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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Mohan uthahin raar machaai ! chhaandide jhoothi kaam dhaam sub makhan | मोहन उठहिं रार मचाई ! छाँडिदे झूठी काम धाम सब मा खन
रोटी दै मेरी माई ! कबहुँक झटकि गहत नीवीकर ॥। २॥ कबहुँक कंठरहत लपटाई,
मुखचुंबति जननी समुझावति सद लौनी दैहौं कुँवर कन्हाई, उठि कर गही आपु
ही नेती माखन बडी बार क्यों लाई, परमानंद' देखि यह लीला सुधि सागर
मथधिवे की आई॥ | Kaleoon | NityaPad-031 | Saarang |
Kheejat jaat makhan khaat | arun lochan bhoh teddy barbar | खीजत जात माखन खात | अरुन लोचन भोह टेडी बारबार
जुंभात॥१॥ कबहू घुटरुन चलत रुनझुन धूरधूसर गात | कबहू खीजकर अलक
ऐंचत नेन जलभर जात ॥२॥ कबहू तोतरे वचन बोलत कबहू बोलत तात |
सूरप्रभु की जननी बलिहसि लीयो कंठ लगात ॥३॥। | Kaleoon | NityaPad-031 | Bhairav |
Karo kaleu praan piyaare.. | करो कलेऊ प्रान पियारे।।
माखन रोटी सद्य घृत दह्मो हे बलिबलि जाऊं खाउ ललारे ॥१॥
टेरत ग्वाल बाल द्वारे व्हे आवहु खेलजु करो दुलारे ॥
खेलन जाऊं बलि ब्रज बीधन में दूरिकहुं जाउ दिनवारे ॥२॥
टेरि उठे बलिराम स्याम को आवो जाउ धेनुले सवारे ॥
सूर श्याम करजोरि मैया सो गाय चरावन जात उहारे ॥ ३॥ | Kaleoon | NityaPad-032 | Bibhaas |
Karat kaleu kunwar kanhaiya ... | करत कलेऊ कुंवर कन्हैया ।॥
संकरसन के संग विराजत ओर रा जत गोपन के छैया।। १॥
मधुमेवा पकवान मिठाई बहुविधि विंजन सरस सुहैया।।
ओद्यो दूध सद्य धोरि को तातो मिश्री बहुत मिलैया ॥ २॥॥
अरस परस दोऊ खात खबावत निरख रोहिनी जसुमति मैया ।।
यह छबि देखिनंद आनंद परमानंददास बलिजैया ।। ३॥। | Kaleoon | NityaPad-032 | Ramkali |
Vrajanandakandam vrajanandakandam . | व्रजानंदकंदम् व्रजानंदकंदम् ।
घोषपति भाग्यभुविजातम् ॥
रसिक वरगोपिका पीतरसमाननं तव जय तु ममदृशि सुजातम् ॥।श्लु.॥
रुचिरदरहास गलदमलपरि मललुब्ध मधुपकुलमुखकमल सदनम् ॥
अमृतचयगर्व निर्वासना धरसी धुपाय यमनोजाग्नि शमनम् ॥१॥
स्मित प्रकटितचारुदंत रुचिवदन, विधुकौमुदी हत निखिलतापे ।|
विलस ललितेहृद्यकनककलशये, मारकत मणिरिव दुरापे ॥२॥
सुभग सुमुखी कंठनिहित निजबाह रतिमत्त गजराज इबरुचिरम् ॥
विहरविरहानलं चारु पुष्करचलन शीक रैरुपशमय सुचिरम् ॥३॥
अरुण तरला पांग शरनिहित कुल-वधू, धृतितव विलोचनसरोजम् ॥
ममवबदन सुषमासरसिविलसतु सततमल, सगतिनिर्जित मनोजम् ॥।४॥
नंदगेहाल वालोदित स्त्रीराग से कसंवृद्धसुरवृक्षम् ॥।
ब्रजवरकुमारिका बाहु हाटकलता सततमाश्रयतु कृतरक्षम् ॥॥५॥
व्रजश्लाघ्य गुणरसिकता गुणगोपनातिशय रुचिरालापलीलम् ॥
तादूगीक्षण जनितकुसुमशरभाव भरयुवतिषु प्रकटतरनिखिलम् ॥।६।।
रुचिरकौमार चापल्य जय ब्रीडया,बल्लबी हृदयगृहगुप्तं ॥७॥।
प्रकटयतन्रिजन खरशरचयरैसम शरमिहजयसिहृदयभावितम् ॥
घोषसीमंतिनीविद्युदुद्यबेणुकलनिनदगर्जितस्त्वमिहसततं ॥
