बाढ़ी फैलपरी चायन सरस की ॥२॥
Panghat
NityaPad-271
Adano
Moondariya merrie joe gaee neend parr purry raine sagari .. yaahi tey
मूंदरिया मेरी जो गई नींद पर परी रैन सगरी ॥ याही ते झटपटात उठी आई चटपटी जिय में बहुत भईरी ॥१॥ तुम्हारो कान्ह पनघट खेलत हौ बूझो हों महरी हँसी होय लई ।| बिसरत नहीं नगीना चोखौ हृदय ते टरत न झलक नई ॥२॥ चतुर्भुज प्रभु गिरिधर चलौ मेरे संग देहों दही चाहौ जितई ॥ मेरी वह जीवन मोहि कोऊ दोऊ तुव चरनन की चेरी व्हे जु बिपतई ॥३॥
Panghat
NityaPad-271
Saarang
Paniyan naan jaauun ree aalee nandanandan
पनियां न जाऊं री आली नंदनंदन मेरी मटरी पटक के झटकी ॥ चक्‍क दुपहरी में अटकी कुंजन लों कोऊ न जाने घट घटकी ॥१॥ कहा करों कछु बस नहीं मेरौ नागर नट सों अटकी ॥ नंददास प्रभु की छबि निरखत सुध न रही पनघट की ॥२॥
Panghat
NityaPad-271
Saarang

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