top of page
Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
|---|---|---|---|---|
Latkat chalat dohni lerry ..| | लटकत चलत दोहनी लेरी ॥|
अनोखी तू गाय दुह्वावनवारी कौन पौरीमें पैठन देरी ॥१॥।
बनते आवबत भई न बिरिया बासर श्रम तज नेक चितेरी ॥
तोहि न दोष नयेहितकी गति कठिन हिलगकी ऐसी हैरी ॥२॥
तुव दृग चंचल अंबुज बदनी दरसन हानि निमिष नसहेरी ॥
चततुर्भुजप्रभु गिरिधरन चंदने तुब चित चोर्यो मूदु मुसकेरी ॥३॥ | Saanjh Samay Gaiya | NityaPad-295 | Gori |
Jaba tuu gaay duhaavan jaay.. | जब तू गाय दुहावन जाय॥
तब तहां तूंरी कहा नंदद्वारेपें भूल रही उतपचाय ।। १॥।
मठुकी सीस फिरत ब्रजबीथन वारवार मुसकाय ॥
फिरफिर वार करतहै ठाडी सूधेधरत न पाय ॥। २॥॥
तजी लोककी लाज कार्यकरकहिव काज धुका हि॥
चतुर्भुजप्रभु जानतहूं तुब मन हरिसों अटक्यों आहि ॥३॥ | Saanjh Samay Gaiya | NityaPad-295 | Gori |
Bhar dohni doodh haathate varvataheete leey jaat chhudaai... | भर दोहनी दूध हाथते वरवटहीते ले जात छुडाई॥।
पूत लाडिलो जाने नाहिं तेंकियों ढीट यशोदा माई ॥॥१॥
बांट देत सब ग्वालनसो सुनरी महरि आप नहीं खाईं।।
आनसमें बछरा छोरतहै तारीदेत बिडारत गाई ॥२॥
एकजो ढोटा नंदमहरको मेरो कछु नवस्यात ॥
परमानंद मोहन मूरत बदनस्वरूप देख मुसकात | Saanjh Samay Gaiya | NityaPad-296 | Gori |
Gaihon khirak duhaavan gaay .. khor |