वचन करुणा कूतदृष्टिवृष्टिरंगंनवजलदमपिकुरु सुहसितं ॥।९॥ | Vratcharya (Kartik Sud Poonam Se Magshar Sud Poonam ( Mangala Shringaar)) | NityaPad-032 | Bibhaas |
Jasoda pende pende dole .. | जसोदा पेंडे पेंडे डोले ॥
इत गृह काज उते सुत को डर दोऊ बात समतोलें ॥ १॥।
आवहुं कुंवर तुम करो कलेऊ जननी रोहिनी बोलें।।
परमानंद प्रभु फिरिकें चितयो आनंद हृदय कलोलें ॥२॥ | Kaleoon | NityaPad-032 | Ramkali |
Uthhe praat asalaat kahent totri totri baat .. | उठे प्रात असलात कहेंत तोतरी तोतरी बात ॥
मांगत है ज ैसे सद्य माखन लाई हे जसोदा मात
बाजत नुपुर सोहात नाचत त्रैलोक नाथ देखत
सब ग्वाल बाल नेंनन नही अघात ॥॥१॥
नंदसुबन सुखदाई चिरजीबोरी कन्हाई जीवनमुख चाहि चाहि या निधि को माई ।।२॥।
बाल केलि देखि आई रोम रोम सचुपाई श्री विद्ठल हर निरख लेत हे बलाई ॥३॥ | Kaleoon | NityaPad-032 | Bibhaas |
Mohan deho busson hamaare .. | मोहन देहो बसन हमारे ॥
जाय कहों ब्रजपतिजूके आगें आगें करतअनीतललारे ॥१॥
तुम ब्रजराजकुमारलाडिले औरसबहिनके प्राण पियारे॥
गोविंदप्रभु पियदासीतिहारी सुंदरवरसुकुमारे ॥। २॥॥ | Vratcharya (Kartik Sud Poonam Se Magshar Sud Poonam ( Mangala Shringaar)) | NityaPad-033 | Ramkali |
Gwalini aapnechirlehon .. | ग्वालिनि आपनेचीरलेहों ॥
जलतेनिकसनिहारनेकव्हैदोऊककरजोर आसीसलेहो ॥ १॥।
कितहुंसीतसहत ब्रजसुंदरिहोत असित-कुशगात सबे ॥
मेरे कहें पहेरो पटअंगनव्रतविधिहीन अबे ॥।२॥
हौं अंतरयामीजानतचितकी कितदुरावत लाजकें ॥
करहों पूरणकाम कृपाकर शरदसमेंशशिरातकें ॥ ३॥
संततसूर स्वभावहमारों कित डरपतहो काममये ||
कैसी भांतिभजेकोउमोकूंतेहूंसब संसार जये ।॥४॥। | Vratcharya (Kartik Sud Poonam Se Magshar Sud Poonam ( Mangala Shringaar)) | NityaPad-033 | Bibhaas |
Gwalin maangat busson aapane .. | ग्वालिन मांगत बसन आपने ॥
सीतकाल जलभीतरठाडी आवतनहीं दयाने ॥ १॥
तुम व्रज॒राज कुमार प्रबल अतिकोन परी यहबाने ॥|
हम सब दासी तिहारी व्रजपति तुम बहुनिपटसयाने ।।२॥ | Vratcharya (Kartik Sud Poonam Se Magshar Sud Poonam ( Mangala Shringaar)) | NityaPad-033 | Bibhaas |
Tumhari harey kewalchir_.. karat | तुमहरि हरे केवलचीर_॥ करत
मुरलीवसनभूषणपराक्रमकुलधीर ॥१॥
तुम आपजाय मनायलावत चतुरहलधरवीर ॥|
मुरलीकाध्वनि सुनत व्रजपति मनहिंहोतअधीर ।। २॥ | Vratcharya (Kartik Sud Poonam Se Magshar Sud Poonam ( Mangala Shringaar)) | NityaPad-033 | Ramkali |
Vasanahare sabakdamb chadhaaye .. | वसनहरे सबकदंब चढाये ॥
सोलेसहस्त्रगोपकन्यनके अंगआभूषणसहित चुराये॥| १॥
अतिबिस्तारनीप तरुतामेलेलेजहांतहांलटकाये
मणिआभूषण डारडारन प्रति देखत छबिमनहींअटकाये ॥२॥
नीलांबरपार्टबरसारी श्वेतपीतचूनरी अरुणाये ॥
सूरस्याम युवतिन ब्रतपूरणको कर्दंबडारफलपाये ॥। ३॥। | Vratcharya (Kartik Sud Poonam Se Magshar Sud Poonam ( Mangala Shringaar)) | NityaPad-034 | Ramkali |
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