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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Chandan sugandh anga lagaay aaye merey grih hamahi mug jovat laal tiharohe ..
चंदन सुगंध अंग लगाय आये मेरे गृह हमही मग जोवत लाल तिहारोहे ॥ ढीले ढीले पग धरत घामके सताये लाल बोलहु न आवे बैन कोनके बचन पारेहो ॥१॥ बैठो लाल सीतल छांह श्रमहुको निवारन होय सीतल जल यमुनाको अनेक भांति पीजिये ॥ नंददास प्रभु प्रिय हमतो दरसकी प्यासी ऐसी नीकी करों कृपा-मोहि दरस दीजिये ॥२॥
Useer Bhoj Darshan
NityaPad-277
Saarang
Abahi lagaay gaye merey geh kahaan mett aaye laal argaja angko .
अबही लगाय गये मेरे गेह कहां मेट आये लाल अरगजा अंगको । नैन सिथिल अरु बैन सिथिल भये रंग लग्यो परसंगको ॥१॥ सुन पिया वचन अंक भर लीनी मेट्यो ताप उर विरह अनंगको । परमानन्द स्वामी की जीवन चित चोर्यो अरधंगको ॥॥२॥
Useer Bhoj Darshan
NityaPad-277
Hameer
Chandan kii khor kiye chandan ghas anga lagaabe sondheki lapat jhapat pawan faharanmein ...
चंदन की खोर किये चंदन घस अंग लगाबे सोंधेकी लपट झपट पवन फहरनमें ॥। प्यारी के पिया को नेम पियके प्यारी सो प्रेम अरसपरस रीझ रीझावे जेठकी दुपेहरीमें ।।१॥ चहुं ओर खस सँवार जल गुलाब डारडार सीतल भवन कियो कुंज महलमें ॥ सोभा कछु कही न जाय निरख नैन सचुपाय पवन ढुरावे परमानंददास टहलमें ॥२॥
Useer Bhoj Darshan
NityaPad-277
Saarang
Jhanak vaar mohan aavani bhaee ..
झनक वार मोहन आवनि भई ॥ राधे बिलोकत द्वार ॥ इक दृग अंजन मंजन कीयें इक उमंग चोंप लिये नई ॥१॥ बसनन कों अग्र धूप आभूषन अति अनूप चंदन ख्ौर लिलाट दई ॥ ' मैंन' के प्रभु दरस हित कारन वृषभानु नन्दिनी रति लई ॥२॥
Useer Bhoj Darshan
NityaPad-278
Saarang
Madan gopal hamaare aavat anand mangal gaaoongi ..
मदन गुपाल हमारे आवत आनंद मंगल गाऊंगी ॥ जल गुलाब के ढोरी अरगजा पायन चंदन लगाऊंगी ॥१॥ सीतल चंदन सुखद के साजति कुच भुज बीच बसाऊंगी ॥ 'कुंभनदास' लालगिरिधर को जो एकांत कर पाऊंगी ॥२॥
Useer Bhoj Darshan
NityaPad-278
Saarang
Kunj mahal key angan baithe sriradha arr girivar dhaari ..
कुंज महल के अंगन बैठे श्रीराधा अर गिरिवर धारी ॥ जल बीरा चंदन वनमाला सखी कर लै ढोरत बीजनारी ॥१॥ छूटत हैं चहुँ और फुहारे सीतल पवन बहुत सुखकारी ।| छाई घटा छटा कहा बरनू मंद मंद चमकत चपला री ॥२॥ हंस चकोर परेवा बोलत नाचत मोर गावत कोकिला री ॥ कृष्णदास प्रभु ले कर बीना बजवत रिझवत प्रान पियारी ॥३॥
Useer Bhoj Darshan
NityaPad-278
Adano
Teree yeh hansan piya koo pyaari atee bhaavan ..
तेरी यह हँसन पिय को प्यारी अति भावन ॥ चोंप झलक छुटी विधु बदन अलक जातें नीकी लागत कंचुकी कसन ॥।१॥ अंग अंग भूषन अति हि बिराजत ठौर ठौर अरगजा भींज रहे बसन ॥ “चतुर बिहारी गिरिधारी हिलि मिलि बैंठें रीझि रीक्ि रस रसन ॥२॥
Useer Bhoj Darshan
NityaPad-278
Saarang
Jall que‍yon naan piyo laalan joe hoe piyaa tum pyaase .
जल क्‍यों न पियो लालन जो हो पिया तुम प्यासे । भरि लाई जमनोदक सीतल पीवत क्‍यों अलसाते ॥१॥ जल के मिस तुम डोलत घर घर नवल त्रियन रस माते । चतुरबिहारी पिय प्यासे हो तो पानी प्रियो हो जोबन के माते ॥२॥
Useer Bhoj Darshan
NityaPad-278
Saarang
Uparna shyam tamalko .. tedho
उपरना श्याम तमालको ॥ तेधो कांहां लीयो द्रज सुंदी ललित त्रिभंगी लालकों ॥१॥ सुभग कलेवर प्रगट देखीयत हाथन कंगना जालको ॥ तु रस मगन नहीं मन समझत बालकेली ब्रजख्यालको ॥२॥ निशदिन रहत गोपाल ग्वाल संग चंचलनयन विशाल को ॥ परमानंदप्रभु गोधन चारत मत्त गयंद कर चालको ॥३ ';
Useer Bhoj Darshan
NityaPad-278
Saarang
Tanak pyaay deree paani yeh miss gayo baake geh ..
तनक प्याय देरी पानी यह मिस गयो बाके गेह ॥ समज सोच भर लाई जल अचवावन को ओक ढीली करि फेर वाईको मुख चितयो तब ग्वालन मुसकानी ॥१॥ बे जल वेसेंहू डायों फेर जल भरि लाई हों अचवाय न जानो बोली मधुरी सी बानी । चतुर बिहारी तुम प्यासे हो तो पानी पियो नातर पांओ धारीये रावरी प्यास मैं जानी ॥२॥
Useer Bhoj Darshan
NityaPad-278
Saarang
Teddy alak lasat pagiyan .. tedhhi chaal chalat surbheet sanga
टेडी अलक लसत पगीयां ॥ टेढी चाल चलत सुरभीत संग टेडी भ्रकुटी अंग मटक ॥।१॥ टेढे तान मुरली बजावत टेडी लकुटीन गायन हटकत ॥ परमानंद दास को ठाकुर टेडी युवती लेत बलैया कर चटकत ॥२॥।
Useer Bhoj Darshan
NityaPad-279
Hameer
Latkat chalat yuvati sukhdani sandhyaasmein sakhamandal mein
लटकत चलत युवती सुखदानी संध्यासमें सखामंडल में शोभित तनगोरज लपटानी ॥१॥ मोरमुकुट गुंजा पीरोपट मुखमुरली गुंजत मृदुबानी ॥ चतुर्भुजप्रभु गिरिधारी आयेबनतें ले आरती वारत नंदरानी ॥२॥
Sandhya Aarti
NityaPad-279
Gori

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