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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Aavat hain aagede gaiyaan ..1.. | आवत हैं आगेदे गैयां ॥१॥
सुबल सुबाहु श्रीदामा संगी क्वणितवे णु नितहीकी नैयां ॥१॥
एकवेपेज करतहै ठाढे धाय छुब॒त वे स्थामकी छैयां ॥
हम आगें तुम पाछेंपरसें ग्वाल परस्पर करत बडैयां ॥२॥
घेर रहे सब करत कुलाहल देत गोपालहि नंद दुहैयां ॥
औरहु ग्वाल करत बहुक्रीडा रामदासप्रभुके मन भैयां ॥३॥ | Aavni | NityaPad-282 | Gori |
Gwalin ajahuun banamen gaay ..| | ग्वालिन अजहूं बनमें गाय ॥|
होन न देत वारदोहन की चलत सवारे ही धाय ॥१॥
ले दोहनी खिरक मिषदोहन उत्तर कहत बनाय ॥
नंदद्वारपे फिर फिर उच्ककत बात न समझीजाय ॥॥२॥
समुझतहं तुम लाल मिलनको करतहो जो उपाय ॥
चतुर्भुजप्रभु गिरिधरनागर मनमाणिक लियोहै चुराय ॥३॥ | Aavni | NityaPad-282 | Gori |
Merey tuu jiya mein basat naval piyaa pranpyari .. | मेरे तू जिय में बसत नवल पिया प्रानप्यारी ॥
तेरेई दरस परस राग रंग उपजत मान न कीजे हो हो री ॥१॥
तू ही जीवन तू ही प्राण तू ही सकल गुन
निधान तो समान ओर नाहिन मोकोंहितकारी ॥
ब्यास की स्वामिनी तेरी मायातें पायो हे नाम बिहारी ॥२॥ | Aavni | NityaPad-282 | Poorvi |
Jhuk rahee suna murliki tair .. | झुक रही सुन मुरलीकी टेर ॥
उतते आंई पनियांके मिष गौआवनकी बेर ॥१॥
मोरचंद ्रिका मुकुटविराजत चपलनयनकी फेर ॥
परमानंदप्रभु मिले खिरकमें याते भई अबेर ॥२॥ | Aavni | NityaPad-282 | Gori |
Aavat mohan dhenu liye .. | आवत मोहन धेनु लिये ॥
वाजत वेणुरेणुतनमंडित बाहु श्रीदामा अंसदिये ॥२॥
कटिपटपीत लालउपरैना और नौतनवनमाल हिये ॥
कुंडल ल्लोल कपोल विराजत मोरपच्छ सिरमुकुट दिये ॥२॥।
व्रजजन कुमुद निरख प्रफुल्लित भई रूपदसुधा नयनन जुपिये ॥
परमानंददासको ठाकुर बासर तापको नाशकिये ॥३॥ | Aavni | NityaPad-282 | Gori |
Dekhan deit naan barrin palake .. | देखन देत न बैरिन पलके ॥
निरखतवदन लालगिरिधरको बीच परत मानों व्रजकीसलके ॥॥१॥
बनतेजु आवत वेणु बजावत गोरज मंडित राजत अलकें ॥
मार्थे मुकुट श्रवणमणिकुंडल ललित कपोलन झांई झलकें ॥२॥
ऐसे मुखदेखनकों सजनीकहा कियो यह पूत कमलकें ॥|
नंददास सब जडनकी यह गति मीन मरत भायेंनहिं जलकें ॥३॥ | Aavni | NityaPad-282 | Gori |
Dekhori aavtahain gopal gope gaayan paachhen gopijan munn harat herat .. | देखोरी आवतहैं गोपाल गोप गायन पाछें गोपीजन मन हरत हेरत ॥
फूलन की पागबनी फूलनकी माल उर फूली फूलीनवलासीकर फूलनकी फेरत ॥१॥
ब्रजकी वीथनमें प ्रवेश होत जाके हेत जाके द्वारे ठाडे होत बचनसुनायवेको सखान टेरत ॥
कल्याणके प्रभु गिरिधारी को मुखारविंद देखवेकूंदोरी आयी जियमें झेरत ॥२॥ | Aavni | NityaPad-282 | Gori |
Hari kii madhuri gaavani . | हरि की मधुरी गावनि ।
सुनहु सखी ! मन मोहत मेरौ मधुरी बेनु बजावनि ॥
गोप-भेष-नट-लीला-बिग्रह वृंदावन ते आवनि।
धातु प्रबाल कुसुम गुंजामनि देह-सिंगार बनावनि ॥
गावत ग्वाल गोविंद की कीरति तीरथ ते अति पावनि ।
'परमानंददास' अंतरगत अबिरल प्रीती बढावनि॥। | Aavni | NityaPad-283 | Gori |
Dekhan deit naan barrin palaken .. | देखन देत न बैरिन पलकें ॥
निरखतवदन लालगिरिधरको बीच परत मानों ब्रजकीसलके ॥।१॥
बनतेजु आवत बेणु बजावत गोरज मंडित राजत अलकें ॥
माथे मुकुट श्रवण मणिकुंडल ललित कपोलन झांई झलकें।॥।२॥
ऐसे मुखदेखनकों सजनी कहा कियो यह पूत कमलकें ॥ नंददास
सब जडनकी यह गति मीन मरत भायें नहिं जलकें ॥३॥ | Aavni | NityaPad-283 | Gori |
Way dekho aavatahen giridhari .. | वे देखो आवतहें गिरिधारी ॥
कछुक गाय आगें अरु पाछें शोभित संग सखारी ॥१॥
खसरही पाग लटपटी सुंदर अपने हाथ संवार ी ॥
मोतिनकी लरउरऊपर रुरकत बनमालारी ॥२॥
अंगअंग छबि उठत तरंग नकापें जात निहारी ॥
श्रीविद्धलगिरिधरन सबनमें चाह तिहारी न््यारी ॥३॥ | Aavni | NityaPad-283 | Gori |
Aavat chaare abb dhenu |sakhan sanga shruti deit madhugan mudit bajaabat benu ..1.. | आवत चारे अब धेनु |सखन संग श्रुति देत मधुगन मुदित बजाबत बेनु ॥१॥
अमृत मधुर धुनि पूरित श्रवननि उठ धाई सकल तज एनु ॥
हृदय लगाय व्रजेश्बर अंचर पट पोछति मखरेनु ॥२॥
उन्मर्दन मजन करवाबति भूखन पीत बसन ॥
गोविन्द प्रभु खटरस भोजन कर पोढे बिमल सेज सुख सेन ॥३॥ | Aavni | NityaPad-283 | Poorvi |
Hari kii aavani bunny . gope-mandali-madhya birajat haye trailok-dhanee .. | हरि की आवनी बनी । गोप-मंडली-मध्य बिराजत है त्रैलोक-धनी ॥
भेष विचित्र कियो है मोहन अंग राग बन-धातु ।
बरुहापीड दाम गुंजामनि सीस कमल कौ पातु ॥
नाचत गावत बेनु बजावत गोधन-संग गोविंद ।
वासरगत सुंदर ब्रज आवत हैं प्रभु 'परमानंद' ॥ | Aavni | NityaPad-283 | Gori |
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