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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Aavat mohan munn haryo . houn apane | आवत मोहन मन हर्यो । हों अपने
गृह सचुसों बेठी निरख बदन अचरा विसर्यों ॥१॥
रूप निधान रसिक नंदनंदन'निरख बदन धीर न धर्यों |
कुंभनदास प्रभु गोवर्धनधर अंग अंग प्रेम पीयूषभर्यो ॥२॥ | Useer Aavani | NityaPad-289 | Hameer |
Pichhora khasako cutty jheeno . | पिछोरा खासाको कटि झीनो ।
कटिपट पहेरे अति राजतहे बहुरि अरगजा भीनो !॥१॥
केसरखोर चंदन अंग लेपन चित्र बिचित्र मुखमंडन कीनो ॥
कुम्भनदास प्रभुगोवर्धनधर प्रीत करन प्रवीनो ॥२॥ | Useer Aavani | NityaPad-289 | Hameer |
Pichhora khasako katibandhe .. way dekho aabat nandanandan nayan kusumshar saandhen ..1.. | पिछोरा खासाको कटिबांधे ॥ वे देखो आबत नंदनंदन नयन कुसुमशर सांधें ॥१॥
स्याम सुभगतन गोरज मंडित बांह सखाके कांधें ॥।
चलत मंदगति चालमनोहर मानों नटवागुणगांधें ॥२॥
यह पद कमल अवही प्राप्त भये बहुत दिनन आराधें ॥
परमानंदस्वामी के कारण सुरमुनि धरत समाधें ॥३॥ | Useer Aavani | NityaPad-289 | Hameer |
Dekhe kunj bhawan tey aavat . swet paradani chandan charchit raag hameer hii gawat ..1.. | देखे कुंज भवन ते आवत । स्वेत परदनी चंदन चरचित राग हमीर ही गावत ॥१॥
नंद रोहिनी देखत ठाडे बाल गोविंद बुलावत ॥
आय मिले तब स्थाम मनोहर देखत उनको धावत ॥॥२॥
ठाडे खिरकमें गाय दुहावतसेननहीं में नेह जनावत ।
सूरदास प्रभु वेग चलो किन उर आनंदनसमावत ॥३॥ | Useer Aavani | NityaPad-290 | Hameer |
Aavat aaye dekhau nipat laal baneri .. | आवत आये देखौ निपट लाल बनेरी ॥
चंदन की खौर किये गुलाब की बनमाल हिये मोरचंदा मांथे दिये ऐन मैन बनेरी ।|१॥
गुलाब कीकटि काछनी जराय के आभूषण पीत बसन पातरे तन भेद कौन गिनैरी ॥
मेघबरन श्यामसुन्दर युवतीन के मन को हरण नंददास प्रभु लटक चलत जोवन रूप सहेरी ॥२॥ | Useer Aavani | NityaPad-290 | Hameer |
Aaj sir sohat topi laal .. | आज सिर सोहत टोपी लाल ॥
रूपनिधान स्थाम घन सुंदर उर राजत बनमाल ॥१॥
बनतें आबत कमलफिराबत गावत गीत रसाल ॥
रामदास प्रभुकी छबि निरखत मोही रहीब्रजबाल ॥२॥ | Useer Aavani | NityaPad-290 | Hameer |
Mohan tilak gorochan mohan mohanallat atee raajai . | मोहन तिलक गोरोचन मोहन मोहनललाट अति राजै ।
मोहन सिर पर मोहन कुलही मोहन सुरंग अति भ्राजै ॥१॥
मोहन स्रवन कुसुम जु मोहन कपोल अवतंस विराजै ।
मोहन अधरपुटपै मोहनमुरलि मोहन कल बाजै ॥२॥
मोहन मुखारविंदपै झूमत मोहन अलकअलिमधुकाजै ।
गोविन्द प्रभु नखसिख जु मोहन मोहन घोख सिरताजै ॥३॥ | Useer Aavani | NityaPad-290 | Hameer |
Chandan paherat aavat haye navrang rangilo .. | चंदन पहेरत आवत हे नवरंग रंगीलो ॥
चंदनकों तन पाग पिछोरा चंदन छबिही छबिलो ॥१॥
चन्दनकी तन खोर कीए हें चन्द्र लागत अरबीलो ॥
कृष्णदास प्रभु परममनोहर लागत परम रसीलो ॥२॥ | Useer Aavani | NityaPad-290 | Hameer |
Tedhhi tedhhi piyaa munn mohe chhoote bandsondhe soun lapate . | टेढी टेढी पिया मन मोहे छूटे बंदसोंधे सों लपटे ।
कंचन चोलना यह छबि निर खत काम बापुरो को है ॥१॥।
लाल इजार गरे वनमाल गुंजमाल दुति कुंडल सोहे ।
रसिक' रसाल गुपाललाल गढो कीमत कीमत जो है ॥२॥ | Useer Aavani | NityaPad-290 | Hameer |
Aeye aaj kaun bancharai yeti gaiyaan kahaan dhon lagaai etee bair .. | ए आज कौन बनचराई येती गैयां कहां धों लगाई एती बेर ॥
बैठे व कहा सुध लेहो नेनन करओसेर ॥१॥
एक बन ढूंढ सकल बन ढूंढी तोड न पाई गायनकी नेर ॥
तानसेनके प्रभु तुम बहोनायक देहो कदम चढ टेर ॥२॥ | Useer Aavani | NityaPad-290 | Hameer |
Angaabhushan janani utaarat .. | अंगआभूषण जननी उतारत ॥
दुलरी ग्रीवमाल मोतिनकी केयुरले भुजा स्थाम निहारत ॥१॥
क्षुद्रावली उतारत कटीसेंत धरत महीपर मन वारत ॥
रोहिणी भोजन करहु चढाई वारवार कहि कर कर आरत ॥ २।।
भूखे भए स्याम हलधरपें यह प्रेम विचारत ।।
सूरदासप्रभु मात यशोदा पटल दुहन अंतर रज झारत ।।३॥ | Shringaar Bade | NityaPad-291 | Gori |
Khelat aaya dhaay baithe vrajrajki god .. | खेलत आय धाय बैठे ब्रजराजकी गोद ॥
मुख चुंबनकर आन लेतहैं मनमें मानत मोद ॥१॥
सुंदर कर उगार मांगत है चितये तातकी कोद ।।
गोविंद कहें चलो भोजन भयो बोलत मातयशोद ॥ २।॥। | Shringaar Bade | NityaPad-291 | Gori |
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