top of page
Kirtan Title
Kirtan
Category
Book-Page#
Raag
Jambo doolhe
जैंबो दूल्हे लाल दुल्हैया | बहु विधि साक सुधारे बिंजन औरु बनायो घैया ॥ कंचन थार कंचन की चौकी परोसत मोद बढैया। ठाढी पवन करति है रोहिनि आनंद उमगि न समैया।। करि अचवन मुख बीरी दीन्ही लेत वारनें मैया ।। लाल लाडिली की छबि ऊपर परमानंद' बलि जैया॥।
Byaaru
NityaPad-301
Bihagaro
Senbhog laaee bhar thaari |
सेनभोग लाई भर थारी | दूध भात और कढी बडीकी परोसत हैं जसुमति महतारी।। १॥। मधु मेवा पकवान मिठाई सीतल भरि जमुनाजल झारी ॥ “आसकरन' प्रभु मोहन नागर दासनको जूठन भर थारी ॥ ३॥
Byaaru
NityaPad-301
Kanharo
Chandan bhawan mein karat haye byaru paros dharee haye kanchan thaari.
चन्दन भवन में करत है ब्यारू परोस धरी है कंचन थारी। हँस हँस जात देतमोहन कर बहु विंजन जसुमति महतारी ॥१॥ चंदन अंग अंग लेप किये तन लागतहै सुखकारी नंददास चरनरज सेवक तन मन डारत वारी ॥२॥
Useer Byaaru
NityaPad-301
Iman
Giridharlal byaru keeje |
गिरिधरलाल ब्यारू कीजे | पूरी दूध मलाई मिश्री पहिलें कौर प्यारी को दीजे॥१॥ ले जेंबत लाल लाडिली दोउ ललितादिक निरखत सुख लीजे॥ “गोविंद प्रभु प्यारी कर बीरी पीक दान सखियन को दीजे ॥२॥
Byaaru
NityaPad-301
Kanharo
Senbhog laaee bhar thaari .
सेनभोग लाई भर थारी । रुचिर कचोरी पुवा पुरी मानभोग पावत पिय प्यारी ॥१॥ धर्यो कटोरा भर्यों मुरब्बा सरस संधाने साक सवारी । ओदट्यो दूध भर्यो भाजनमें तामें बहुत मिठाई डारी।।२॥ ललित ललिता कर अचवावत जमुनोदक कंचन भरि झारी ॥! 'गोपीनाथथ' खबावत बीरी दंपति छबि संपत उर भारी ॥ ३॥
Byaaru
NityaPad-301
Kanharo
Byaru
ब्यारू एयाम अरोगन लागे॥ बहु मेवा पकवान मिठाई बिंजन करे मधुर रस पागे ॥ १॥ दार भात घृत कढी संधानो रुचि कर मुखसों पापर मांगे ॥ चत्रभुज प्रभु जूठन दे सबको जो जन पावत सो बडभागे ॥२॥
Byaaru
NityaPad-301
Kanharo
Sukhad eyama shyam
सुखद एयामा श्याम सुखद वृन्दा विपिन सुखद ब्यारू करत सुखद यमुना तीर। सुखद ओदन मांझ सान ताती दार करत मनुहार दोऊ प्रेमरत गभीर ॥।१॥ सुखद पकवान विंजन विविध भातके परोसे ललिता अंग पहेरी चंदन चीर ॥ सुखद (हरिवंस' दृग निरख चित विवस व्है करत बिजनी लिए झारी सीतल नीर ॥२॥
Useer Byaaru
NityaPad-302
Kanharo
Apane curr chandan sakhee piya anga lagawat ..
अपने कर चंदन सखी पिय अंग लगावत ॥ हरस्ब्रित बदन सदन अपने निज कर बिंजनी ढुरावत॥।१॥ शीतल भोग राग गुन कहि कहि कर मनुहार लिवाबत। द्वारकेस' प्रभु रिप्ल विवश भये नेह नई उपजावत ॥ २॥
Useer Byaaru
NityaPad-302
Kanharo
Aliri saghan kunj usirki
आलीरी सघन कुंज उसीरकी रावटी ता माधि राजत पिय प्यारी | कंचन थार ले आई सब व्रज वाम जिमावत प्रान प्रिय गुंफत हार निवारी ॥ १॥ कोऊ बिंजन कर गहे कोऊ परसत पियको कोऊ अरगजा घिस लावत फूलनी कंचुकी सारी ॥ जेंवत स्यामा स्थाम देखत जाने कोटि काम नंददास” बलिहारी।॥।२॥
Useer Byaaru
NityaPad-302
Kanharo
Sukhad yamuna pulin sukhad navkunjamein sukhad syama syaam karat byaru sukhad .
सुखद यमुना पुलिन सुखद नवकुंजमें सुखद स्यामा स्याम करत ब्यारु सुखद । सुखद चंदन अंग सुखद लेपन करि सुखद भूषण कुसुम पहेरि दोउ तन सुखद ।॥।१॥ सुखद बिजना ढुरत मलय चहुँ दिश सुखद सुखद गावत अलि कोकिलादि सुखद । सुखद गिरिधरन रुचि सुखद पयपात्र भरि सुखद लाई सुखद ललित ललिता सुखद ॥। २।।
Useer Byaaru
NityaPad-302
Kanharo
Aaj bhattu dekhe useer mahal mein byaru karat gopal ..
आज भट्ु देखे उसीर महल में ब्यारु करत गोपाल ॥ ताती दारभात घृत सान्‍्यों जेंबत जोरी रसाल ।॥।१॥ मठरी जलेबी गुंजा बाबर घेबर लाइ ब्रज वधू थाल।॥। कुंभनदास प्रभु गोवर्धनधर रसभरे गिरिधरलाल ॥।२॥
Useer Byaaru
NityaPad-302
Iman
Ladli raajat ruchir kunjamen.
लाडली राजत रुचिर कुंजमें। अंग अंग अरगजा रंग वागो बने दोऊ जने सनेह सो प्रेमरस पुंजमें ।।१॥ नृत्य ठाडी अली भली भांति भेदसों रैन पहेली जान एक अली गुंजमें॥ पर्यो परदा धर्यो सेनको भोग पय पुरी भर धार ब्रजलाल कर मुंज में ॥ २॥
Useer Byaaru
NityaPad-302
Kanharo

© 2026 All rights reserved. Vaishnav Samaj of RTP, DBA - Krishnadham-VYO 

bottom of page