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Kirtan Title
Kirtan
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Raag
Madangopal hamaare aabat aanand mangalgaaungi..
मदनगोपाल हमारे आबत आनन्द मंगलगाऊंगी॥ जल गुलाब के घोरि अरगजा पायन चंदन लगाऊंगी ॥१॥ शीतलचंदन सुखद के साजत कुच भुज बीच बसाऊंगी ॥ कुम्भनदास लाल गिरिधरको जो एकान्त कर पाऊंगी ॥२३॥
Useer Aavani
NityaPad-291
Hameer
Ekahi janani doun urr lagaabat ..
एकहि जननी दोउन उर लगाबत ॥ सुमन सुत अंग परसत रोहिणी बलगई कहिकहि जल नहावावत ॥१॥ सरस वसन तन पोछ गई ले खटरसके जिनवार जिमावत ॥ सीतलजल कपूर रस अचयो झारी कनक लिये अचवावत ॥।२॥ भर्‌थो चरु मुखधोय तुरत पीरे पान बीरी मुख नावत ॥। सूरस्थाम सुखजान घुदित मन शब्यापर संगले पोढावत ॥३॥
Shringaar Bade
NityaPad-291
Gori
Aaya dekho aavatahe nipatlal baneri.
आय देखो आवतहे निपटलाल बनेरी। चंदनकी रबोर किये गुलाबकी बनमाल हिये मोरचंदा सिस दिये ओनमेंन बनेरी ॥| १॥ कटावकी कटि काछिनी उरपीत बसन पातरे जराबके आभुखन तिने कौन गिनेरी ।। श्याम सुंदर मेघबरन जुवतिनके मन हरम जगतको प्रभु लटकचलत जोबनरूप सनेरी ॥२॥
Useer Aavani
NityaPad-291
Hameer
Yeye douu merey gaay charaiya ..
ये दोऊ मेरे गाय चरैया ॥ मोल बिहंस लये मैं तुमको तब दोऊ रहे नन्हैया ॥ १॥॥ तुमसो टहल करावत निशदिन औरन टहल करैया ॥ यह सुन श्याम हंसे कहि दोऊ झूठेई कहत है मैया ॥।२॥ जान परतहै सांच जुठाई धेनु चरावत रहे झुरैया ॥ सूरदासप्रभु हंसत यशोदा मैं चेरी कहि लेत बलैया ॥३॥।
Shringaar Bade
NityaPad-291
Gori
Ghar ghar nandmahar key mishahi mish aave gokulki naar ..
घर घर नंदमहर के मिषही मिष आवे गोकुलकी नार ॥ सुंदर बदन बिनु देखे कल न परत भूल्यो धामकाम आछो बदन निहार ॥१॥ दीपक लेचली बहिर वाटमे बड़ो कर डार फिर आय छबिसों बयारको देत गार।। नंददास नंदलालसों लागे हें नवमपलककी ओट मानों बीते युगचार ॥२॥
Ath Mis
NityaPad-292
Gori
Saanjh bhaee ghar aavahu pyaare ..
सांझ भई घर आवहु प्यारे ॥ दौरत कहा चोटकहुं लागे पुनि खेलोगे होइ सकारे । १॥॥ आपही जाई बांह गहि लाई कंठ रहे लपटाई ॥ धूर झार तातो जललाई तेल परसजु नहवाई ॥२॥ सरस वसन तन पोछ स्यामकों भीतर गई लिवाई ।। सूरस्थाम कछु करो बियारू पुनिराखों पौढाई ॥३॥
Ath Mis
NityaPad-292
Gori
Myrie syathama sthaam sthaam ratat sthaama syaam bhaee ..|
माईरी स्यथामा स्थाम स्थाम रटत स्थामा स्याम भई ॥| अपनी सखिनसों यो पूछतहै श्यामा कहां गई ॥॥१॥ ब्रजवीधिनमें दूंढत डोलत बोलत राधे राधे॥ रही विचार निहार सोच कर सखी सकल मौन साथे ॥२॥ प्रेम लगन जाके जो लागत ताहि कहो सुध कैसी ।। कहें भगवान हितरामराय प्रभु लगन लगे जब ऐसी ॥ ३॥
Ath Mis
NityaPad-292
Gori
Rohini deepak deho sanjoi ..
