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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Chhabile lalki yeh baanik varnat barni | छबीले लालकी यह बानिक वरनत बरनी
नजाई ॥ देखत तनमनधन कर न्योछ ावर आनंद उर न समाई ॥१॥
कंदमूल फल आगें धरकें रही हैं सकल सिरनाई ॥
गोविंदप्रभु पियसों रतिमानीपठई रसिक रिझाई ॥२॥ | Utthapan | NityaPad-276 | Poorvi |
Preetam pyaare nehin mohi .. | प्रीतम प्यारे नेहीं मोही ॥
नेंकु चिते इत चपल नैन सों कहा कहों ? हों तोही ॥१॥
कहा री ? कहों मोहिं रह्मौ न भावै जब देखों चित गोही ॥
'छीत-स्वामी' गिरिधरन निरखिके अपुनी सुधि हों खोही ॥२॥ | Utthapan | NityaPad-276 | Nat |
Laalan naahinne ree kaahake basake.. bawri | लालन नाहिंने री काहके बसके।। बावरी
भईरी त्रिया उनसों मन अरुझायो बेतो सदाई अपने रसके ।।|१ ॥|
निरखपरख देख जियको भरम गयो कामिनीबृंदन के मनन कसके ॥
त्दपि कछु मोहनी गोविंदप्रभुपै युवतीसभामें बदत यशके ॥२॥
| Utthapan | NityaPad-276 | Nat |
Raadhe tere gawat kokila gann raheri maundhar .. piyake gawat | राधे तेरे गावत कोकिला गण रहेरी मौनधर ॥ पियके गावत
मेंनारहे मुखमोर कोटिमदनमोहनको लियो मनहर ॥१॥
कुंजमहल में मोहन मधुरता नराखी वितानतर ॥
गोविंदप्रभु रीझ हृदयसों लगाई वृषभान कुंवर ॥२॥
| Utthapan | NityaPad-276 | Nat |
Subal sridama kahyo sakhanso arjun shankh bajaiye .. | सुबल श्रीदामा कह्यो सखनसो अर्जुन शंख बजैये ॥
घर जैवेकी भई है बिरियां श्रीगिरिधरलाल जगैये ॥१॥
ठौर ठौरते मधुरी धुनिबाजे मधुरमधुर स्वरगैये ॥|
कुंजसदन जागे नंद नंदन मुदित बीरा फल लैये ॥॥२॥
हरिदासवर्यके पूरे मनोरथ गोकुल तापन शैये ॥|
लटकत आवत कमल फिराबत परमानंद बढेये ॥३॥ | Utthapan | NityaPad-276 | Nat |
Rasaheemen vash keene kunwarkanhai .. rasik gopal rasahi reejhat rasmil russ tyaj maaee ..1.. | रसहीमें वश कीने कु ंवरकन्हाई ॥ रसिक गोपाल रसही रीझत रसमिल रस त्यज माई ॥१॥
पियको प्रेम रस सुन्योहै रसीली बाल रसमें वचन श्रवणन
सुखदाई ॥
चतुर्भुजप्रभु गिरिधर सब रसनिधि रसता मिलहै रहसि हृदय लपटाई ॥२॥
| Utthapan | NityaPad-276 | Nat |
Ladile yeh jall jinahin piyo .. | लाडिले यह जल जिनहिं पियो ॥
जब आरोगत त्तब भरलाऊं तातो डार दियो ॥१॥
उठो मनमोहन वदन पखारो सुंदरलोट लियो ॥
तुम जानत हम अबही पोढे पहरहि द्योस रह्मो ॥२ ॥
सुन मृदुबचन स्थाम उठ बैठे मान्यो मात कह्यो ॥
परमानंद प्रभु भयेहें भूखे मैया मेवा दीयो ॥३॥ | Utthapan | NityaPad-276 | Nat |
Yaa vrajate kabahu naan taronri .. | या ब्रजते कबहु न टरोंरी ॥
बंसी बट मंडपबेदी रच कुंवर लाडीलो लाल वरोंरी ॥१॥
इत जमुना उत मान सरोवर भावर दोडउ बीच भरोरी ॥
श्री वृषभान प्योसार हमारो जस अपजसतें हों न डरोरी ॥ २ ॥
कुंज कुटी निज धाम हमारो उमग-उमग रस रंग भरोरी ॥
परमानंद स्वामी रतिनायक नंद नंदन सों मिल केल करोंरी ॥३॥ | Utthapan | NityaPad-276 | Saarang |
Sohat giridhar mukh mriduhas .. koti madan | सोहत गिरिधर मुख मृदुहास ॥ कोटि मदन
करजोर उपासित विगलित भ्रूविलास ॥ १॥ कुंडललोल कपोलनकी छबि
नासामुक््ता प्रकाश ॥ शोभासिंधु कहांलों वरनों बारने गोविंददास ॥२॥ | Utthapan | NityaPad-276 | Nat |
Gwal kahat sunohon kanhaiya .... | ग्वाल कहत सुनोहों कन्हैया ॥॥
घर जेवेकी भई बिरीयां दिन रह्यो घड़ी छेयां ॥ १ ॥
शंखधुन सुम उठे हैं मोहन लावो हो मुरली कहां धरैया ॥
गैयां सगरी बगदावो रे धरको टेर कहत बलदाऊपैया ॥२॥
कंदमूल फल तरमेवा धरी ओटि किये मुरकैया ॥|
अरोगत ब्रजराज लाडिलो झूंटन देत लरकैया ॥३॥।
उत्थापन भयो पहोर पाछलो वृजजन दरस दिखैया ॥
परमानंद प्रभु आये भवनमें शोभा देख बल जैया ॥।४॥ | Utthapan | NityaPad-276 | Poorvi |
Chaaru kundal kii jhalak .. | चारु कुंडल की झलक ॥
कुमकुम को तिलक बन्यो कुटिल न बड अलक ॥१॥
हरि को मुख कमल देखे लागत नाहि पलक ॥
मोर मुकट सीस मनसिज की मलक ॥२॥
श्याम सुंदर देखन को आवत जीय ललक ॥
परमानंद स्वामीगोपाल नेन की सलक ॥।३॥ | Utthapan | NityaPad-277 | Saarang |
Sundarta | सुन्दरता
गोणले सोहे ॥
कहत न बने मेनन मन आनंद जाहि देखत रति नायक मोहे |। १ ॥।
सुंदर चरन कमल गति सुन्दर गुंजा फुल अवतंस।
सुंदर बनमाला उर मंड ित सुंदर गिरा मनहु कलहंस ॥२॥
सुंदर बेनु मुकट गुन सुंदर सब अंग स्यथाम
सरीर।॥ सुंदर बदन बिलोकनि सुंदर सुंदर ते सुंदर बलबीर ॥३॥
वेद पुरान निरुषित बहु विध परि ब्रह्म रूप नराक्रति वास ॥
बलबल जाउं मनोहर मूरत रहे बसो परमानंददास ॥४॥ | Utthapan | NityaPad-277 | Saarang |
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