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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Pichhvaarevhe boll sunaayon gwalin .. kamalanayan pyaaro | पिछवारेव्हे बोल सुनायों ग्वालिन ॥ कमलनयन प्यारो
करत कलेऊ कोरन मुखलों आयो ॥|१॥ अरी मैया एक वन व्याई गैया बछरा
उहां विसरायो ॥ मुरली न लई लकुटिया न लीनी अरबराय कोऊ सखा न
बुलायो ॥२।। चकृत भई नंदजुकी रानी सत्य यह केंधों समनो आयों फूले गातन
मात रसिक बर त्रिभुवनराय शिरछत्र छायो ॥।३॥ बैठे जाय एकांत कुंजमें कियो
विविध भांत मन भायो ॥ परमानंद सयानी ग्वालिन उलट अंक गिरिधर पिय
पायो ।।४॥। | Kaleoon | NityaPad-029 | Ramkali |
Ladili laal sez uthh baithe sakhijan mangalbhog dharaave . | लाडिली लाल सेज उठ बैठे सख्ीजन मंगलभोग धरावे ।
कंचनजडित थारमें मोदक ले कर ललिता हरि ढिंग आवे ॥ १॥ देत परस्पर कोर
बदन में नैन उनीदे अति अरसावे | मृदु मुसिकात मोद बढावत दास निरख के
बल-बल जावे ॥ २॥ | Kaleoon | NityaPad-030 | Bibhaas |
# raag malcons # karat kaleu mohanlal .. makhan mishree dood malaai meva | # राग मालकोंस # करत कलेऊ मोहनलाल ॥ माखन मिश्री दूद मलाई मेवा
परम रसाल ॥ १॥ दधि ओदन पकवान मिठाई खात खबावत ग्वाल ॥ छित-
स्वामी बन गाय चरावन चले लटकि गोपाल ॥॥२।। | Kaleoon | NityaPad-030 | Malkos |
Lehu lalan kachhu karhu kaleu apune haath jimaaungi. seetal | लेहु ललन कछू करहु कलेउ अपुने हाथ जिमाऊंगी। सीतल
माखन मेल जु मिसरी कर कर कोर खवाऊंगी ॥ १॥
ओद्यो दूध सद्य धोरीकोसियरो कर कर प्याऊंगी ॥
तातो जान जो नहि सुत पीवत पंखा पवन ढुराऊंगी ॥ २॥
अमित सुगंध सुवास सकल अंग कर उबटनो गुन गाऊंगी।
उष्न सीतल हु न्हवाय लुछीने चंदन अंग लगाऊंगी ॥३॥
त्रिविध ताप नस जात देख छबि निरखत हियो सिराऊंगी।
परमानंद सीतल कर अंखियाँ बानिक पर बलजाऊंगी ॥४।। | Kaleoon | NityaPad-030 | Bibhaas |
Maangat dadhi makhan uthh praat. houn dadhi mathan karanakon baithi tahaan | मांगत दधि माखन उठ प्रात। हों दधि मथन करनकों बैठी तहां
आय अरबरात ॥।१॥ कद्यो जशोदा देहो रोहनी हँस हँस बैठे खात। श्रीज्रजपति
पिय मांग लेत हैं कहि कहि तोतरी बात ॥२॥। | Kaleoon | NityaPad-030 | Bibhaas |
Karat kaleu dou bhaiya.. rotty rasal makhan mein misari mell | करत कलेऊ दोउ भैया॥ रोटी रसाल माखन में मिसरी मेल
खवावत मैया ॥१॥| काचो दूध सद्य धौरीको तातो कर मथ प्यावत घैया | कर
अचवन बीरा ले ब्रजपति पाछे चले चरावन गैया ॥२॥। | Kaleoon | NityaPad-030 | Ramkali |
Oon kahaa kahuun chhabi karat kaleu .. | ऊँ कहा कहूँ छबि करत कलेऊ ॥
थार साज बिंजन धर राखे कर कर कोर मुख देऊ ॥।१॥
गरज गरज बरसत चहुँदिसतें मनमोह न कछु ओर ही लेऊ ॥
सुनत वचन जननी के सूर प्रभु कही न जात मुख से हू ॥॥२॥ | Kaleoon | NityaPad-030 | Malhaar |
Rahee urr laay lalan kachhu khenho ..| bahu meva pakwann mithaai | रही उर लाय ललन कछु खेंहो ॥| बहु मेवा पकवान्न मिठाई
जो भावे सो लेहो ॥१॥| जेवबुंगो जब कही मेरी करि हां मोहि बाबा की आन॥।
गोपीजन ब्रजवासी बोले अरू बोले वृषभान ॥।२॥ इंद्र ही मेटी गोवर्द्धन थापे
कान्ह कही सो मानी ॥ ग्वाल बोल हरी संग बैठारे परोसत हें नंदरानी ॥ ३॥। हरि
हलधर जब कियो कलेउ जननी तात सुख पायो ॥ ब्रजबासी एकंत व्हे बैठे
सूरश्याम मन भायो ॥।४॥ | Kaleoon | NityaPad-030 | Devgandhar |
Jenvav laal ladili raajen . lalitaadik sakhee sakal parosat kanak-paatr-madhya saajen .| 1.. | जेंवव लाल लाडिली राजें । ललितादिक सखी सकल परोसत कनक-पात्र-मध्य साजें ।| १।।
कर मनुहार जिमावत प्यारो प्यारी जेंबत लाजें।
रसिक प्रीतम तहां करत कलेऊ विविध मनोरथ साजें ॥ २॥ | Kaleoon | NityaPad-031 | Malkos |
Makhan mohi khawad ree maiya ! buddy baar bhaee haye bhookhe humm | माखन मोहि खवाड़ री मैया ! बडी बार भई है भूखे हम
हलधर दोऊ भैया ।। बडी कृपन देखी तू जननी ! देति नहीं अध घैया ।
'परमानंददास' की जीवनि ब्रज-ज न केलि करैया। | Kaleoon | NityaPad-031 | Devgandhar |
Uuthomere laal kaleu kije .. madhumeva pakwan mithaai sadyadudh | ऊठोमेरे लाल कलेऊ किजे ॥ मधुमेवा पकवान मिठाई सद्यदुध
धोरी को पीजे ।॥१॥ टेरत ग्वाल बाल खेलनको मोर मुकट मुरली कर लीजे॥।
ईतनि सुनत बेहेस ऊठ बेठे सुरयेहे देखत सुख जीजे ॥२॥ | Kaleoon | NityaPad-031 | Bhairav |
Jasoda painde painde dole ! ita grih kaaraj uta suta kau daru duhuun | जसोदा पैंडे पैंडे डोले ! इत गृह कारज उत सुत कौ डरू दुहूँ
भाँति मन तोलै ॥ आवहु कुँवर ! तुम करहु कलेऊ जननि रोहिनी बोलै ।
परमानंद स्वामी फिरि चितयो आनंद हृदय कलोलै ॥ | Kaleoon | NityaPad-031 | Saarang |
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