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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Chitaichite chitchorat aliri baanke lochan neeke .. | चितैचिते चितचोरत आलीरी बांके लोचन नीके ॥
यह मूरत खेल त नयननमें लाल भावते जियके ॥१॥
एकबार मुसकाय चलेजब हृदय गडे गुणपीके ॥
परमानंद कोऊ आनमिलाओ प्रड्डबरसयी तोके । | Shayan Darshan | NityaPad-307 | Kalyan |
Mero tou kaanh hairi praan sakhiri aana dhyaan nahin merey manake harran sukhake curran ..| | मेरो तो कान्ह हैरी प्राण सखीरी आन ध्यान नाहिन मेरे मनके हरन सुखके करन ॥|
लटपटी पचरंग पाग ढरक रही वाम भाग कुंकुमको तिलक भाल नयनकमल घनस्याम वरन ॥|१॥
भूकुटी कुटिल ललाट लोलरत्नजटित कुंडल लोल मानों शशि प्रकट भयो उदय कियो युगल तरणि ॥।
प्रभु कल्याण गिरिधरकी छबि निरखत मगन भई मोहि लई मन माई मुरली अधरधरणि ॥२॥ | Shayan Darshan | NityaPad-307 | Kalyan |
Bhori bhori batian curr curr munn harleenon .. naval naar | भोरी भोरी बतियन कर कर मन हरलीनों ॥ नवल नार
कमलवबंदन रूपके रसीले नयना कछुक जोवन मदमाते तामें काजर भरदीनो ॥१॥
मूदु मुसकाय कछु चितई छबीली नाजानो कछुक चेटक कीनो ॥ चतुर विहारी
मेरी सुधिबुधि टारी प्यारी नेक मयाकर चीनो ॥२॥ | Shayan Darshan | NityaPad-308 | Kalyan |
Kanhar chhadoho larkai.. kaahekon jaat paraayen chori ghar goras adhikai .. 1.... | कान्हर छाडोहो लरकाई॥ काहेकों जात परायें चोरी घर गोरस अधिकाई ।। १॥॥
होंतो बहुत करी नकवानी अबही उराहने आई ॥ बाहर द्वार जाउ जिन अबतें घर
खेलो दोऊभाई ॥। २॥| हों बलबल मेरी सिख मानों देहों मधुर मिठाई ॥ सुनहैं जो
ब्रजराजमहेरत्नो खिजहें कुंवरकन्हाई ॥३॥ | Shayan Darshan | NityaPad-308 | Kalyan |
Tero jiya basat govind paiyaan.. kaheki abb duraav kartahai ree moso jaantahun parkhat parchhaiyaan ..1.. | तेरो जिय बसत गोविंद पैयां।। काहेकी अब दुराव करतहै री मोसो जानतहूं परखत परछैयां ॥१॥
दृष्टिसु भाव जनावत हों भामिनसोंई जक लाग रही मनमहीयां ॥
परमानंदस्वामी की प्यारी हावभाव दे चली गल बहीयां ॥२॥। | Shayan Darshan | NityaPad-308 | Kalyan |
Aho yeh | अहो यह
चंदन होय प्यारी उबटने को परागसार ॥ यह जान मनहरि करराख्यो कहत वे
दमत सार ॥ १॥ वीचअंक अंजन मृगमदके नाहीं कलंक अनुसार ॥ ब्रजभामिन
न बसत साजत सकल कला शशि घटत तबहीं सजत स्याम अभिसार ॥।२॥ | Shayan Darshan | NityaPad-308 | Kalyan |
Rahey chita nishdin chaak chadhayo .. jabate praan jeevandhan | रहे चित निशदिन चाक चढ़यो ॥ जबते प्राण जीवनधन
देखे अधिक अनंग गढयो ॥१॥ मुरलीनाद परयो श्रुति जबतें क््योंहूं
न कढत कढ्यो ॥ ब्नजनागरि ब्रजनाथसों मिल प्रेमपयोध बढ्यो ॥२॥। | Shayan Darshan | NityaPad-308 | Kalyan |
Aankhan aagein syaam uday shyam kahan laagi gopi kahaan gaye shyam .. | आंखन आगें स्याम उदय श्याम कहन लागी गोपी कहां गये श्याम ॥
आदहु श्याम अंतहुं श्याम रोमरोमरम रह्मो काम ॥१॥
मधुवन आदि सकल वन ढूंढयो निधि घन कुंजधाम ॥
परमानंददास को ठाकुर अंगअंग अभिराम ॥ २। | Shayan Darshan | NityaPad-308 | Kalyan |
Tum hita banban bahu dolly .. navalarasik navnagar giridhar | तुम हित बनबन बहु डोली ।। नवलरसिक नवना गर गिरिधर
कहि कहिके बोली ॥१॥। तज जियलाज कान गुरुजनकी कपट कंचुकी खोली ॥।
ऐसे मिली नवल ब्रजभामिन मनमथ मनमथ टोली ॥ २॥ | Shayan Darshan | NityaPad-308 | Kalyan |
Mero munn gopal haryori ..| chitwatahi | मेरो मन गोपाल हर॒योरी ॥| चितवतही
उरेंपेठ नयनमग को जाने हरि कहा करयोरी ॥ मातपिता पतिसजन बंधुजन सखी
आंगन सब भवन भर्योरी ॥ लोकबेद प्रतिहार पहर अति नहीं राख्यो दूर
परयोरी ॥ २॥| धरमधीर कुल लाज कूंचीकर जीह तारो दे उर में धर॒योरी ॥
शुंखलभई लाज कबाट कठिन उरएते यतन कछुही न सर्योरी ।। ३॥। बुद्धिविवेक
बलसहित सच्योमैंसोधन अटल कबहुं न टर॒योरी ॥ लियोहै चुराय चितें हंस
चितबित सोच सूरत नजात जर्योरी ॥४॥ | Shayan Darshan | NityaPad-309 | Kalyan |
Giridhar chaal chalat | गिरिधर चाल चलत
लटकीली ॥ सीसमुकुट काननकुंडल मुरली बजावत रसीली ॥१॥ यम्ुनातीर
तमाल लता वनफिरत निरंकुश नंदकिशोर ॥ भ्रोंह विलासपास वसकीने मोहन
अंगत्रिभंगतें जोर ॥२॥ लेराधे कुचबीच निरंतर सकल सुखद प्रेमकी डोर | यह
उचित होय ब्रज सुंदर परमानंद चपल चितचोर ॥३॥ | Shayan Darshan | NityaPad-309 | Kalyan |
Kahee naan parey hoe rasik kunwar kii kunvaraai .. kotimadan nakh joti avalokat | कही न परे हो रसिक कुंवर की कुँवराई ॥ कोटिमदन नख जोति अवलोकत
पसरत नव इंदुकिरण की जुन्हाई ॥९॥ कंकणवलयहार गजमोती देख््रियत
अंगअंग में वहझाई ॥ सुधर सुजानस्वरूप सुलक्षण गोविंदप्रभु सबबिध
सुंदरताई ॥२॥ | Shayan Darshan | NityaPad-309 | Kalyan |
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