रोहिणी दीपक देहो संजोई ॥ मंदमंदगति चल लेंहो अंचल मांझ अगोई ।॥१॥ जबहीं सजाय जात द्वारेलों डारत व्यार बुझाई ॥ नेक नाहिं अनखात इते पर या घर यह बड़ाई ॥२॥ केईवार संजोवन आई तब तुम नाहिनकीनी ॥ औरनको याचन नहीं जेहों यह अकर में लीनी ॥|३॥| बारबार आगमगति मनप्रति पवन करीनकवानी ॥ ब्रजपति कह्यो ओट मेरी चल अंतर गतिकीजानी ॥४॥
Ath Mis
NityaPad-292
Gori
Kaho kahaan kheleho laalan baat kaho moson banaki ...
कहो कहां खेलेहो लालन बात कहो मोसों बनकी ॥। आवो उछंग सांवरे मोहन गोरज पोछूं वदनकी ।।१॥ सुंदर वदन कमल कुम्हलानो और दशा भई या तनकी ॥ रसिकप्रीतमसों कहत नंदरानी बलबल छगन मगनकी ॥।२॥।
Shringaar Bade
NityaPad-292
Gori
Kihi vidhi curr kaanhhin samajhehun ...
किहि विधि कर कान्हहीं समझेहुं ॥। मैंही भूलीचंद दिखरायो ताहि कहत मोहि दे मैं खेहुं।।१॥॥ अनहोंती कहूं भई कन्हैया देखी सुनी न बात | यहतो आय खिलोना सबको खान कहत है तात ॥२॥ यह देत लोनी नित मोकों छिनछिन सांझसंवारे।। बारबार तुम माखन मांगत देहुं कहातेंप्यारे ॥ ३॥ देखत रहो खिलोना चंदा ओर न करहु कन्हाई॥ सूरस्याम लिये हँसतयशोदानंदहूं कहत बुझाई ॥।४॥
Chandra Prakash
NityaPad-293
Iman
Thaadhiho ajir yashoda apane harihi liye chandaa dikhrabat |.
ठाढीहो अजिर यशोदा अपने हरिहि लिये चंदा दिखराबत |। रोवत कित बल जाऊं तुमारी देखो धोंभर नयन जुडाबत ॥।१॥ चितें रहत आप शशि तन तब अपने करलैलैजु बतावत ॥ मीठो लगत कै यह खाटो देखतअतिसुंदर मनभावत ॥। २॥ मनही मन यह बुद्धि करत हरि मातासो कहि ताहि मेंगावत ॥ लागी भूख चंद मैं खेहों देहु देहु तब कर बिरझावत ॥३॥ यशोमति कहत कहा मैं कीनो रोबत मोहन अति दुखपावत || सूरस्यामको यशुमति टेरतगगन चिरैया उड़त दिखावत ॥४॥
Chandra Prakash
NityaPad-293
Iman
Laihori maa chandaa lehungo..
लैहोरी मा चंदा लेहुंगो।। कहा करों जलपुट भीतरको बाहिर चोंक गहूंगो ॥१॥ यह तो दलमलात झकझोरत कैसेके जु लहुंगो।॥। वहतो निपट निकटही दीपत बरज्यो हूं न रहूंगो ॥२॥ तुम्हारो प्रकट प्रेम मेंजान्यो बहुरायो न बहूंगो॥। सूरस्थाम जब कर गहि लाऊं तब तन ताप दहूंगो ॥३॥
Chandra Prakash
NityaPad-293
Iman

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