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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Bilag kitt maanat hoe joo hamaro | | बिलग कित मानत हो जु हमारो |
कहाजु भयो पाछें दुहि दीनी होतो ग् वाल तुम्हारो ॥ १॥॥
इनकी गतिहों नीके जानत सुरभी दूध देत त्योंत्योहोत अंध्यारो॥
भर दोहनी काल््ह दुहि देहों तब ह॒बैहै रामदास प्रभुको पतियारो ॥२॥ | Saanjh Samay Gaiya | NityaPad-297 | Gori |
Musakaat jaat milwat gaayan .. | मुसकात जात मिलवत गायन ॥
झारत गोपवधु सुरभिनकों दोहनीलै करते दुहत चायन ॥। १॥|
इत निरखत उत धार धरनीपर कबहूं कबहूं ढर लागत पायन ॥
रामदासप्रभुको यह अचरज जैसी यह सब तैसीय रहायन ।२॥
| Saanjh Samay Gaiya | NityaPad-297 | Gori |
Gawat mudit khirakmein gori sarang mohani .. | गावत मुदित खिरकमें गोरी सारंग मोहनी ।।
बारबारकों बदन निहारत हाथ कनककी दोहनी ॥१॥
कनक लतासी चंपकबरनी स्थाम तमाल गोपालकी जोरी ॥
ठाड़ी निरख निकट तनमनसों नंदनंदनकी प्रीति न थोरी ॥२॥
उपमा कहा देहुँ को लायक उन मद स्वरूप नागरि हवे नागर ॥
प्रीत परस्पर ग्रंथी नछूटे परमानंदस्वामी सुखसागर ॥३॥ | Saanjh Samay Gaiya | NityaPad-297 | Gori |
Joee joee bhaave soee soee leeje ... | जोई जोई भावे सोई सोई लीजे ॥।
तुम्हारे काजें करकर लाई मेरो सुफल श्रम कीजे | ॥
अरुण मलाई माखन मिश्री और ओट्यो पय पीजे ।|
ओदन व्यंजन स्वाद सबे रस भोजन छिनछिन लीजे ॥।१॥
जेंबो बेग खेलियें पाछे भोजन में मन दीजे |।
देहों विविध खिलोना तुमकुं मेरो कह्यो पतीजे ॥ ३॥
अलक सवारबीजना ढोरूं पाछे बिंदु लगीजे ॥
रसिक प्रीतम जननी संग जेंबत बाललीला रस भीजे ॥।४॥। | Byaaru | NityaPad-298 | Iman |
Chalo laal biyaru keeje douu bhaiya aeka dhaari .. | चलो लाल बियारू कीजे दोऊ भैया एक धारी ॥
दूध भात अरु दार बनाई बोलत है रोहिणी महतारी ॥| १॥
इतनो सुनत मन हरखत संग उठ चले देत किलकारी॥
परमानंदप्रभुकी बतियन पर यशोमति बलबल हारी ॥। २॥। | Byaaru | NityaPad-298 | Iman |
Ladile bolat haye tohi maiya .. | लाडिले बोलत है तोहि मैया ॥
संझासमें गोधन संग आवत चुंबत लेकर गोद बैठेया ॥ १॥
मधुमेवा पकवान मिठाई दूधभात अरु दार बनाई।॥।
परमानंद प्रभु करत बियारू यशुमति देख बहुत सुखपाई।।२।॥। | Byaaru | NityaPad-298 | Iman |
Inn ankhiyan aagete laalan eko palchhin hoy nannyaare .. | इन अँखियन आगेते लालन एको पलछिन होय नन््यारे ॥
बलबल जाउं वदन देखनकों तरसतहैं नयनन के तारे।। १॥ बोहोरच्यो सखा बुलाय
संगके यही आंगन खेलो मेरे प्यारे ॥ निरखत रहूं पन्नगकी मणि ज्यों सुंदर
बालविनोद तिहारे ॥२॥ मधु मेवा पकवान मिठाई व्यंजन मीठे खाटे
खारे ॥ सूरस्यामको जोईजोई भावे सोईसोई माँगलेहु मेरे प्यारे ॥३॥ | Byaaru | NityaPad-298 | Iman |
Tere paiyaan laagun giridhar bhojan keeje .. | तेरे पैयां लागूं गिरिधर भोजन कीजे ॥
उलटत पलटत झगुलिया भीजे खीजत खिजावे सुंदर तन छीजे ॥।१॥
फेनी बावर खुरमा खाजा गुंजामिश्री लडुवा लीजे ॥
बांट देत सब ग्वालबालनकों परमानंद जननी करलीजे ॥२॥ | Byaaru | NityaPad-298 | Iman |
Bolat dhenu govardhan giri chadh .. | बोलत धेनु गोवर्द्धन गिरि चढ़ ॥
मोहन मुरली धुनि सुन श्रवनन काजर गांग गुरनी हरनी मुर धाई प्रेम बढ ॥१॥
आसपास सब घेर रही वह वापर वह वापर चंढि ॥।
गोविन्द प्रभु हस्त कमल परस कियो तातें अति दूने दूध चढ़ी ।।२॥। | Saanjh Samay Gaiya | NityaPad-298 | Poorvi |
Aho bal jiya adhik daraat || | अहो बल जिय अधिक डरात ||
गोधन किन ले आवो अबे कित पारतहो रात ॥ १॥।
एकहि थारमें जेंबत दोऊ यशुमति करत वियार ॥
सुंदरस्याम देत हुंकारी जननी प्रीत विचार।।२॥|
बालक कान्ह निपट भोरेहें सिखवत रही हो बात ॥।
तुम अग्रज वसुदेवके नंदन जानतहो सव घात ॥३॥ | Byaaru | NityaPad-298 | Iman |
Makhan rotty lehu kanhabare..| taatitaati ruchi upajaavat | माखन रोटी लेहु कान्हबारे॥| तातीताती रुचि उपजावत
ब्रिभुवनके उजियारे | १॥॥ और लेहु पकवान मिठाई मेवा बहुविध सारे ।। ओट्यो
दूध सद्य घृतमधु रुचिसो खाओ मेरे प्यारे ॥ स्२॥ तब हरि उठकें करत बियारु
भ्रक््तनप्राणपियारे ॥ सूरस्याम भोजन करके शुच्ि जलसों बदनपखारे ॥३॥ | Byaaru | NityaPad-299 | Kanharo |
Biyaru karat haye balbir .. aspas sub sakhamandali | बियारु करत है बलबीर ॥ आसपास सब सखामंडली
सुबल सखा मति धीर ॥ १॥। मधुमेवा पकवान मिठाई ओट सिरायो क्षीर॥। हँसत
परस्पर खात खबावबत झपट लेत कर चीर ॥ २।। यह सुख निरखनिरख नंदरानी
प्रफुल्लित अधिक शरीर ॥ परमानंददासको ठाकुर भक्तहेत अवतीर ॥३॥ | Byaaru | NityaPad-299 | Kanharo |
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