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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Soney kii gagar laike paniyan bharan chully
सोने की गागर लैके पनियां भरन चली यमुना के नीर तीर धुन सुन अटकी ॥ नंद को दुलारी प्यारौ मुरली बजावें ठाड़ौ दुगन की चोट मेरे हिये मांझ खटकी ॥१॥ एक घरी उ्हे जु भई तन की सुध न रही ठगोरी सी ठाड़ी भई देखन रूप चटकी ॥ धोंधी के प्रभु प्रेम कौ प्रवाह चाल्यौ लोक कुल लाज काज सब दियौ पटकी ॥२॥
Panghat
NityaPad-271
Saarang
Houn
हों पनघट जाऊं सुनरी आली पनघट जात ही पन घट जैये ॥ ठाड़ौ रसिक नंद कौ नंदन नेक चिते सब मन हर लैहें ॥॥१॥ रसिक गोपाल रसीली मुरली यह दोऊ मिल के पराधीन कर दैहें ॥ धोंधी के प्रभु एक से भये दोऊ मेरी सीख सुन तू भूले जिन जैहें ॥२॥
Panghat
NityaPad-271
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Jamunan nadiya key tata . panyo bharati akeli aughat gahizu sthaam merrie lutt ..1.. sir dhari
जमुनां नदिया के तट । पान्यो भरति अकेली औघट गहिज़ु स्थाम मेरी लट ॥१॥ सिर धरि गगरी मारग डगरी पहरि लिए पीरे पट । देखत देह अधिक छबि लागी कछुक बने कंचुकी -कट ॥२॥ फूल जु एक ग्वालिनिके जिय जनु रन जीते कोऊ भट। “परमानंद गोपाल आलिंगी सफल किए कंचन घट ॥३॥
Panghat
NityaPad-271
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Dekhauri mohan panghat parr thaado haye nava nikunj taisiye sarad suhai raat . phool kau
देखौरी मोहन पनघट पर ठाडो है नव निकुंज तैसीये सरद सुहाई रात । फूल कौ टिपारो बन्यो फूलन कौ मल्‍लकाछ फूलन के हार उर फूले-फूले करत बात ॥१॥ फूलन को उपरैना फूलन पचरंग आन-आन भांति फूल के कुंडल छबि अति सुहात । फूलन की बेंनी सिर फूलन के बाजूबंद फूले फूले कृष्णदास' यह छबि कही न जात ॥२॥
Panghat
NityaPad-272
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Thadoi dekho
ठाडोई देखो यमुनाघाट ॥ कहा भयो घर गोरस बाढ्यो और गोधनके ठाट ॥१॥ जातपांत कुलको न बडोहै चले जाहु किन वाट ॥ परमानंदप्रभु रूपठगोरी लागत नपलक कपाट ॥२॥
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NityaPad-272
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Ghaat parr thaade srimadangopal ..
घाट पर ठाडे श्रीमदनगोपाल ॥ कौन युक्तिकर भरोंरी यमुनाजल पर्‌योहै हमारे ख्याल ॥१॥ द्योसबढ्यो घर सासरिसैहै चलन सकत एक चाल ॥ कहाकरूं अब यों नहीं मानत सुंदर नंदकोलाल ॥२॥ कछुक संकोच कछु चोंप मिलनकी परी प्रेमकी जाल ॥ परमानंदस्वामी चितचोर॒यो बेणु बजाय रसाल ॥३॥
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NityaPad-272
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Aavatahi yamuna bhar paani .. sthaamroop
आवतही यमुना भर पानी ॥ स्थामरूप काहूको ढोटा बाकी चितवन मेरी मैल भुलानी ॥१॥ मोहन कहो तुमको या ब्रज हमें नाहि पहिचानी ॥ ठगीसी रही चेटकसो लाग्यो तब व्याकुल मुख फुरत न बानी ॥२॥| जादिनते चितयेरी मोतन तादिनते हरिहाथ बिकानी ॥ नंददासप्रभु यों मनमिलियो जों सागर में पानी ॥३॥
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NityaPad-272
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Neck laal teko merrie bahiyaan .. oghat ghaat chadhyo nahin jaaee rapatahon kalindi
नेक लाल टेको मेरी बहियां ॥ ओघट घाट चढ्यो नहिं जाई रपटतहों कालिंदी महियां ॥१॥ सुंदरस्याम कमलदललोचन देख स्वरूप ग्वाल उरुझानी ॥ उपजी प्रीति काम उरअंतर तब नागर नागरी पहिचानी ॥२॥ हँस ब्रजनाथ गह्मयों करपललव जैसें गगरी गिरन न पावें ॥ परमानंद ग्वालिनी सियानी कमलनयन कर परस्यो भावे ॥३॥
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NityaPad-272
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Lalan uthaay deho merrie
ललन उठाय देहो मेरी गगरी ॥ बलबल जाऊं छबीले ढोटा ठाढे देत अचगरी ॥९॥ यमुनातीर अकेली ठाढी दुसरो नाहिन कोऊ ॥ जासों अब कहों स्थामघन सुंदर संगबनाहि नसोऊ ॥ २ ॥ नंदकुमार कहें नेक ठाढी रहे कछुक बात कर लीजे ॥ परमानंदप्रभु संग मिले चल बातनके रसभीजे ॥३॥
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NityaPad-272
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Akeli mutt jaiyo
अकेली मत जैयो राधे यमुना के तीर || बंशीवट में ठग लागत है सुन्दर श्याम शरीर ॥१॥ विन 'फांसी बिन भुजबल मारत बिन गाँसी बिन तीर ॥ वाके रूप जाल में फंसि के को बचि है ऐसो बीर ॥२॥ घर बैठो भर देऊं गगरिया मन में राखो धीर ॥ बीरन पान करन हम त्याग्यो कालिन्दों को नीर ॥३॥ धन सुत धाम गये नहिं चिंता प्राण गये नहिं पीर ॥ सूरदास कुल कान गये ते धिक धिक जन्म शरीर ॥४॥
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NityaPad-273
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Paniyan naan jaauun ree aalee nandanandan merrie mataki patak key
पनियां न जाऊं री आली नंदनंदन मेरी मटकी पटक के झटकी ॥ चक्क दुपहरी में अटकी कुंजन लों कोऊ न जाने घट घटकी ॥॥१॥ कहा करों कछु बस नहीं मेरी नागर नट सों अटकी ॥ नंददास प्रभु की छबि निरखत सुध न रही पनघट की ॥२॥
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NityaPad-273
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Aavat ree yamuna bhar paani .. saanware varan dhota kaunkori maaee baaki chitwan
आवत री यमुना भर पानी ॥ सांवरे वरण ढोटा कौनकोरी माई बाकी चितवन मेरी गैल भुलानी ॥१॥ हों सकुंची मेरे नयनहु सकुचे इन नयनन के हाथ बिकानी ॥ परमानंदप्रभु प्रेमसमुद्र में ज्यों जलधरकी बूंद समानी ॥॥२॥
Panghat
NityaPad-273
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