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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Banaten vraj aavein saanvaro baake nassa lataqat motiri ..
बनतें ब्रज आवें सांवरो बाके नासा लटक़त मोतीरी ॥ बरूहा मुकट घुघरारी अलके कुंडल जगमग जोतीरी ॥१॥ पीतांबर कसी रह्योरी महर महर को तामें मुरली ओपीरी ॥ परमानंद कछु कहत न बन आवे जो सुख पावे गोपीरी ॥२॥
Aavni
NityaPad-285
Gori
Aeye teree chaal kii chalan tedhhi baat kii bolan tedhhi mridumuskan tedhhi tedhoi badan ..
ए तेरी चाल की चलन टेढी बात की बोलन टेढी मृदुमुसकान टेढी टेढोई बदन ॥ ग्रीवा की झुकन टेढीकंटि की लचन टेढी चरन धरन टेढी बंसी की बजन ॥१॥ पाग की बंधन टेढी कुटिल अलक टेढीभूकुटी कमान टेढी टेढे स्थाम घन ॥ कलंगी हलन टेढी उर बनमाल टेढीअलक झलक जलकन ॥॥२॥ चंदन की खोर टेढी चंद्रिका चटक टेढी टेढो आड बंद दिये मदन मोहन ॥ टेढे हैं त्रिभंगी लाल टेढी टेढी सब चाल टेढे को भरोसो मोंहि सूर' हों सरन ॥३॥
Useer Aavani
NityaPad-286
Adano
Banate navrang girdhar aavat ..
बनते नवरंग गिरधर आवत ॥ आगे गोधन पाछे आपुन धाय धाय ओह टाबत ॥१॥ बरूहा मुकट दाम गरे गुंजा वेनु रसााल बजावत ॥ सप्त सुरन मिल राग रागनि मेघ गिरा मृदु गावत ॥२॥ गोप सखन के संग बिराजत अरू कर कमल फिरावत ॥ परमानददास को ठाकुर सुरनर मुनि मन भावत ॥३।।
Aavni
NityaPad-286
Gori
Areeye gaayan charaay aavat baneehen barni dhurri ..
अरीये गायन चराय आवत बनीहें बरनी धुररी ।। जब तें देखी तबतें यह छबि चिततें होत न दूररी ॥१॥ श्रमझलकत भरेरंगप्रेम पराग रहे पुररी ॥ उततें आवत धोंधीकोप्रभुस्थाम सु जीवन मूलरी ॥२॥।
Aavni
NityaPad-286
Gori
Gopalki aavani tum dekho vrajnari ..
गोपालकी आवनि तुम देखो ब्रजनारी ॥ मंदमंद मटकनि पर छिनु छिनु बलहारी ॥१॥ मोर मुकट बनमाल पीतांबर सोहे ॥ कुंडल मुखजगमगात कोटि काम मोहे ॥२॥। बेनु बजावत नेन नचावत सुरभी संग आवे ॥ जुबती चकोर चंद परमानंद गावे ॥३॥
Aavni
NityaPad-286
Gori
Saanvaro munn mohan maaee ..
सांवरो मन मोहन माई ॥ देख सखी वनतें ब्रजआवत सुंदर नंदकुमार कन्हाई ॥१॥ मोर चंद सिर मुकट बिराजत मुख मुरली सुर सहज सुहाई ॥ कुंडल लोल कपोलन की छबि मधुरी सी बोलनि बरनी न जाई ॥२॥ कुंचित केश सुदेश वदन पर मधुपनकी माला फिर आई ॥ मंदमंद मुसकात मनोहर दामिनि दुर दुर देत दिखाई ॥३॥ लोचन ललित लिलाट भूकुटी पर ताकि तिलककी रेख बनाई ॥ जनु मरजाद उलंघ अधिक बल उमगी चली अति सुंदर ताई ॥४॥ शोभित सुर निकट नासापुर अनुपम अधरनकी अरूनाई ॥ जानुं शुक सुगंध विलोक बिंबफलचाखन चारन चोंच चलाई ॥५॥
Aavni
NityaPad-286
Gori
Haye aaj cone bunn charaai gaiya kanhaa lagaai aitee bair ..
हे आज कोन बन चराई गैया कंहा लगाई ऐती बेर ॥ बेठेकहा बेग सुध लेहो नेनन कर ओसेर ॥१॥ ऐकबन ढूंढ सकल बन ढूंढे कहुंबनपाई गायन कि नेर ॥ तानसेन के प्रभु तुम बहो नायक देहो कदम चढ टेर ॥२॥
Useer Aavani
NityaPad-287
Hameer
Aap dekho aavatahe nipat laal baneri ..
आप देखो आवतहे निपट लाल बनेरी ॥ चन्दन की खोर किये गुलाब कि बनमाल हीदेंमोर चन्दा माथे दीये ऐन मेन ननेरी ॥१॥ कटाव कि कटकाछनि ओर प्रीतबसन पातरे जरायके आभूषन तन: भेदको न गनेरी ॥ स्याम सुन्दर मेघ बरनजुबतिन के मनके हरनः जगतको प्रभु लटक चलत जोबन रूप सनेरी ॥२॥
Useer Aavani
NityaPad-287
Hameer
Chandan paherat aabat haye navrang rangilto .
चंदन पहेरत आबत है नवरंग रंगील्तो । चंदन को तन पाग पिछोरी चंदन छबिही छबीलो ॥१॥ चंदन की तन खोर किये है चन्द लागत अरबीलो । कृष्णदासप्रभु परममनोहर लागत परम रसीलो ॥२॥
Useer Aavani
NityaPad-287
Hameer
Aaj atee neeke baneri gopal ..
आज अति नीके बनेरी गोपाल ॥ खासाको कटि बन्यो है पिछोरा उर मोतिनकी माल ॥१॥ पाग चौकरी सीस बिराजत चंदन सोहत भाल । कुंडल लोल कपोल बिराजत कर पहोंची वनमाल ॥२॥ धेनु चराय सखन संग आवत हाथ लकुटिया लाल ॥ परमानंद प्रभुकी छबि निरखत मोहि रही ब्रजबाल ॥३॥
Useer Aavani
NityaPad-287
Hameer Kalyan
Aaj sir rajtatopi laal ..
आज सिर राजतटोपी लाल ॥ रूपनिधान स्यामघन सुन्दर उर राजत वनमाल ॥॥१॥ बलनतेंआवत कमल फिरावत गावत गीत रसाल ॥ रामदास प्रभुकी छबि निरखतमोह रही वब्रजबाल ॥२॥
Useer Aavani
NityaPad-288
Hameer Kalyan
Dekho way hari aavat dhenu liye ..
देखो वे हरि आवत धेनु लिये ॥ जनु प्राची दिस पूरन ससी रजनी मुख उदित किये ॥१॥ मंडल बिमलसुभग वृन्दावन राजत ब्योम विमान हिये ॥ बालकवृन्दन छत्र सोभा मन चोरतदरस दिये ॥२॥ गोपी नैन चकोर सीतल भये रूप सुधा ही पिये ॥ कुम्भनदासप्रभु गिरिधर ब्रजजन आनन्द किये ॥३॥
Useer Aavani
NityaPad-288
Poorvi

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