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Kirtan Title | Kirtan | Category | Book-Page# | Raag |
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Tero mohan vadan giridhar laal rasikke munn bhawat lavanya | तेरो मोहन वदन गिरिधर लाल रसिकके मन भावत लावण्य
सदन ॥ सुन राधे रूपरास तोहि निरखत लाजत मदन ॥१॥ सुरत सुधानिधि
अधरसुधारस प्रमुदित करत अदन ॥ कृष्णदासस्वामी संग गावत रतिपति जय
को कदन॥ २॥ | Shayan Darshan | NityaPad-309 | Kalyan |
Tere manki baat kaun jaaneri.. jopein darr | तेरे मनकी बात कौन जानेरी॥ जोपें डर
होईतो नंदसून बोले ऐसी कौन युवती जो न मानेरी । १॥। तेरी अरु हरिकी मिलिये
चलती है माई यह बूझ परत है जिय अपनेरी ॥ कुंभनदासप्रभु गिरिधरन मोहन
यह ब्रज युबती औरन गिनेरी ॥ २॥ | Shayan Darshan | NityaPad-309 | Kalyan |
Kahey radha | कहे राधा
देखहु गोबिंद ॥ भलो बनाव बन्योहै वनको पूरण राका चंद ।।१॥ मंदसुगंध
सीतल मलयानिल कालिंदीके कूल ॥ जाईजुई मल्लिका यूथी फूले निरमल
फूल ॥२॥ सब अब लाख होत है मनकें मनहीं रहत जियराध ॥ तुम्हारे समीप
कौन रसनाहीं नाथ सकल सुखसाध ॥३॥ सुनके बचन बहुत सुख
मान्यो हँसदीनी अंकवारि ॥ परमानंदप्रभु प्रीत पुरानी नागररसिक मुरारि ॥४॥ | Shayan Darshan | NityaPad-309 | Kalyan |
Nayana merey atkeri vaa mohan | नयना मेरे अटकेरी वा मोहन
के संग।। कहा कहों वरज्यो नहीं मानत रंगे उनके रंग ॥।९॥ औरनको तिरछे हवे
चितवत गुरुजन हीसों जंग ॥ सूरदासप्रभु प्रेमसुरत में होत न कबहू भंग ॥॥२॥ | Shayan Darshan | NityaPad-310 | Kalyan |
Yeye suna gopkunwar teree chhabi neeki .. jaba tuu badan nihaarat | ये सुन गोपकुंवर तेरी छबि नीकी ।। जब तू बदन निहारत
पिय सन्मुख तब चंदजोति फीकी ॥ कहांलौं वरनो सब अंग निरूपम ताते सजो
विधना जोरी पीकी ॥ रसिक प्रीतमकी बानिक निरखत सकल अंग नयन
सीतलता तियकी ॥२॥ | Shayan Darshan | NityaPad-310 | Kalyan |
Rasik shiromani raag kalyan | रसिक शिरोमणि राग कल्याण
गावे॥ अवघर बिकट तान तरंग भेद उपजाबे ॥१॥ सब विध सुघर सुजन
सुंदरमोहन वेणु बजावे ॥ गोविंद प्रभु को वृषभान नंदिमी रीझ प्यारी कंठ
लगाबवे॥२॥ | Shayan Darshan | NityaPad-310 | Kalyan |
Prakatat bhayohai | प्रकटत भयोहै
कल्याण ।॥ सकल अमंगल दूर किये है तिमिर जात उदय भान ॥ १॥ आनंदबढ्यो
हृदय भकतनके पायो परम निदान ॥ कृष्णदास प्रभु गिरिधरपर वारों तन मन
प्राण ॥२॥ | Shayan Darshan | NityaPad-310 | Iman |
Kahaa kahon tere bhaagya kii mahima nandaldeto paayo .. | कहा कहों तेरे भाग्य की महिमा नंदलडेतो पायो ॥
स्थामतमाल रसिक नटनागर बाहुवेली अरुझायो ॥१॥ पिय अतिसुघर सुघर तू
प्यारी संगमिल यश गायो ॥ पार्वतीपति को अग्निबल जारद्ो मदन
जिवायो ॥२॥ जान सिरोमणि लाल छबीलो कछुक जनाय भूलायो ॥ कृष्णदास
प्रभु गोवर्धनधर कुच भुजबीच बसायो ॥। ३॥ | Shayan Darshan | NityaPad-310 | Kalyan |
Daurdaur jaat | दौरदौर जात
निकट अ्रवणनके हँसमिलवत करकटाक्ष कहत रजनी रतिबैन ॥१॥ लटपटी
चाल अटपटे बंदस सगमगी अलग बदनपर विधुरी प्रफुल्लित अंगअंग मैन |
गोविंद बल सखी कहे मैं तोस विलखी मेरे जिये तबहींतें अतिसुखचेन ।। २॥। | Shayan Darshan | NityaPad-310 | Kalyan |
Laal mukh venuvaje mandmand cull | vaam | लाल मुख वेणुवाजे मंदमंद कल | वाम
भुजापर वाम कपोल कुंडल वलगत भ्रू युग चपल ॥॥१॥ मोहित व्योम विमान
बनिता खसित नीवी सुधि न अंचल ॥ गोविंदप्रभुके तरुण मदमाते विघूर्णित
लोचन युगल ॥२॥ | Shayan Darshan | NityaPad-310 | Kalyan |
Lalanmukhaki lunai kaisehun varani naan jaaee ... | लालनमुखकी लुनाई कैसेहुँ वरनी न जाई ॥।
भालतिलक कुंडल अलकबीच बीचचंपकली अरुझाई ।। १.॥ अरुण नयन तरुण
मदमाते वरषे करण अधरामृत मंदहासकी जुन्हाई ॥ सुभग कपोल मृदुबोल
गोविंदप्रभुके जूअंगअंग सुंदर मणिराई । २॥ | Shayan Darshan | NityaPad-310 | Iman |
Hans peak daari | हँस पीक डारी
अचरापरी चलि ये जात ही गली मोहन बैठे छाजें।। निरख बदन गृह कल न परत
तन कछुक संकुचमें गुरुजनकी जियमें धरी ॥। १॥| सुंदर कर कमल फेरकें सेन दई
जहां निबिड निकुंजदरी ॥ लें चली सखी मोहि जहांरी गोविंदप्रभु रह्मो न परतरी
प्रियाप्रेम हृदय उमगभरी ॥२॥ | Shayan Darshan | NityaPad-311 | Iman |
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