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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Way dekhiyat hamaare gokulke duhkhaju ..
वे देखीयत हमारे गोकुलके दुःखजु ॥ प्राचीदीसते नकुदछ न मेरी अंगुरी के अग्र तन नेकुं करो मखजु ॥१॥ चढगीर सुंग कहेत मोहनजु चलो बल दाऊ हम देखवेकी भुकजु ॥ जन्मभूमि चल आये गोबिन्द प्रभु तन पुलकत मन भयोअत सुखजु ॥२॥
Aavni
NityaPad-283
Hameer
Aavat hain aagede gaiyaan.
आवत हैं आगेदे गैयां। सुबल सुबाहु श्रीदामा संगी क्वणितवेणु नितहीकी नैयां ॥१॥ एकवेपेज करत है ठाढे धाय छुवत वे स्थामकी छैयां ॥ हम आगें तुम पाछें परसें ग्वाल परस्पर करत बडैयां ॥२॥ घेर रहे सब करत कुलाहल देत गोपालहि नंद दुहैयां ॥ औरहु ग्वाल करत बहुक्रीडा रामदासप्रभुके मन भैयां ॥३॥
Aavni
NityaPad-283
Gori
Bunn tein gopal aavai gandani key paachhen paachhen, goraj mandit
बन तें गोपाल आवै गांडनि के पाछें पाछेँ, गोरज मंडित कपोल सोहत हैं माई ! मोर-मुकुट सीस धरे, मुरली अधर करें, बनमाल सोहै गरें, काननि कुंडल झलकाई ॥ ठुमुकि-ठुमुकि चरन धरत । नूपुर झनकार करत, रतिपति - मन हरत, बाढी सोभा अधिकाई । छीत-स्वामी' गिरिधारि जुवजन मोहे निहारि, कियौ प्रवेश सिंहद्वारि, जननी बलि जाई॥
Aavni
NityaPad-284
Gori
Mohan natwar-bapu kaachhen aavat goo-dhana sanga liain latkat .
मोहन नटवर-बपु काछें आवत गो-धन संग लिऐं लटकत । देखन को जुरि आईं सबै त्रिय मुरली-नादस्वाद-रस गटकत ॥ करत प्रवेस रजनी-मुख ब्रज में देखत रूप ह॒दै मैं अटकत । छीत-स्वामी गिरिधरन लाल- छबि देखत ही मन कहुं अनत न भटकत ॥
Aavni
NityaPad-284
Gori
Merey ree ! munn mohan maaee . sanjhaa samey dhenu key paachhen aavat hain sukhdai ..|
मेरे री ! मन मोहन माई । संझा समे धेनु के पाछें आवत हैं सुखदाई ॥| सख्वा-मंडली मध्य मनोहर मुरली मधुर बजाई । सुनत स्रवन तन की सुधि भूली, नैन की सैन जताई ॥ कियौ प्रवेश नंद-गृह-भीतर जननी निरखि हरषाई । छीत-स्वामी गिरिधर के ऊपर सरवसु देत लुटाई ॥
Aavni
NityaPad-284
Gori
Aabe maaee ! nand-nandan sukh-dainu .
आबे माई ! नंद-नंदन सुख-दैनु । संध्या समै गोप-बालक-संग आगें राजत धैनु ॥ गोरज-भंडित अलक मनोहर, मधुर बजावत बैनु । इहि विध घोष मांझ हरि आवत सब कौ मन हरि लैनु ॥ कियोौ प्रवेश जसोदा-मंदिर जननी मधिप्यावति पय-फैनु ॥ 'छीत-स्वामी' गिरिधरन-वदन-छवि निरखि लजानोौ मैनु ॥
Aavni
NityaPad-284
Gori
Bunn tein aavat sthaam gandani key paachhain mukut maathe dharein,
बन तें आवत स्थाम गांडनि के पाछैं मुकुट माथे धरें, खोरि चंदन करें, वनमाल गरें, भेषु नटवर काछें ॥ करत मुरली-नाद मोहत अखिल विश्व, धरत धरनी चरन मंद-मंद पाछेँ । छीत स्वामी नवल लालगिरिवरधर-रूप देखि मोहित सब ब्रज की बाल, गोप - वधू बाछें ॥
Aavni
NityaPad-284
Gori
Navallal govardhandhari aavat banaten sohe ..
नवललाल गोवर्धनधारी आवत बनतें सोहे ॥ मणिगण भुवन अंग बिराजत छबिली चाल मन मोहे ॥१॥ मोर मुकुट काछनी कट राजत देखत मन मथ कोहे ॥ नंददास प्रभु गायन पाछे आवत चहुंधा दृष्टि करी जोहे ॥३॥
Aavni
NityaPad-285
Gori
Aaj nandlal pyaaro mukut dharey . swan lasat makrakriti kundal ratipati munn
आज नंदलाल प्यारो मुकुट धरे । स्वन लसत मकराकृति कुंडल रतिपति मन जु हरे ॥९॥ अधर अरुन अरु चिबुक चारू बने दुलरी मोतिन माल पीतांबर धरे। अति सुगंध चंदन की खौर किये पहोंचनि पहुँची मोतिन की लरे ।।२॥ कर मुरली कटि लाल काछनी किंकिनी नूपुर शब्द हरे । गुन निधान 'कृष्ण' प्रभु रूप-निधि राधे प्यारी निरखि-निरखि नैनन ते न टरे ॥ ३ ।।
Aavni
NityaPad-285
Gori
Giridhar aavattari vraj. latkat ..
गिरिधर आवत्तरी ब्रज. लटकत ॥ देखत दृगन अघातमानों ज्यों ज्यों नोंपूर कींकनी बाजत त्यों त्यों चरन अबनी पर पटकत ॥।१ ॥ लालके ललित कपोलनके ढिंग कुंडल दिनमनिकी दूति अटकत ॥ नटबर भेख कीये नवरंगी मुकट सीस पर मटकत ॥२॥ लालके वैजयंती परसत चरनन पर निरख मदन मन अटकत ॥ राधावर बंसीधर प्रभुपर रीझ वार कर चटकत ॥३॥
Aavni
NityaPad-285
Gori
Aaj nandlal pyaaro mukat dharey .
आज नंदलाल प्यारो मुकट धरे । स्तन लसत मकराकृति कुंडल काछनी कटि वरन बनमाल गरे ॥१॥| चंचल नैन विशाल सुभग भाल तिलक दिये सुंदर मुखचंद चारु रूप सुधा झरे।। विचित्र बिहारी प्यारो बेनु बजावत बंसीवट ते व्रज़जन मन जु हरे ॥ २॥
Aavni
NityaPad-285
Gori
Hariju raag alapat gori .
हरिजु राग अलापत गोरी । होंय बाट घाट घर तजिके सुनत बेनु धुन दौरी ॥१॥ गई हो तहाँ जहाँ निकुंजबन अरु बैठे किसलय की चोरी । देखी मैं पीठ दीठ द्रुम फरकत पीत पिछोरी ॥२। लीनी हों बोलि हो मेरी सखी री देखि बदन भई बौरी । 'परमानंद' नंद के नंदन मोहि मिले भरि कौरी ॥३॥
Aavni
NityaPad-285
Gori

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